रानीवाड़ा : एसडीएम अग्रवाल ने 3 वर्ष पूर्व बिछड़ी मां को संतान से मिलाया

जागरूक टाइम्स 106 Jan 5, 2021

मां को देख संतान की खुशी का ठिकाना नही रहा, दौड़ कर लिपट गए

महेन्द्र देवासी/जागरूक टाइम्स संवाददाता

रानीवाड़ा। जब किसी की मां अचानक घूम हो जाये और उसका कहीं कोई अता-पता न लगे तो सोचो उसकी संतान पर क्या बीतती है। जब सारे रास्ते बंद हो जाये, फिर भी संतान की आंखे हमेशा अपनी जननी को देखने के लिए तरसती रहती है, जब एक माँ को तीन साल के बाद उसकी संतान उसके सामने खड़े होकर कहे कि माँ मैं तेरा बेटा हूँ तब सोचों उस माँ एवं बेटों की खुशी का क्या ठिकाना होगा, ऐसा ही हुआ तलिमनाडु राज्य के नागापटट्नम जिले की थिरूमरूगल थाना क्षेत्र के पोराकुडी गांव की 50 वर्षीय महिला मीना पत्नी स्वामीनाथन उसके घर से तीन साल पूर्व मंदिर गई थी, लेकिन वापस नहीं आई। तब कई महीनों तक खोजबीन की पुलिस से गुहार लगाई, लेकिन कही कोई सुराग नही लगा। लेकिन मीना के लिए जालोर जिले के रानीवाड़ा उपखण्ड अधिकारी प्रकाशचन्द्र अग्रवाल ने एक फरिश्ता बनकर बुढ़ापे का सहारा बन कर एक मां को संतान से मिलवाकर एक बार फिर सुकून के पल ओर खुशियों से झोली भर दी। एसडीएम प्रकाशचन्द्र अग्रवाल ने वाकई ही सराहनीय काम किया है।

आपको बता दे, कि 30 दिसम्बर की देर शाम को उपखंड कार्यालय के बाहर मानसिक रूप से विक्षिप्त एक अधेड़ महिला के घूमने की सूचना मिली, जो हुलिए से मराठी महिला जैसी लग रही थी। उपखंड अधिकारी प्रकाषचन्द्र अग्रवाल ने तहसीलदार शंकरलाल को निर्देषित कर शीत ऋतु को ध्यान में रखते हुए उक्त महिला को आत्मानंद सेवा संस्थान में ठहराया गया। जिला कलेक्टर हिमांशु गुप्ता के निर्देशन में 31 दिसम्बर को उपखंड अधिकारी प्रकाशचन्द्र अग्रवाल ने समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक करतारसिंह मीणा से बात कर इस प्रकार गुमशुदा महिला को रखने हेतु परामर्श किया, इस दौरान मीणा ने अग्रवाल को उक्त महिला को भरतपुर स्थित अपनाघर आश्रम भेजने की सलाह दी, जहां आश्रम के सचिव भूदेव शर्मा से वार्ता कर महिला को भेजने की तैयारी की।

भरतपुर भेजने से पूर्व महिला से बातचीत कर किसी तरह से उसके परिजनों एवं उसके मूल निवास स्थान के बारे में जानकारी प्राप्त की जाये। इस कसमकस के चलते उपखंड अधिकारी अग्रवाल ने एसआई चुन्नीलाल व महिला कांस्टेबल के साथ आश्रम पहुंचकर उक्त महिला से सहानुभुति पूर्वक पुछताछ की, लेकिन संवाद व्यवधान के चलते न महिला हिन्दी को समझ पा रही थी, न उसकी भाषा को वे समझ पा रहे थे। महिला ने संवादहीनता को समाप्त करते हुए कागज पर अपना नाम व पता संभवत: तमिल भाषा में अग्रवाल को लिखकर दिया। अग्रवाल ने महिला द्वारा लिखे हुए नाम व पते को दक्षिण में निवासरत स्थानीय लोगों से सम्पर्क कर दिखाया तो उन्होनें तमिल भाषा की पुष्टि करते हुए महिला का नाम मीना एवं पता नागापटट्नम बताया। जिस पर अग्रवाल ने तमिल मूल के पाली जिला वन अधिकारी डॉ शरत बाबू को उक्त घटना बताकर तमिलनाडु के पुलिस अधिकारियों से सम्पर्क साधकर मीना के परिजनों को महिला के मिलने की सूचना दी गई।

एक जनवरी को तमिलनाडु से मैसेज आया कि इस तरह की एक महिला तीन वर्ष पुर्व पोरूकुडी गांव से गुमशुदा है, मीना की तस्दीक के लिए तमिलनाडु पुलिस को फोटो भेजकर परिजनों से पहचान करवाई तो, परिजन वेलुमुरूगन ने मीना को अपनी मां के रूप पहचान लिया। परिजनों को पता चला कि उनकी माँ जिंदा है, तो उनकी खुशी ठिकाना नही रहा। वेलुमुरूगन अपने एक भाई एवं एक बहिन के साथ तत्काल रवाना होकर चार जनवरी सोमवार अलसुबह रानीवाड़ा पहुंचा। अग्रवाल की मौजुदगी में आत्मानंद सेवा संस्थान में बिछड़ी हुई मां को उसकी संतान से मिलाने का दृश्य हर किसी को भावुक करने वाला था। आश्रम पहुंचे वेलुमुरूगन ने माँ को देखते ही तमिल में कहा माँ तेरा वेलू आ गया, उस समय मीना मानसिक रूप से विक्षिप्त होने के बावजुद अपनी संतानों को पहचान गई एवं दौड़कर बेटे से लिपट गई।

इस दौरान मां एवं संतानों की आंखों से अश्रुधारा बह निकली। मीना को उसके घर तक पहुचाने वाले रानीवाड़ा एसडीएम प्रकाशचन्द्र अग्रवाल, तहसीलदार शंकरलाल मीणा एवं एसआई चुन्नीलाल सहित उनकी टीम का मीना एवं उसके बेटे वेलुमुरूगन ने नम आंखों से हाथ जोड़कर खुशी व्यक्त की ओर धन्यवाद दिया। वहीं तमिल मूल के पाली जिला वन अधिकारी डॉ शरत बाबू द्वारा भी महिला को परिजनों से मिलाने के लिए किए गए प्रयास तारीफे काबिल है।




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