ब्रावो ने 2014 के भारत दौरे को लेकर बीसीसीआई की तारीफ की

जागरूक टाइम्स 864 Nov 18, 2018

वेस्टइंडीज के ऑलराउंडर और पूर्व कप्तान ड्वेन ब्रावो ने 2014 में भारत दौरा बीच में छोड़ने के फैसले को लेकर कहा कि तब उनकी टीम पर आजीवन प्रतिबंध का खतरा मंडरा रहा था। ब्रावो ने तब बीसीसीआई और उसके तत्कालीन अध्यक्ष के रुख की भी सराहना की है। अनुबंध और वेतन करार की वजह से वेस्ट इंडीज ने 2014 का भारत दौरा बीच में ही छोड़ दिया था। उस वक्त ब्रावो कप्तान थे।

ब्रावो' ने कहा, 'दौरा बीच में छोड़ने का फैसला हमने एक टीम के रूप में किया था। मैंने हर एक खिलाड़ी को सुना था। सिर्फ एक खिलाड़ी को छोड़कर सभी ने दौरा बीच में छोड़ने को लेकर अपने हस्ताक्षर किये थे। इस बारे में हमने कई बार वेस्ट इंडीज प्लेयर असोसिएशन के अध्यक्ष वैवेल हिंड्स और क्रिकेट वेस्ट इंडीज के अध्यक्ष डेव कैमरन से संपर्क करने की भी कोशिश की थी।'

ब्रावो ने कहा, 'हम पहला मैच भी नहीं खेलना चाहते थे, लेकिन खेला। दूसरे मैच से पहले भी ऐसा ही माहौल था, लेकिन हमने एक के बाद एक 4 मैच खेले। चौथे मैच में हमने उन्हें इशारा दे दिया था कि जो कुछ भी हो रहा है हम उससे खुश नहीं हैं। आगे नहीं खेल पाएंगे।' यही नहीं, इस मैच से ठीक पहले तत्कालीन बीसीसीआई चेयरमैन एन. श्रीनिवासन ने उन्हें सुबह 3 बजे मेसेज किया और मैदान पर उतरेन को कहा।

उन्होंने बीसीसआई की तारीफ में कहा, 'दौरा छोड़ने को लेकर बीसीसीआई की ओर से हमें कहा गया कि जो भी नुकसान हो रहा है उसकी भरपाई कर दी जाएगी पर हमने इनकार कर दिया। हमने कहा बोर्ड को इस मामले को सुलझाना चाहिए। ब्रावो ने कहा, 'मुझे अच्छी तरह याद है कि जब हमने मैच नहीं खेलने की बात कही तो सुबह 3 बजे बीसीसीआई के चेयरमैन एन. श्रीनिवासन ने मुझे मेसेज किया। उन्होंने लिखा- कृपया मैदान पर उतरो।

मैंने उन्हें सुना और सुबह 6 बजे उठकर टीम को बताया कि हमें खेलना होगा। सच कहूं तो हम सभी मैच खेलने के खिलाफ थे। सब मेरे बारे में सोच रहे थे कि इन सब चीजों से मैं काफी परेशान हो चुका हूं।' उन्होंने कहा, 'लेकिन मैं खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर चिंतित था, क्योंकि दौरा बीच में छोड़ना बहुत बड़ा फैसला था। पूरी टीम पर आजीवन लग सकता था। इसलिए हमने बीसीसीआई की चेयरमैन की बात सुन ली।'

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