नागाणी : पति पत्नी दोनों की एक साथ हुई थी मौत

जागरूक टाइम्स 953 Apr 23, 2021
नागाणी : देश में कोरोना वायरस ने विकराल रूप धारण कर लिया है हर दिन सैकड़ों लोगों की पॉजिटिव रिपोर्ट सामने आ रही हैं। इस कोरोना बीमारी ने एक गाँव के दानवीर व उनकी पत्नी दोनों को भी चपेट में ले लिया।हम बताते हैं नागाणी गाँव के एक दानवीर की पुरी कहानी रेवदर तहसील के नागाणी पंचायत में एक ऐसे दानवीर थे सोनी तिलोक चन्द गमनाजी सोनी,जो गुप्त दानवीर थे।कभी पता ही नहीं चलता था की कोई काम किसने करवाया।तिलोक चन्द सोनी बचपन से ही गाँव के मुख्य दानवीर व भामाशाह थे।वे खुले हाथों से दान करते थे,जिससे नागाणी गांव में अनेकोनेक कार्य सिध्द हुए है। आज भी नागजी महाराज के नाम से जानें वाला नागाणी गाँव में नागजी महाराज का मुख्य द्वार, गाँव का मुख्य स्टेशन पर यात्रियों के बैठने के लिए धर्म शाला और बस स्टेशन पर ही लोगों के आने-जाने वालों के लिए पानी की प्याऊ भी उन्होंने बनाई है ।दानवीर तिलोक चन्द सोनी यही नही रूके गाँव के बीचोबीच मुख्य चौराये पर मुख्य दरवाजा,गणेश दरवाजा वो भी उन्होंने बनाया ।ऐसे छोटे-मोटे कही काम करवाये है जो गुप्त है।

गाँव के शमशान घाट पर लोगों को अन्तिम संस्कार करनें का चलोड बनाया है वो भी तिलोक चन्द सोनी ने बनाया है। गाँव मे कहीं जगह गाऊ माता के लिए पानी की टंकियाँ बनाई है ।इस लिये तो उन्हें 'गाँव का दानवीर' नाम से जानते है लोग। दानवीर तिलोक चन्द सोनी ऐसे व्यक्ति थे जो सिरोही जिले के हर गाऊ शाला मे गुप्त दान करतें थे। हर साल लाखों रूपये की हरे चारे की व्यवस्था करते थें ।सिरोही जिले के हर गाऊ शाला मे और बड़े बड़े मेलों में गुप्त राशन सामग्री भेजते थे। नागाणी ग्रामीण बताते हैं की तिलोक चन्द सोनी एक ऐसे व्यक्ति थे जो हर गरीब जनता और हर मन्दिर हर परिवार के लिए उनके पास जो भी सहयोग मांगने जाता था उनके घर से वो कभी खाली हाथ नहीं आया ।हर आदमी उनके घर से कुछ लेकर ही आता था और ख़ुशी से उनको दिल से आशीर्वाद देते थे।

कल जैसे गाँव में ख़बर आई की तिलोक चन्द सोनी और उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी सोनी की मौत हुई है मानों लोगों को विश्वास तक नही हुआ ।फिर पता चला तब लोग बोलने लगें की भगवान के आगें किसी की नहीं चलती मगर दुख के साथ ये भी कहतें नही भुले की दोनों पति पत्नी के पूण्य के काम से दोनों एक साथ बीमार हुऐ एक साथ पालनपुर में भर्ती हुऐ और एक साथ दोनों ने प्राण छोडे और एक ही साथ कुछ घण्टों के अन्तर्गत दोनों को एक ही जगह अन्तिम संस्कार हुआ। ऐसे सब एक साथ होना एक चमत्कार से कम नही है ये उनके दान करनें का फल है जो युगों-युगों तक गाँव के लोग याद करेंगे । दानवीर तिलोक चन्दं सोनी का रिकॉर्ड रहा है की गाँव मे इतनें बड़े बड़े काम किये,कई बार दान किये मगर कभी माला और साफा नही पहना।सम्मान से हमेशा दूर रहते थे ,जब भी लोग उनको सम्मान का बोलते थे तो वो बोलते थे कि भगवान के लिए पूण्य किया है तो माला साफा पहनने से क्या मतलब ।ये सब पूण्य के लिए किया है स्वागत के लिए नहीं।

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