बाड़मेर की मैडम को लगा आनंदपाल का 'जिन्न'

जागरूक टाइम्स 2841 Jun 27, 2018

दुर्गसिंह राजपुरोहित

बाड़मेर @ जागरूक टाइम्स
आनंदपाल तुम अभी आदरणीय हो, चाहे बीजेपी सरकार ने गुंडा-गैंग्स्टर लिख कर मार दिया हो।
आईने के अक्स में देखकर 'ऐतिहासिक' निशाना लगाया और पुलिस के कारतूस ने कारनामा ऐसा किया कि एफबीआई और दूसरे फैमस स्क्वाड शरमा कर नौकरी से छोड़ दें। पुलिस के इस अखिल भारतीय 'कारनामे' को बंदूक बनाने वाले की सात पीढियां याद रखेंगी। कोई ऐसा मुल्क नहीं जिसकी पुलिस राजस्थान पुलिस के इस कारनामे को 'करेक्ट' नहीं कहें। कहें भी क्यूँ नहीं 'चुनावी साल से ठीक पहले' ऐसे नाम को मिटाना जो सरकार के लिए दिक्कत-फजीहत का केंद्र बना हुआ था।

वैसे भी कई सालों के बाद ऐसा व्यक्ति चर्चा का केंद्र हैं जो खुद चर्चा के बाद समाप्त हो गया, लेकिन उसको सम्मान देना नेताओं की मजबूरी बन गई हैं। ये अलग बात हैं कि आनंदपाल की तारीफें कइयों को यू-टर्न के लिए भी मजबूर कर डाले। आनंदपाल की याद में मनाये गये कार्यक्रम में बाड़मेर के तीन नेताओं का जाना सुर्खिओं की वजह हैं, लेकिन दो नेताओं से ज्यादा बीजेपी की नेता का जाना 'चर्चेंद्र' टाइप के लोगों को कई दिनों का चर्चा मसाला दे गया हैं।

मैडम गई तो थी वोट के लिए जाति को पटाने लेकिन पलट कर घर तक पहुंचती उससे पहले ही लोगों के गुस्से के बाण कमान से छूटकर उनके राजनीतिक कॅरियर को बींधने शुरू हो गये। जाट और आनंदपाल का रिश्ता पटरी हमेशा दूर ही रही। और मैडम उसी को अंजुली भर के पुष्प चढ़ा दे तो उबलना लाज़मी भी लगता हैं। राजनीतिक समझ रखने वाले लोग मानते हैं कि यह सब मेवाराम के 'पॉइंट ऑफ़ व्यू' से बढिय़ा 'परबारी-फतेह' हो रही हैं। खैर, अभी तो चुनावों में काफी वक्त नहीं बचा हैं। इसलिए ऐसे चर्चेंन्द्र स्वाद के किस्से खूब सामने आयेंगे।

आनंदपाल हो या कोई भी ऐसा दूसरा व्यक्ति जो 'जाति द्वारा पूज्य' व्यक्ति हो
सबकी अपनी अपनी जरूरत के अनुसार उस व्यक्ति के प्रति श्रद्धा होती हैं। कोई इज़्ज़त दें तो ठीक, न दे तो भी ठीक। मगर, मुद्दा यह हैं कि श्रद्धांजलि देकर फिर उसे कोसना , जाति के उन लोगों पर आरोप लगाना कि अंधेरे में रखकर यह सब कराया गया फिर झूठ का एक और उदाहरण वीडियो वायरल हो जिसमें 'सम्मानीय आंनदपाल' का जिक्र होना।

जनता को सफ़ा-चट बेवक़ूफ़ समझ रखा हैं इन नेताओं ने

जो पार्टी आनंदपाल के मामले में जीने से पहले और मरने के बाद तक और भी हर छोटे बड़े मामले में बीजेपी सरकार को कोसती थी उसी के विधायक माननीय मेवाराम जैन भी वहां ख़ूब सारी श्रद्धांजलि देकर आये। जोधपुर बाड़मेर में समेत कई इलाके में हैं जहां कथित समाज के हीरो की याद हॉस्टल में बसती है।

फिर यह कोई बड़ी बात भी नहीं थी, क्यूंकि राजनीति में ऐसा वैसा कुछ नहीं होता। जो जैसे वोट का मालिक वैसे ही ढल जाए, लेकिन जिसकी सरकार ने आनंदपाल को आईने के अक्स में देखकर मारा हो, बीजेपी ने स्वर्णिम अक्षरों में इस एनकाउंटर को गिना हो। पुलिस ने अपनी पीठ थपथपाई हो उस पार्टी की नेता आनंदपाल को इज्जत कैसे दे सकती हैं और आनंदपाल मामले में जब दिक्कत आकर सोशियल मीडिया और कानों तक आन पड़ी तो हाथों हाथ उसे गुंडा/गैंगस्टर कैसे ठहरा दिया गया? जल्दबाज़ी में खुद को सर्टिफिकेट जारी करने के चक्कर में राजनीति ने नौसिखियापन की उदाहरण दे चुकी नेत्री जी को यह पता नहीं पड़ा कि जो खुद को इससे बचाने के बयान सेल्फी स्टाइल में रिकोर्ड होकर फेसबुकिया रथ पर चढाया जा रहा हैं उसका जवाब दूसरे वीडियो में लोग संजोये हुए है।

