गांवों में बसें नहीं आने से निजी वाहनों से यात्रा करने की मजबूरी

जागरूक टाइम्स 287 May 24, 2018
पोकरण। उपखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन के लिए बसों के अभाव में जीप, टैक्सियां ही प्रमुख साधन बनी हुई है। इन अवैध टैक्सियों में क्षमता से अधिक सवारियां भरे जाने के कारण हर समय दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। अनेक बार दुर्घटनाएं हो जाने के बावजूद इस खतरे के प्रति न तो परिवहन विभाग जागरूक है और न ही ग्रामीण। साधनों के अभाव में होती है ओवर लोडिंग पोकरण उपखंड में कई गांव ऐसे हैं, जहां पर आज भी निजी या रोडवेज की बसों का आवागमन नहीं होता है। बसों के अभाव में इन गांवों के ग्रामीणों के सामने शहर तक आने के लिए मिनी बसें एवं जीपें ही यातायात का एक मात्र साधन हैं। इन वाहनों की भी कमी होने के कारण जान जोखिम में डालकर वाहनों के पीछे लटककर या छत पर बैठकर यात्रा करने को मजबूर है। परिवहन विभाग को होता है लाखों का नुकसान : गांवों में बसों के संचालन के अभाव में परिवहन विभाग को प्रति माह लाखों रुपये के टैक्स का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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