मासूम बच्ची से रेप की कोशिश करने वाले आरोपी को मिली सात साल की सजा

जागरूक टाइम्स 216 Jan 13, 2021

- सजा से बचने के लिए पेश किया था फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र !

मुंबई, (ईएमएस)। मुंबई सेशन कोर्ट ने एक तीन साल की मासूम बच्ची से रेप की कोशिश करने वाले एक व्यक्ति को दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. कार्यवाही के दौरान आरोपी ने फर्जी डेथ सर्टिफिकेट लगाकर खुद को मृत साबित करने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने खोज निकाला. घटना वर्ष 2015 की है जब वर्ली पोइस थाना क्षेत्र में विद्यामणि विश्वकर्मा (28) नाम के युवक ने अपने पड़ोस में रहने वाली एक बच्ची से रेप करने की कोशिश की थी. लेकिन बच्ची की रोने की आवाज सुनकर उसकी मां पहुंच गई थी और बच्ची को बचा लिया. कार्यवाही के दौरान बच्ची ने अदालत में अपराधी को पहचान लिया था. उसने जज को बताया, "मैं अपनी मां, पापा और बड़ी बहन के साथ रहती हूं. मैं स्कूल जाती थी. स्कूल से लौटने के बाद अपने दोस्तों के साथ खेलती थी. मेरे घर के पास और भी घर हैं. अंकल ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर तेल लगाया और मेरे करीब आकर बैठ गए तो मैं चिल्लाने लगी." अदालत के समक्ष अपने बयान में बच्ची की मां ने कहा था कि जब उसने अपनी बेटी को विश्वकर्मा के घर में चिल्लाते हुए देखा त​​ब वह टॉवेल में था. वह बच्ची को अपने साथ ले गई और उसने महसूस किया कि बच्ची का अंडरगारमेंट गीला है. उसने तुरंत अपनी बेटी से पूछा कि ​क्या हुआ है तो बच्ची ने किसी तरह सारी बातें बताईं. विश्वकर्मा को तुरंत गिरफ्तार करके उसका ​डीएनए टेस्ट भी कराया गया था.

- जमानत मिलने के बाद हुआ फरार, पेश करवाया फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र
मुकदमे के ट्रायल के दौरान विश्वकर्मा को जमानत मिल गई और वह फरार हो गया. इसके बाद उसके वकील ने विश्वकर्मा का मृत्यु प्रमाणपत्र दायर किया. सरकारी वकील गीता शर्मा ने कहा, "आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था, लेकिन उसके वकील ने उसका मृत्यु प्रमाणपत्र दायर किया और मुकदमे को खत्म करने की मांग की. जब उन्होंने पुलिस से मृत्यु प्रमाणपत्र को वेरीफाई करने को कहा तो वर्ली पुलिस ने आरोपी को उत्तर प्रदेश में उसके स्थायी निवास से गिरफ्तार ​किया." वर्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल नीलेश तालेकर ने इस छोटी बच्ची को न्याय दिलाने के लिए अपनी पूरी ताकत से प्रयास किए. आरोपी को फिर से अदालत में लाने के बाद उसके खिलाफ फिर से मुकदमा चलाया गया. कोर्ट में आखिरी दलीलों के दौरान वकील गीता शर्मा ने डीएनए रिपोर्ट को आधार बनाया जो आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत था. दलीलें सुनने के बाद अदालत ने विश्वकर्मा को 7 साल की सजा सुनाई है और 10 हजार रूपये का जुर्माना भी लगाया है.



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