महाराष्ट्र में भाजपा के पर्याय बने देवेंद्र फडणवीस

जागरूक टाइम्स 488 Sep 28, 2020

मुंबई। देवेंद्र फडणवीस दिन ब दिन ताकतवर होते जा रहे हैं। सत्ता में थे, तो ताकतवर थे ही। लेकिन विपक्ष में होने के बावजूद लगातार ताकतवर होते जाना अपने आप में बहुत चौंकाने वाला तथ्य है। फिर, छवि के मामले में तो वे पहले से ही मजबूत थे। लेकिन राजनीतिक सूझबूझ और प्रशासनिक पकड़ के मामलों में भी उनकी मजबूती उनके पांच साल के मुख्यमंत्री काल में शानदार तरीके से साबित करने में वे कामयाब रहे। इन दिनों वे महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं और तीन दलों की खिचड़ी सरकार पर अपनी लगाम को कसने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।

प्रदेश में प्रमोद महाजन के स्वर्गवास के बाद एक सशक्त, सफल और सबल नेतृत्व का जो खालीपन आ गया था, फडणवीस ने उसे पूरी सरह से भर दिया है। एक राजनेता के रूप में फडणवीस महाराष्ट्र के अब तक के सबसे सूझबूझ वाले तेजतर्रार नेताओं में गिने जाते हैं।
भाजपा की अंदरूनी राजनीति और खासकर महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस इसी वजह से राजनीतिक रूप से भी बहुत ताकतवर नेता के रूप में स्वीकारे जाने लगे हैं। विपक्ष के नेता के रूप में महाराष्ट्र सरकार पर उनके प्रखर प्रहार और जनता के बीच लगातार सतत सक्रिय रहकर उन्होंने अपनी सफलता साबित करने के साथ ही अपने राजनीतिक कद को और ऊंचा किया है।

> लगातार ताकतवर होते जा रहे फडणवीस
इन दिनों वे महाराष्ट्र के एक छत्र नेता हैं और बिहार विधानसभा के चुनाव का सफल संचालन भी कर रहे हैं और उनके प्रभावशाली चुनाव संचालन को देखकर निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि बिहार में एनडीए की सरकार फिर बनेगी और बीजेपी को पहले से ज्यादा बहुमत हासिल होगा। इसीलिए अब उनकी बढ़ती ताकत का असर भाजपा की ताजातरीन टीम में भी साफ झलक रहा है। पार्टी आलाकमान ने अपने इरादे साफ जाहिर कर दिए हैं कि अब फडणवीस पूरी तरह महाराष्ट्र में अपना ध्यान केन्द्रित रखेंगे और एक बार फिर भाजपा को प्रदेश में पहले से ज्यादा ताकतवर बनाकर सत्ता में पार्टी की वापसी करवाएंगे।

महाराष्ट्र में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस एक बहुत ही ईमानदार और बहुत सधे हुए राजनेता माने जाते हैं। अपने हर कार्य को अलग तरीके से अंजाम देने वाले देवेंद्र फडणवीस का नागपुर के महापौर से लेकर महाराष्ट्र भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद पर होते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचना राजनीतिक विश्लेषकों के लिए शोध का विषय रहा है। वैसे, फडणवीस महाराष्ट्र के उस विदर्भ इलाके से हैं, जहां एक जमाने में कांग्रेस की भी खूब चलती थी, लेकिन जैसे-जैसे फडणवीस का राजनीतिक उदय होता गया, कांग्रेस अस्ताचल की ओर बढ़ती गई। और अब तो खैर, भाजपा ने भी विदर्भ में अपना बहुत अच्छा खासा वोट बैंक विकसित कर लिया है और कांग्रेस को वोट के भी लाले पड़ रहे हैं। और मुख्यमंत्री के रूप में तो फडणवीस ने प्रदेश भर के हर तालुका स्तर पर भी मजबूत, कर्मठ और समर्पित कार्यकर्ताओं की इतनी जबरदस्त पौध तैयार की कि अब समूचे प्रदेश में किसी भी पार्टी के पास वैसे कार्यकर्ता ही नहीं है। काम के प्रति अपनी गंभीरता, विषयों की गहरी समझ और किसी भी निर्णय के प्रति गहन चिंतन ने एक राजनेता के रूप में हर क्षेत्र में उनकी पकड़ को भी बहुत मजबूत साबित किया है।

माना जा सकता है कि नागपुर से लेकर मुंबई और अब देश भर में अपने राजनीतिक कार्यों की वजह से फडणवीस ने खुद को एक अजेय राजनेता के रूप में स्थापित किया है। वे बेदाग और निष्कलंक राजनीति के पक्षधर रहे हैं और दो बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद घमंड ने उन्हें छुआ तक नहीं है और भ्रष्ट लोगों और भ्रष्टाचार के प्रति बेहद सख्त होने के कारण ही देवेंद्र फडणवीस पर किसी भी मामले में उन पर अंगली उठाने का अब तक तो किसी को भी कोई मौका तक नहीं मिला और आगे भी नहीं मिलेगा, यह लिखकर रख लीजिए।

