जोधपुर: IIT ने बनाया कैम्पस रक्षक कवच, 4 प्रोजेक्ट से स्टूडेंट्स होंगे कोरोना 'फ्री'

जागरूक टाइम्स 221 May 26, 2021

जोधपुर. कोरोना संक्रमण के चलते देशभर में स्कूल और कॉलेज बंद पड़े हैं. कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने के बाद स्कूल और कॉलेज खुल भी जाएंगे. लेकिन स्कूली बच्चों और कॉलेज स्टूडेंट्स में कोरोना संक्रमण का खतरा जारी रहेगा. इस बीच जोधपुर आईआईटी ने 'कैम्पस रक्षक प्लान' लागू कर अपने स्टूडेंट्स को कोरोना कवच प्रदान किया है. देश के 5 इंस्टीट्यूट की रिसर्च के बाद यह प्लान बनाया गया है. इससे कोरोना संक्रमण के बाद भी आराम से कैम्पस संचालन किया जा सकता है.

जोधपुर आईआईटी में कोरोना विस्फोट के बाद आईआईटी ने देश के पांच इंस्टीट्यूट में इस रिसर्च को करना शुरू किया. 5 संस्थानों में रिसर्च कर पोस्ट कोविड में कैम्पस चलाने का तरीका निकाला गया है. आईआईटी के प्लान में बताया गया है कि कैम्पस में व्यवस्थायें खास तरह से लागू की जाएं तो कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है. आईआईटी के इस प्लान के बाद कैम्पस में कोरोना संक्रमण का खतरा तो कम हुआ ही है इसके बाद अब कोई दूसरा स्टूडेंट कोरोना की चपेट में नहीं आया है.

4 प्रोजेक्ट लागू कर बनाया कैम्पस रक्षक कवच
आईआईटी जोधपुर ने चार प्रोजेक्ट बनाकर उसे लागू कर दिया है. इन चार प्रोजेक्ट में रेंडम सेम्पलिंग, गो कोरोना गो एप,फ्यूचर सिमुलेशन और बैजिंग 4 प्रोजेक्ट लागू किये है. इन प्रोजेक्ट्स में टेस्टिंग, ट्रेसिंग, टेक्नोलॉजी और ट्रेकिंग होगी. इससे स्टूडेंट्स को कोरोना से बचाया जाएगा.

पहला रैंडम सेम्पलिंग- इसमें कैम्पस में आने के बाद 10 फीसदी स्टूडेंट्स की रैंडम सेम्पलिंग कराई जायेगी ताकि कोई पॉजिटिव सामने आता है तो उसके परिवार,आसपास रहने वाले सहपाठी और फैकल्टी की भी जांच हो सकेंगी. पॉजिटिव आने वाले को क्वारेंटाइन किया जाएगा.

दूसरा गो कोरोना गो एप- आईआईटी जोधपुर और आईआईटी बेंगलुरु के एप गो कोरोना गो एप को डाउनलोड कर मोबाइल में ब्लू टूथ ऑन रखना होता है. वह कैम्पस के सर्वर से जुड़ा रहता है. कोई भी पॉजिटिव आता है तो इस एप से पता चल जाता है. इसके साथ ही यह भी पता चल जाता है कि वह पॉजिटिव किस किस के संपर्क में आया था.

तीसरा फ्यूचर सिमुलेशन- इस व्यवस्था में कैम्पस का मैप और लोगों की जानकारी डाल दी जाती है. यदि कोई पॉजिटिव आता है तो मैप में बताया जा सकेगा की पॉजिटिव अगले 30 दिन में कहां जाने वाला है. उसकी मुलाकात किस-किससे हो सकती है. उसकी जानकारी उन सभी को दी जा सकेगी की यह स्टूडेंट्स पॉजिटिव है.

चौथा बैजिंग- कोरोना संक्रमण की जांच के बाद आईआईटी स्टूडेंट्स को रेड,ऑरेंज और ग्रीन बैज जारी करेगा. यह बैज उनके मोबाइल पर रहेंगे. रेड का मतलब कोरोना पॉजिटिव है तो क्लास ऑनलाइन अटेंड करनी होगी. ऑरेंज बैज का मतलब है वह कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आ चुका है. उसका कोरोना टेस्ट करवाना होगा. इसके साथ ही ग्रीन बेज का मतलब वह स्टूडेंट सुरक्षित है.

आईआईटी जोधपुर के डायरेक्टर प्रो.शांतनु चौधरी ने बताया कि इन प्रोजेक्ट को कैम्पस में लागू कर दिया गया है. इससे कैम्पस को सुरक्षित बनाने में इस प्रक्रिया से काफी मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि अन्य कैम्पस भी इन प्रोजेक्ट को लागू कर स्टूडेंट्स को कोरोना से बचा भी सकते हैं. उन्होंने दावा किया कि कोरोना संक्रमण काल में इससे कैम्पस संचालन कर सकते हैं.

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