जालोर : ग्राम पंचायतों में पीडी खाते खोलने के विरोध में सरपंचों ने भरी हुंकार

जागरूक टाइम्स 300 Jan 14, 2021
- मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

जालोर। जिला मुख्यालय पर बुधवार को सरपंच संघ राजस्थान के आह्वान पर जिला शाखा जालौर की ओर से ग्राम पंचायतों के ब्याज रहित पीडी खाते खोले जाकर संवैधानिक वित्तीय अधिकारों में की जा रही कटौती को रोकने को लेकर सरपंचों ने ज्ञापन दिया। ज्ञापन में बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को मूर्त रूप प्रदान करने के लिए पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त करने के लिए समय-समय पर संविधान संशोधन किए जाते हैं। पंचायती राज संस्थाओं को स्वतंत्र निकाय के रूप में प्रतिस्थापित किया गया है, लेकिन राजस्थान सरकार के वर्तमान कार्यकाल में पिछले 2 वर्षों में कुछ प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों द्वारा पंचायती राज संस्थाओं के प्रशासनिक और वित्तीय हितों पर लगातार कुठाराघात किया जा रहा है। जहां एक और पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव की दयनीय स्थिति कर दी गई है। वहीं दूसरी और पंचायत राज संस्थाओं की वित्तीय हालत बहुत ही नाजुक हो गई है।

विगत 2 वर्षों में केंद्रीय वित्त आयोग की राशि के अतिरिक्त राज्य वित्त आयोग का एक रुपया ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित नहीं किया जा रहा है। यहां तक कि राज्य वित्त आयोग पंचम की सिफारिश के अनुसार वर्ष 2019-2020 में 4000 करोड़ रुपए में से एक भी रुपया का हस्तांतरण ग्राम पंचायतों को नहीं किया जा रहा है। इसमें भी सबसे बड़ी बात यह है कि राज्य वित्त आयोग की प्रथम किस्त की राशि 1450 करोड़ में से लगभग 364 करोड रुपए पंचायत समितियों और जिला परिषदों को हस्तांतरित कर दी गई लेकिन ग्राम पंचायतों के हक की 1086 करोड रुपए हस्तांतरण करने के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी होने के बाद में भी राशि अभी तक हस्तांतरित नहीं की गई है।

राज्य वित्त आयोग पंचम की द्वितीय एवं तृतीय किस्त की राशि आज दिनांक तक ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त छठे वित्त आयोग का तो आज दिनांक तक गठन तक नहीं किया गया है। ऐसे में 2020-21 में भी कोई राशि ग्राम पंचायतों को प्राप्त नहीं हुई है। ग्राम पंचायतों की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है एवं कार्यालय के प्रशासनिक संचालन के साथ ही जनप्रतिनिधियों व कर्मियों का भुगतान करने के लिए भी ग्राम पंचायतों में राशि उपलब्ध नहीं है।

इसी प्रकार ग्राम पंचायतों के चुने हुए जनप्रतिनिधि सरपंचों को ग्राम पंचायत स्तर पर गठित कोर समिति का अध्यक्ष तो बनाना दूर सदस्य भी नहीं बनाया गया है और सरपंच गणों को प्रशासनिक रूप से बहुत अधिक कमजोर कर दिया गया है। ऐसा राजस्थान की पंचायत राज संस्थाओं के इतिहास में पहली बार हुआ है। जहां एक और पंचायत राज संस्थाओं को पांच विभागों का हस्तांतरण कर नियंत्रण दिया हुआ है,वहीं दूसरी ओर सरपंचों को ग्राम पंचायतों में संचालित विद्यालय के प्रधानाध्यापक के अधीन कर दिया गया है। इन सब से भी बढ़कर वित्त विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा ग्राम पंचायतों के वित्तीय स्वायत्तता एवं संवैधानिक वित्तीय अधिकारों पर कुठाराघात करते हुए पिछले दरवाजे से ग्राम पंचायतों के ब्याज रहित पीडी खाता खोल दिए गए। खाते की कस्टोडियन सीधे राज्य सरकार की होती है।

ऐसे में ग्राम पंचायतों को संवैधानिक रूप से जो वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त थी वह भी समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। राजस्थान सरपंच संघ वित्त विभाग एवं पंचायत राज विभाग के इस निर्णय की कड़ी निंदा करता है। साथ ही सरपंच संघ ने निर्णय किया है कि प्रदेश का कोई भी सरपंच कोष है एवं उप कोषालय में डीडीओ कोड जनरेट नहीं करवाएगा ना ही लॉगिन आईडी बनाने के लिए कोई दस्तावेज प्रस्तुत करेगा। वित्त विभाग द्वारा पूर्व में भी फरवरी 2020 में ग्राम पंचायतों के पीडी खाता खोलने के प्रयास किए गए थे लेकिन सरपंच संघ के विरोध एवं ज्ञापन पर तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट द्वारा सहानुभूति विचार कर विभागीय स्तर पर पीडी खाते नहीं खुलवाने का निर्णय किया गया था। ज्ञापन के माध्यम से सरपंच संघ ने आग्रह किया कि वित्त विभाग के इस निर्णय को आगामी तीन दिवस में प्रत्याहारित करवा कर अनुग्रहित करवाया जाए।

अन्यथा राजस्थान सरपंच संघ को मजबूरन पंचायत राज संस्थाओं के संविधानिक हितों की सुरक्षा के लिए आंदोलन का कदम उठाना पड़ेगा यदि समय रहते सरकार ने सुनवाई नहीं की तो आगामी 21 जनवरी को प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों पर सांंकेतिक तालाबंदी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। साथी आगामी 30 जनवरी को जयपुर में राजस्थान सरपंच संघ की बैठक आयोजित कर आंदोलन की आगामी रणनीति पर विचार विमर्श करने का भी निर्णय किया जाएगा।

इन ग्राम पंचायतों के सरपंच पहुंचे विरोध करने
जिला मुख्यालय पर बड़ी संख्या में सरपंच पहुंचे। इनमे गुड़ा बालोतान, आहोर, मेडा उपरला, बिठुडा, शंखवाली वलदरा, भाद्राजून, निंबला, अजीतपुरा, ओड़वाडा, गजीपुरा, पावटा, बिबलसर, बावड़ी, राजिकावास, देबावास, ओटवाला, आवालोज, कांबा, तीखी, बालवाड़ा, बांदनवाडी, चांदना, खेतलावास, रायथल, आलासन, तालियाना, बागरा, तवाव, रायपुरिया, चरली, दादाल, कंवला, नोरवा, नोसरा, भंवरानी, थूर, बांकली, बागोड़ा पांचोटा, बाली, पमाना,कावतरा, बेदाना, तड़वा, सांथू, सोबड़ावास, मूडतरासिली, मांडवला, सुगालिया जोधा, चौरा, विरोलबड़ी, धमाणा, कारोला, हाड़ेतर समेत कई ग्राम पंचायतों के सरपंच उपस्थित हुए और ग्राम पंचायतों के ब्याज रहित पीडी खाते खोले जाकर संवैधानिक वित्तीय अधिकारों में की जा रही कटौती को रोकने का आग्रह किया। साथ ही तीन दिवस के भीतर मांगे नहीं मानने पर आंदोलन का रुख अख्तियार करने की चेतावनी भी दी।

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