
ऐक्टर: धनुष (Dhanush) कृति सेनन (Kriti Sanon), मोहम्मद ज़ीशान अयूब, प्रकाश
राजश्रेणी: रोमांस / इमोशनल ड्रामा
डायरेक्टर: आनंद एल. राय
अवधि: 2 घंटे 47 मिनट
रेटिंग: ⭐⭐⭐
कहानी
रांझणा फेम निर्देशक आनंद एल. राय वापस लौटे हैं एक दिल-छू लेने वाली, इमोशनल और इंटेंस लव स्टोरी तेरे इश्क़ में (Tere Ishk Mein) के साथ। कहानी है शंकर (धनुष) की—जो दिल्ली की झुग्गियों में पला-बढ़ा, गुस्सैल, जिद्दी और दिल से फैसले लेने वाला लड़का है। उसकी जिंदगी बदल जाती है जब उसे प्यार हो जाता है मुक्ति (कृति सेनन) से, जो साउथ दिल्ली की अमीर, पढ़ी-लिखी और समझदार साइकोलॉजी स्टूडेंट है।मुक्ति अपनी पीएचडी के लिए गुस्से पर रिसर्च करती है और शंकर उसका केस स्टडी बन जाता है। रिसर्च से शुरू हुआ रिश्ता कब एक खतरनाक जुनून में बदल जाता है, दोनों को महसूस ही नहीं होता। मगर दुनियाएँ अलग, सोच अलग—और प्यार उनका सबसे बड़ा इम्तिहान बन जाता है।कहानी दो टाइमलाइन में चलती है—आज शंकर इंडियन एयर फ़ोर्स का स्टार पायलट है, मगर गंभीर बिहेवियरल प्रॉब्लम्स से लड़ रहा है, और मुक्ति एक मनोवैज्ञानिक बनकर उसे काउंसल करने वॉर ज़ोन पहुँचती है। जैसे-जैसे पुरानी कहानियाँ खुलती हैं, फिल्म प्यार, दर्द, क्लास-डिफरेंस और खुद को खो देने वाले जुनून का सफ़र दिखाती है। हालाँकि कहानी कई जगह काफी प्रेडिक्टेबल लगती है और सेकंड हाफ धीमा पड़ जाता है, जिससे असर थोड़ा कम हो जाता है।
परफॉर्मेंस
धनुष ने इस फिल्म में सचमुच आग लगा दी है! सिर्फ़ आँखों से भावों की पूरी दुनिया बयान कर देना—यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। दर्द, प्यार, गुस्से और टूटी हुई रूह—सब कुछ स्क्रीन से बाहर छलकता है।कृति सेनन ने भी मुक्ति के किरदार को बेहद ताकत और संवेदनशीलता के साथ निभाया है—उनकी इमोशनल एक्टिंग दिल छू जाती है।प्रकाश राज—शंकर के पिता—ने फिल्म में जान डाल दी। पिता-पुत्र के रिश्ते की कशमकश सबसे ज़्यादा असर छोड़ती है।
केमिस्ट्री
धनुष और कृति की केमिस्ट्री फिल्म का दिल है!खामोशी, नज़रें, अनकहे पल—सब कुछ इतना इंटेंस कि स्क्रीन पर आग लगती महसूस होती है।ड्रामा हो या टूटता हुआ प्यार—दर्शक हर भाव को महसूस करते हैं। यही कनेक्शन फिल्म को बाँधे रखता है।
संगीत
ए. आर. रहमान का जादू यहाँ भी बरकरार है। साउंडट्रैक कहानी की हर ऊँच-नीच को खूबसूरती से उठाता है और बैकग्राउंड स्कोर भावनाओं को कई गुना बढ़ा देता है।
वर्डिक्ट
तेरे इश्क़ में एक ऐसी फिल्म है जो दिल को छूती भी है और तोड़ती भी है। धनुष और कृति की दमदार परफॉर्मेंस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है, और उनकी इमोशनल केमिस्ट्री आपको पूरे समय बांधे रखती है।पहला हाफ शानदार है—तेज़, इंटेंस और फुल इमोशन, लेकिन दूसरे हाफ में कहानी थोड़ी कमजोर पड़ जाती है, और कुछ ट्विस्ट प्रेडिक्टेबल लगते हैं। फिर भी फिल्म अपनी परफॉर्मेंस, म्यूजिक और इमोशनल हाई पॉइंट्स की वजह से असर छोड़ जाती है।
