बाड़मेर : करनी पड़ती है पहाड़ी पर चढ़ाई, तब हो पाती है ऑनलाइन पढ़ाई

जागरूक टाइम्स 511 Jul 26, 2020

-नेटवर्क की समस्या मासूम हरीश कुमार के लिए बनी जी का जंजाल

बाड़मेर । देश भर में कोविड-19 की महामारी के चलते विद्यालयों में ताले लटके हुए हैं और कई विद्यालय ऑनलाइन पढ़ाई के जरिये बच्चों को उनकी कक्षाओं से जोड़ रहे हैं। यही ऑनलाइन एजुकेशन सरहदी बाड़मेर जिला मुख्यालय के निकटवर्ती दरुड़ा के भीलों की बस्ती निवासी एक मासूम हरीश कुमार के लिए जी का जंजाल बन गई है। इस गांव मे मोबाइल फोन का नेटवर्क नहीं आता और जवाहर नवोदय विद्यालय का विद्यार्थी होने के चलते क्लॉस में हाजिर होना भी जरूरी होता है। ऐसे में घर के पास स्थित पहाड़ी की चोटी के ऊपर टेबल कुर्सी लेकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। हरीश के मुताबिक ऑनलाइन क्लास में बैठना अनिवार्य है। ऐसे में सुबह-सुबह होने वाली हाजरी से पहले पहाड़ चढ़ना जरूरी हो जाता है और बाकी की पढ़ाई पहाड़ पर ही होती है। हरीश के पिता वीरमदेव बताते है कि गत डेढ़ महीने से सुबह 8 बजे हरीश पहाड़ पर चढ़ता है और क्लास खत्म होने के बाद 2 बजे के करीब वापस पहाड़ से उतरता है। धूप-छांव में हरीश वहीं पढ़ता है और मोबाइल नेटवर्क का ना होना उसके लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। हरीश के पिता के मुताबित उसने अलग-अलग मोबाइल


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