पंचायत राज के चुनाव ना कराकर लोकतन्त्र की हत्या कर रही है सरकार - देवल

जागरूक टाइम्स 378 Mar 6, 2020

रानीवाड़ा। विधानसभा की बैठक में गुरूवार को अनुदान की मांगों पर चर्चा में भाग लेते हुए रानीवाड़ा विधायक नारायणसिंह देवल ने ग्रामीण विकास, लोक निर्माण एवं सड़कें तथा पुल पर बोलते हुए कहा कि 1994 में जब पंचायती राज अधिनियम में संशोधन किया गया था उसके बाद से अब तक लगातार पंचायत राज के चुनाव होते रहे, लेकिन इस सरकार ने इतिहास रचते हुए पहली बार पंचायत राज संस्थाओं में प्रशासक लगाकर लोकतन्त्र की हत्या की है। गांवों की सरकार के चुनाव नहीं कराकर कांग्रेस की सरकार लोकतन्त्र में जनता की भागीदारी खत्म करना चाहती है। कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में गांवों में आरसीसी की सड़कें बनाने की घोषणा की थी।

देवल ने कहा कि 14 महिने और 19 दिन हो गये, एक भी गांव में सड़क बनाई हो तो बता दो। पंचायतों को पूरी दुनिया से जोडऩे के लिए इंटरनेट और वाई-फाई देने की घोषणा की थी, एक भी पंचायत में इंटरनेट और वाई-फाई लगाया हो, तो बता दो। पीएम आवास योजना में केन्द्र सरकार ने इस साल राज्य सरकार को 3 लाख 64 हजार आवास देने को कहा था, लेकिन इस सरकार ने 15 अगस्त से पहले तक केवल 9 प्रतिशत करीब 35 हजार आवास ही दिये थे, जब केन्द्र का दबाव आया तो इन्होंने 15 अगस्त तक 50 हजार आवास और दे दिये। फिर भी अभी तक केवल 24 प्रतिशत आवास ही दे पाये। एमएलए लेड के काम कराने के लिए इनके पास 1508 करोड़ थे, लेकिन इन्होंने केवल 377 करोड़ रूपये ही खर्च करें हैं।

केवल 25 प्रतिशत राशि के ही काम करा सके हैं। एमपी लेड में 628 करोड़ खर्च करने थे, केवल 24 प्रतिशत राशि ही खर्च किये हैं। राजीविका मिशन के 269 करोड़ खर्च करने थे, मात्र 107 करोड़ खर्च किए हैं। राजस्थान के ठेकेदार एक साल से भुगतान के लिए परेशान हो रहे हैं। सरकार उनको पेमेन्ट नहीं कर रही है। आज ठेकेदारों की ये स्थिति हो गई है उनको सामान नहीं मिल रहा है। केन्द्र सरकार ने एक योजना चला रखी है श्यामा प्रसाद मुखर्जी मिषन। उसमें मेरे विधानसभा क्षेत्र के रानीवाडा कलां कलस्टर में 105 करोड़ के काम होने थे, लेकिन ऐसे नाकारा अधिकारी बैठा रखें हैं, जिनको योजना के नियमों का ही पता नहीं। गलत सलत प्रस्ताव तैयार करके भिजवा दिये।

देवल ने कहा कि वे विधायक है, उनसे पूछा तक नहीं और रानीवाड़ा खुर्द में तो हद ही कर दी। केवल 7 लाख रूपये के ही प्रस्ताव भिजवाये। क्या किसी गांव में केवल 7 लाख के काम होना ही बाकि हो सकता है। नतीजा क्या हुआ, केन्द्र सरकार ने वो प्रस्ताव नामंजूर कर दिये। इसके बाद दोबारा जब भेजे तो केवल 3 करोड़ 16 लाख की ही वित्तीय स्वीकृतियां जारी हुई। मुख्य सचिव तक से गलती हुई है, क्या राज्य सरकार ऐसे नाकारा अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही करेगी, नुकसान तो जनता को हुआ है।


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