31 अक्टूबर 2014 को महाराष्ट्र में अपने दम पर भाजपा की पहली सरकार बनाने की सफलता का सेहरा भी फडणवीस के माथे पर ही सजा हुआ है। उससे पहले पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में देवेंद्र फडणवीस ने जो अभूतपूर्व मेहनत की थी, उसी का परिणाम था कि विधानसभा चुनावों में अकेले चुनाव लड़कर भी भाजपा प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। उसके बाद मुख्यमंत्री के रूप में पांच साल के अब तक के अपने शासनकाल में समूचे महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी को अपने पांव जमाने और ग्राम स्तर पर संगठन को मजबूत बनाने में भी फडणवीस ने हर मोर्चे पर जबरदस्त मेहनत की। प्रदेश का राजनीतिक इतिहास गवाह है कि उनके मुख्यमंत्री काल में नगर परिषदों, नगरपालिकाओं, नगर पंचायतों और ग्राम पंचायतों के चुनावों में किसी भी अन्य पार्टी के मुकाबले भाजपा बहुत ज्यादा मजबूत होकर उभरी और महाराष्ट्र के स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों में भाजपा के चुने हुए प्रतिनिधियों की संख्या में भी जबरदस्त इजाफा हुआ। इसीलिए महाराष्ट्र की राजनीति के जानकार मानते हैं कि प्रदेश में भाजपा का आज जो बेहद मजबूत स्वरूप है, उसके पीछे फडणवीस की मेहनत, समर्पण और लगन के साथ लोगों से जुड़ाव ही सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने सत्ता एवं संगठन में बेहतरीन तालमेल बनाते हुए ग्राम स्तर तक अपने कार्यकर्ताओं के जरिए बहुत गहरी पकड़ बना ली, जिसे फडणवीस की रणनीतिक तैयारी की सफल तकनीक माना जा सकता है।

वैसे, थोड़ा इतिहास में झांकें तो छत्रपति शिवाजी महाराज अपने जमाने में मुगलों को खदेडऩे के लिए लड़ाई के मैदान में उतरे थे। लेकिन उन्हें यह समझ में आ था गया कि सिर्फ लड़ाई लड़कर बहुत ताकतवर मुगलों को हराना आसान नहीं है और लड़ाई में अपने जन और धन दोनों का नुकसान हो सकता है। इसीलिए उन्होंने समस्त हिंदू समाज को एकता के सूत्र में पिरोते हुए स्वयं को मजबूत बनाने के साथ मुगलों से मुकाबले को जारी रखा। वे जानते थे कि समाज जब पूरी एकता के साथ मजबूत होता है, तो दुश्मन से लडऩे की ताकत भी कई गुना बढ़ जाती है और अपनी मजबूती भी स्पष्ट तौर पर दिखती है। पांच साल तक, जब तक फडणवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे, शिवाजी महाराज के नक्शे कदम पर ही चलते रहे। उन्होंने शिवाजी महाराज की राजनीतिक तर्ज पर सबसे पहले कार्यकर्ता को मजबूती दी, फिर सरकार को सक्षम बनाया और बाद में पूरे प्रदेश में अपनी पकड़ साबित करने में जुट गए।

वैश्विक स्तर पर छाई महामारी कोरोना संकट काल में भी फडणवीस ने अपने कार्यकर्ता को जन सेवा में लगातार समर्पित रखकर और खुद भी नगर-नगर, डगर-डगर व गांव-गांव घूमकर जनता से जुड़ाव को मजबूत करते हुए फडणवीस महाराष्ट्र में न केवल निर्विवाद रूप से सबसे मजबूत पकड़ वाले नेता साबित हुए हैं, बल्कि प्रदेश की बाकी पार्टियों के राजनेताओं के मुकाबले उनका कद भी काफी ऊंचा हो गया है। उधर, राष्ट्रीय स्तर पर देखें, तो भाजपा के अन्य अनुभवी मुख्यमंत्रियों व पूर्व मुख्यमंत्रियों के बीच भी फडणवीस को कई मामलों में सफलता के लिए विशिष्ट नजरिए से देखा जा सकता है। साथ ही फडणवीस देश के अन्य प्रदेशों में अन्य पार्टियों के मुख्यमंत्रियों, पूर्व मुख्यमंत्रियों के मुकाबले भी मजबूत राजनीतिक पकड़ और रणनीतिक सफलता वाले राजनेता के रूप में स्थापित हुए हैं। मानना पड़ेगा कि भारतीय राजनीति में फडणवीस नई ऊंचाइयां छू रहे हैं। लिहाजा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनकी प्रदेश में दिनोंदिन मजबूत होती पकड़ को समझते हुए समूचे प्रदेश का उन्हें एक छत्र और सर्वमान्य नेता मान लिया है। ऐसे में फडणवीस केन्द्रीय नेतृत्व की नजर में प्रदेश में सर्वाधिक संभावनाशील राजनेताओं में अग्रणी कतार के नेता हैं। तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही तो फडणवीस के मजबूत कंधों पर महाराष्ट्र सरीखे प्रांत की जिम्मेवारी डाली गई है। मौजूदा परिस्थितियों में फडणवीस ही प्रदेश में पार्टी की सबसे पहली पसंद बनकर उभरे हैं।

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