नरकीय जीवन जीने को मजबूर सात परिवार

IANS | Jul 9, 2018

धोरीमन्ना - रहने को घर नही, सोने को बिस्तर नहीं, अपना खुदा है रखवाला.....फिल्मी गीत की ये पंक्तिया गांव में सात घूमंतू परिवारों पर सटीक बैठती है। जब धरती से लोग हवा मे उड़ने लगे है, वैज्ञानिक अंतरिक्ष मे परचम लहराने लगे है, जीवन रक्षक दवाओं से वीआईपी लोगों की जान बचाई जाने लगी है

तब उसी देश में बहुसंख्यक परिवार झुग्गी झोपड़ी में रोजी-रोटी के लिए नरकीय जीवन जीने को मजबूर है। ऐसे ही सात परिवार उपखंड मे मीठड़ा खुर्द गांव मे घूमंतू परिवार का हाल है। ये सात परिवार गांव के समीप अपने कच्चे आशियाने बनाकर पिछले सात साल से नरकीय जीवन जीने को विवश है।