जालोर-चूरू के समन्वय से 8 महीने की उजाला की जिंदगी में हुआ उजाला

जागरूक टाइम्स 293 Mar 3, 2021

- जालोर में एनएचएम प्रोग्राम में कार्यरत डीपीएम की मुस्तैदी आई काम

जालोर। चूरू जिले के लोहा गांव की 8 महीने की बच्ची उजाला सिंह की जिंदगी में जालोर की पहल ने मजबूत भूमिका अदा की। जालोर में एनएचएम में कार्यरत डीपीएम की मुस्तैदी व तत्परता उजाला के जीवन मे एक नया उजाला लेकर आई। इसमे जालोर और चुरू के समन्वय से तीन मार्च को उजाला के दिल के छेद का ऑपरेशन हुआ। हुआ यूं कि दूध पीती इस बच्ची के दिल में छेद था। तकलीफ होने पर उसकी माँ चंदा कंवर ने चुरू में ईको जांच करवाई तो हार्ट डिजीज के बारे में पता चला। बाद में जयपुर में एक अस्पताल में जांच करवाई तो रिपोर्ट में दिल मे छेद होना पाया गया। एक बार तो माँ के पैरों तले जमीन ही खिसक गई।

इधर ऑपरेशन के लिए एक बड़ी राशि की जरूरत थी, जो उजाला की माँ के पास नही थी और एक बार तो निराश हो गई। बाद में जानकारी मिलने पर ऑनलाइन सर्च किया और संजोग से जालोर जिले में एनएचएम प्रोग्राम में कार्यरत डीपीएम डॉ चरणसिंह के मोबाइल नंबर प्राप्त हुए। बाद में उन्होंने डीपीएम को अपनी समस्या के बारे में बताया। डीपीएम जालोर ने तत्काल प्रभाव से चूरू में चिकित्सा अधिकारी बिजेंद्र भाटी को संपर्क किया और 8 माह की उजाला सिंह के दिल के ऑपरेशन को लेकर समन्वय के माध्यम से ऑपरेशन के लिए मशक्कत शुरू की गई। इस कार्य में चुरू जिले के रतनगढ़ क्षेत्र के बीपीएम नेतराम सियाग ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत पूरी जानकारी पूर्ण की और आंगनवाड़ी के माध्यम से स्क्रीनिंग का कार्य करवाया। प्राथमिक जांच के बाद इस कार्यक्रम के तहत बच्ची का कार्ड बनाया गया और 3 मार्च को जयपुर के एक बड़े अस्पताल में दिल के छेद का ऑपरेशन किया गया।

यह हमारा दायित्व और फर्ज है
डीपीएम डॉ चरणसिंह ने बताया कि इसमें हमने कोई विशेष नहीं किया। यह तो हमारा दायित्व और फर्ज है। सरकार द्वारा दिल के छेद वाले बच्चों के लिए इलाज की पूरी व्यवस्था है और राजस्थान की एनएचएम टीम की तरफ से मेरा आमजन से निवेदन है कि अधिक से अधिक दिल के मरीज वाले बच्चों के बारे में विभाग को जानकारी प्रदान करें। ताकि उनका इलाज हो सके।

डीपीएम साहब की मदद से मेरी बच्ची को नया जीवन मिला
ऑनलाइन ढूंढने पर मुझे डीपीएम चरण सिंह के मोबाइल नम्बर मिले। गत 5 फरवरी को मैंने डीपीएम को कॉल किया तो उन्होंने मुश्किल घड़ी में मदद की। उन्होंने चुरू में संपर्क कर मेरी मदद करवाई। मेरी बेटी का इलाज हो गया। मेरा एक पैसा नही लगा। मेरे रहने, खाने का भी एक रुपया नही लगा और मेरी बच्ची को नया जीवन मिला। - चंदा कंवर, उजाला की माँ, निवासी चुरू

इनका कहना है
अलवर में कायाकल्प प्रोग्राम के तहत निरीक्षण कार्य के बाद जालौर लौट रहा था तब एक फोन आया जिसमें चुरू की एक महिला ने अपनी 8 महीने की बेटी उजाला सिंह के दिल में छेद होने की बात कही और मदद की गुहार। ऐसे में तत्काल प्रभाव से चूरू में एनएचएम टीम से संपर्क किया गया और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्ची का जयपुर के एक बड़े अस्पताल में दिल के छेद का ऑपरेशन सफल हुआ। इसने चुरू जिले के इन एनएचएम विभाग ने बेहतर काम किया। मैंने तो अपना फर्ज अदा किया और यह तो मेरी ड्यूटी है। - डॉ चरणसिंह, डीपीएम, एनएचएम ,जालोर








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