गौशालाओं को बजट देने में BJP से पीछे नहीं कांग्रेस, 5 साल में दोनों सरकारों ने खर्चे किए 1500 करोड़

जागरूक टाइम्स 176 Mar 11, 2021

गौ संरक्षण की राजनीति भले ही भारतीय जनता पार्टी बढ़-चढ़कर करती हो, लेकिन गौशालाओं को बजट आवंटन में कांग्रेस सरकार भी पीछे नहीं है. वित्त विभाग ने खुलासा किया है कि राज्य में 2015 से जनवरी 2021 के बीच स्टांप ड्यूटी पर लगाए गए गौ रक्षा अधिभार से 1,242.56 करोड़ रुपये मिले थे. इसकी ऐवज में दोनों राज्य सरकारों ने पिछले पांच वर्षों में राज्य में गौशालाओं को 1,511.31 करोड़ रुपये दिए.

विधानसभा में पिछले शुक्रवार को गौ सेस की धनराशि खर्च नहीं कर पाने के मामले में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल प्रतिपक्ष के आरोपों का जवाब ही नहीं दे पाए. मावली विधायक धर्म नारायण जोशी ने पूछा कि गौ संरक्षण के लिए किस मद में कितनी राशि मिली और अब तक कितनी, कहां खर्च हुई है? धारीवाल जवाब देने के बजाए पिछली सरकार में गौ संरक्षण का हिसाब गिनाने लगे. नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने पूछा कि जून 2019 के बाद कितना बजट दिया? खर्च का ब्योरा देने के बजाए उन्होंने बताया कि गौ संरक्षण अधिभार में स्टांप व शराब पर सेस से 2259 करोड़ रुपए मिले हैं. इस पर स्पीकर को टोकना पड़ा कि विपक्ष प्रश्न पूछ रहा ​है कि जून-19 के बाद गौशालाओं को पैसा दिया गया या नहीं ? इस पर धारीवाल को कहना पड़ा कि इसका रिकार्ड मेरे पास नहीं है। बाद में भिजवा देंगे.

भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस भले ही इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से आंखें नहीं मिला पा रहे हों, लेकिन राजस्थान के आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार ने गायों के आश्रय स्थलों पर गौ रक्षा अधिभार से वसूले गए धन से करीब 250 करोड़ अधिक खर्च किए. पिछले पांच वर्षों में, राजस्थान में गाय आश्रयों को राज्य सरकार से 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता मिली है. विशेष रूप से, राजस्थान सरकार ने राज्य में स्टाम्प शुल्क और शराब की बिक्री से गौ संरक्षण अधिभार एकत्र किया.

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