मंदिर तो हो गया अब बस केवल विकास

जागरूक टाइम्स 611 Aug 6, 2020

नीरज दवे / जागरुक टाइम्स

अयोध्या में प्रभु राम की जन्म भूमि पर बनने वाले भगवान राम के भव्य मंदिर की शुरूआत के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण से यह साफ हो गया है कि बीजेपी के लिए अब विकास सबसे बड़ा मुद्दा है, राम मंदिर बीजेपी के लिए अब चुनावी मुद्दा नहीं रह गया। और यह भी तय हो गया कि अयोध्या में भगवान राम के मंदिर का श्रेय हमेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिलेगा। भूमि पूजन के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी की ओर से साफ संदेश दे दिया गया है कि राम मंदिर के लिए आज के हुए कार्यक्रम के बाद अब इस मुद्दे को बहुत ज्यादा तूल देने की जरूरत नहीं है और उनकी सरकार अब मुख्य एजेंडा विकास है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक के मुखिया मोहन भागवत भी मंच पर थे। अपने भाषण की शुरुआत ही प्रधानमंत्री ने जानकी माता को याद करके की और अंत में भी जय सिया राम का नारा दिया। राजनीति के जानकार मानते हैं कि आज के इस ऐतिहासिक समारोह के बाद भारत के इतिहास के सबसे लंबे धार्मिक - राजनीतिक मिश्रण के इतिहास का समापन होने जा रहा है, इसके साथ ही नए भारत की शुरुआत होगी। और यह भी मानते हैं कि अयोध्या के इस आयोजन से मोदी की हिंदुत्व के एक मजबूत नेता की छवि बनी है, जो हमेशा उनके प्रोफाइल में समाहित रहेगी।

राम जन्मभूमि मंदिर के शिलान्यास के मौके पर अयोध्या में आज के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रुख में थोड़ा परिवर्तन था। भले ही उन्होंने राम मंदिर आंदोलन को याद करते हुए कहा कि इसमें संघर्ष और समपर्ण था, लेकिन उन्होंने राम मंदिर निर्माण को विकास भी जोड़ दिया। राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार मानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने साफ संदेश देने की कोशिश की अब यह मुद्दा अहम पड़ाव की ओर पहुंच चुका है और इसमें अब कोई आक्रमकता की जगह नहीं रह गई है। परिहार इसे परिभाषित करते हुए कहते हैं कि मोदी ने अपने भाषण में इसीलिए कई बार जय सियाराम कहा, जिसमें सरलता व विनम्रता का संदेश है, जबकि बीजेपी के अब तक के जय श्रीराम के संदेश में आक्रामकता व सामथ्र्य के प्रदर्शन की प्रेरणा के संकेत समाहित है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत और अंत च्जय सियारामज् और च्सियापति रामचंद की जयज् कहकर किया। परिहार कहते हैं कि , अडवाणी-अटल वाली बीजेपी ने अयोध्या में राम-मंदिर बनने की मुहिम को आगे बढ़ाया, उसे अपने मुकाम तक पहुंचाने का काम नरेंद्र मोदी ने किया। इसलिए इसका श्रेय हमेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिलेगा, यह भी आज तय हो गया।

वैसे भी, प्रधानमंत्री मोदी विवादित मुद्दों को छूने व उनसे सजगता से बचते हुए अपनी बातों को हर तरीके से लोगों के दिलों में उतारने में माहिर है। इसीलिए उन्होंने अपने भाषण में आयोजन में कई प्रमुख लोगों की अनुपस्थिति को स्पष्ट करते हुए श्रीराम की मर्यादा का स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना की वजह से यह कार्यक्रम भी कई तरह की मर्यादाओं से बंधा है और हमें इसका पालन करना है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट के फैसले वाले दिन पूरे देश ने मर्यादा दिखाई थी उसी तरह आगे भी ऐसा ही करना है। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री की ओर से यह स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि राम मंदिर के लिए आज के हुए कार्यक्रम के बाद अब इस मुद्दे को बहुत ज्यादा तूल देने की जरूरत नहीं है और उनकी सरकार अब मुख्य एजेंडा विकास है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत बी इस अवसर पर उनके भाषण को बहुत ध्यान से सुन रहे थे। राजनीति के जानकार मानते हैं कि इस नारे के साथ बीजेपी ने एक अहम पड़ाव तय कर लिया है, और अब इसे वोट का जरिया बनाने के बजाय विकास के मुद्दे पर खड़े रहना होगा।



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