Jalore News: गेनाराम ने आत्महत्या कर तोड़ दी पूरे गांव की उम्मीदें, जानिये क्या है मामला

जागरूक टाइम्स 735 Mar 2, 2021

जालोर. सनसिटी जोधपुर स्थित डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में फांसी लगाकर आत्महत्या करने वाला एमबीबीएस का छात्र गेनाराम अपने गांव का एकमात्र ऐसा शख्स था जो डॉक्टर बनने जा रहा था. गेनाराम से परिजनों के साथ ही ग्रामीणों ने भी बड़ी उम्मीदें पाल रखी थी. पूरा गांव इस बात से उत्साहित था कि उनका भी अपना कोई एक डॉक्टर होगा. लेकिन कूल्हे में लगी गहरी चोट से मानसिक रूप से परेशान हो रहे गेनाराम ने आत्महत्या जैसा कदम उठाकर परिजनों और ग्रामीणों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. गेनाराम की आत्महत्या की खबर सुनकर उसके गांव में रविवार को सन्नाटा पसरा रहा.

गेनाराम देवासी देवासी (25) जालोर के रामसीन का रहने वाला था. एमबीबीएस बैच-2016 का स्टूडेंट गेनाराम जोधपुर में डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में रहकर अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा था. वहां कॉलेज के हॉस्टल नंबर 2 की तीसरी मंजिल पर स्थित कमरे में रह रहा था. गेनाराम के साथ ही एमबीबीएस करने रहे सिकवाड़ा निवासी जितेंद्र चौधरी के मुताबिक नियमित तौर पर उन दोनों के बीच बातें होती थी.

जितेन्द्र ने बताया कि गेनाराम पिछले कुछ महीनों से परेशान लग रहा था. लेकिन उसने अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं की. बकौल जितेन्द्र गेनाराम पढ़ने में काफी होशियार था. वहीं गेनाराम के एक अन्य दोस्त अजहरूद्दीन ने बताया कि वह 12वीं तक उसके साथ पढ़ा था. दोनों ने बागरा की निजी स्कूल से पढ़ाई की थी. दोस्त की मौत के गम में डूबे अजहरूद्दीन कहते हैं कि गेनाराम बचपन से होनहार था. वह जब भी मिलता था तो केवल पढ़ाई की ही बात करता था.

गत माह 10 दिन गांव रुककर गया था गेनाराम गत माह 12 तारीख को अंतिम बार गांव आया था. उस समय वह 10 दिन तक यहीं पर रुका था. गांव से जाने के बाद उसने जोधपुर में क्रिकेट प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया था. गेनाराम अपने 5 भाइयों में सबसे छोटा था. उसके पिता पशुपालन कर उसे पढ़ा लिखा रहे थे. लेकिन रविवार को सुबह जैसे ही उन्हें बेटे की मौत का समाचार मिला तो वे बेहोश हो गये.

गेनाराम ने शनिवार रात को हॉस्टल के कमरे से आत्महत्या करने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा. उसमें उसने अपनी पीड़ा को बयां किया था. गेनाराम ने अपनी मां-पिताजी, काका और भाई से सॉरी मांगते हुये लिखा कि वह गत 2 महीने से मानसिक रूप से बहुत परेशान है। दो साल पहले कुल्हे में लगी चोट से आहत है. उससे अब रहा नहीं जाता.

उल्लेखनीय है कि गेनाराम के दो साल पहले कूल्हे में फ्रैक्चर हो गया था. हालांकि उसका फ्रैक्चर तो ठीक हो गया था, लेकिन उसका दर्द गेनाराम के लिये असहनीय हो गया था. चलने में थोड़ी दिक्कत थी. वह गत दो माह से वीडियो देख देखकर अपने दर्द का इलाज तलाश रहा था. जब गेनाराम को दर्द का समाधान नहीं मिला तो उसने मौत को गले लगा लिया.




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