जिला अस्पताल में नि:शुल्क आयोजन वितरण करने वाली स्थान जुझ रही है आर्थिक तंगी से

जागरूक टाइम्स 139 Feb 26, 2021

-लॉकडाउन के बाद बंद होने की कागार पर संस्थान
-जरूरतमंदों के लिए संचालित संस्थान अब भामाशाहों की आस पर

सिरोही। सारणेश्वर मानव सेवा संस्थान की ओर से जिला अस्पताल में नि:शुल्क आयोजन वितरण किया जा रहा है। लेकिन इस संस्थान पर आर्थिक तंगी के चलते बंद हाने के काले बादल मंडरा रहे है। यह संस्थान पिछले कई वर्षाे से जिला अस्पताल के जनाना वार्ड में ार्ती महिलाओं सहित उनके साथ आये परिजनों को नि:शुल्क आयोजन देने का कार्य करती आ रही है। कोरोना संक्रमण के दौर लगे लॉकडाउन के बाद यह संस्थान बंद होने के कागार पर आ चुंकी है। संस्थान को भामाशाहों के सहयोग करने पर यह संस्थान कई वर्षाे से संचालित थी। लेकिन अब इस संस्थान को भामाशाहों का सहयोग नही मिलने के कारण बंद होने की कागार पर आकर खड़ी है। संस्थान संचालक कांतिलाल माली ने बताया संस्थान कई वर्षाे से नि:शुल्क आयोजन वितरण कर रही है। लेकिन अब भामाशाहों का सहयोग नही मिलने से संस्थान में आर्थिक तंगी चल रही है। उन्हानें बताया जिला प्रशासन द्वारा हमें मात्र एक धर्मशाला मिली हुई है। उस धर्मशाला के अंदर ही संस्थान द्वारा आयोजन तैयार किया जाता है। वही अ ाी तक जिला प्रशासन द्वारा हमें कोई आर्थिक सहायता नही मिली है।

इस संस्थान को आगे बढ़ाने में भामाशाहों का काफी सहयोग रहा है। समय-समय पर बड़े-बड़े भामाशाहों के द्वारा संस्थान को आर्थिक सहायता प्रदान की थी। लेकिन कोरोना संक्रमण के दौरान लगे लॉकडाउन के बाद में संस्थान को भामाशाहों द्वारा मिलने वाला सहयोग बंद होने से संस्थान को आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। लॉकडाउन के दौरान सारणेश्वर मानव सेवा संस्थान द्वारा झुग्गी बस्ती, पैदल चलने वाले प्रवासी मजदूर, गांव में रहने वाले जरूरतमंदों तक संस्थान द्वारा आयोजन पहुंचाया था। आज के इस कोरोना संक्रमण के दौर में जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने वाली संस्थान खुद आर्थिक तंगी से जुझ रही है।

संस्थान ने की है आमजन की सेवा
सारणेश्वर मानव सेवा संस्थान ने जिला अस्पताल में इलाज के लिए आये मरीज व उनके परिजनों को क ाी ाी ाूखा सोने नही दिया। संस्थान द्वारा हर तरह का सहयोग आमजन को किया है। इस संस्थान की जिला प्रशासन ने ाी प्रशंसा की है। लॉकडाउन के बाद से इस संस्थान को भामाशाहों की ओर से कोई आर्थिक सहायता नही मिलने के कारण संस्थान संचालक कान्तिलाल ाुद अपने स्तर पर चला रहे है। लेकिन उन्हानें ाी यह कह दिया है की अगर समय पर भामाशाहों का सहयोग नही मिला तो संस्थान बंद हो सकती है।

200 लोगों को यह संस्थान नि:शुल्क आयोजन देती है
जिला अस्पताल में प्रसव पीड़ा के दौरान ार्ती महिलाओं को सुबह के समय में दूध, दलिया, दोपहर को रोटी, सब्जी, दाल वही रात्रि में रोटी, सब्जी, दाल, चावल दिया जाता है। वही मरीज के साथ आये परिजनों को ाी संस्थान द्वारा आयोजन दिया जाता है। वही आपको बता दे दो वक्त की रोटी के लिए जरूरतमंद लोगों को यह संस्थान नि:शुल्क आयोजन देती है। हर रोज करीब 200 लोगों को यह संस्थान नि:शुल्क आयोजन देती आ रही है। अब देखने की बात यह है इस संस्थान को भामाशाह व जिला प्रशासन का सहयोग मिलता है या नही।

इनका कहना है।
लॉकडाउन के बाद से संस्थान आर्थिक तंगी जुझना पड़ रहा है। भामाशाहों का सहयोग नही मिलने नि: आयोजन व्यवस्था को चलाना मुश्किल हो गया है। समय रहते भामाशाहों का सहयोग मिला तो यह संस्थान फिर से जीवत हो सकती है नही तो संस्थान बंद हो जायेगी। कान्तिलाल माली संस्थान संचालक सिरोही।

मैं अपने परिवार के सदस्य के प्रसव पीड़ा के दौरान जिला अस्पताल में तीसरी बार आया हूं। इस संस्थान द्वारा नि:शुल्क शुद्ध व गर्म आयोजन मिलता है। यह संस्थान जरूरतमंद लोगों को नि:शुल्क आयोजन देने का अच्छा कार्य कर रही है।:-हिराराम निवासी जोयला सिरोही

हमें एक गरीब आदिवासी महिला हुई मैं अपने परिवार की महिला के प्रसव के लिए जनाना अस्पताल आई हूं। हमारे पास इतने पैसे नही है की हम होटल से खाना मंगाकर खा सके मुझे अस्पताल में दो दिन हो गए है इस संस्थान द्वारा नि:शुल्क आयोजन पर ही हम चल रहे है।:-झूमीदेवी आदिवासी महिला निवासी नितोड़ा सिरोही।







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