हाए ये मज़बूरी

खुद को खुद ही सर्टिफिकेट देने चले और स्टाम्प की स्याही सर्टिफिकेट पर फैल गई। किस करमजले ने वो 'सम्मानित आनंदपाल' का वीडियो रिकॉर्ड कर दिया। जिसने ना तो लड्डू इस हाथ में रहने दिया और ना ही दूसरे हाथ। जाट नाराज हो गये आनन्दपाल को इज्जत देने के कारण और रावणा राजपूत समाज नाराज हो गया सम्मान देकर वापस आनंदपाल को गैंग्स्टर का कहने से और आमन्त्रण को साजिश बताने से।

मगर, कुछ के लिए तो स्पेशल अरेंजमेन्ट थे। ऑडियो-वीडियो प्रतिबंध, लाइव तो खुद के मोबाइल से भी नहीं। चर्चेंदर टाइप के लोगों की मानें तो यहां पहुंचे युवा नेता ने हालिया दिनों में कार्रवाई को आनंदपाल बनाने की सरकारी योजना बताई। कहा लोग आनंदपाल बनने के कारण तलाशें तो ऐसी ही तानाशाह कार्रवाई कारण के रूप में सामने आती हैं।

जल्दबाज़ी से जंग खाते है अक्ल के पुर्ज़े!

जब इधर मैडम के फोटो नतमस्तक होकर पुष्प चढ़ाते फोटोज जब वायरल हुए तो मैडम के खिलाफ जाट समाज के कमेंट्स के तीर आने शुरू हो गये। हाल यह हो गये कि स्वसमाज के गुस्से की शिकार हो रही मैडम को अपना पक्ष जाहिर करना पड़ा। कहना पड़ा कि 'रक्तदान शिविर के बहाने बुलाया और उन्हें इस मामले में फंसा दिया।

वो किसान बेटी हैं और किसानों के लिए लड़ती रहेगी। साथ ही रावणा राजपूत समाज को नसीहत दे दी कि वो ऐसे गैंगस्टर के नाम से दूरी रखें। लेकिन, यह सब राजनीतिक फर्जीवाड़ा था। जैसे ही मैडम ने विडियो रिलीज कर राहत की सांस ली तो किसी चर्चेन्द्र ने उनका रक्तदान शिविर का भाषण विडियो पोस्ट करके मैडम की टेंशन में तानसेन वाले पहुंचे हुए सुर डाल दिए। ज्यूं ज्यूं विडियो लोग देख रहे हैं मैडम को कह रहे हैं कि झूठे लिरिक्स थे इसलिए विडियो फिल्म पिट गई।

अब वापस जल्दबाजी में विडियो रिकॉर्ड नहीं होंगे यह उम्मीद बीजेपी भी कर सकती हैं। बीते दिनों एक लवजिहाद मामले में पार्षद ने भी निजी जासूस एजेंसियों को कुपवाड़ा भेजने के हास्यास्पद मैसेज रिलीज करवाने में अपनी भद्द पिटवाने में कोई कमी नही रखी। अब मैडम का झूठ पकड़ा जाना और दिक्कते बीजेपी के अंदरखाने बढ़ाएगा। वैसे, बड़ी मुश्किल से बीजेपी आनंदपाल मामले के बाद से राजपूतों-रावणा राजपूतों को नजदीक लाने में लगी हुई हैं। जो इस घटना से विफल प्रयास बन सकते हैं।

पुरानी बात थी यह ...

बीते साल 24 जून को रात के अंधेरे में एसओजी और पुलिस के संयुक्त एनकाउंटर में ढेर हुए इनामी बदमाश, जो कि कई हत्याओं, फिरौती वसूलने, ब्लैकमेल करने ओर अपहरण का आरोपी था, उस गैंगस्टर आनंदपाल की बीजेपी के ही नेता पुण्यतिथि मनाने में व्यस्त हैं।

पूर्व मंत्री की पोती हैं चौधरी

बाड़मेर में बदमाश आनंदपाल की फोटो पर फूल चढ़ातीं प्रियंका चौधरी को लेकर समाज में कड़ा रोष है। उनकी फोटो को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के मैसेज वायरल हो रहे हैं। वहीं पार्टी में भी उनके खिलाफ विरोध के सुर मुखर हो गए हैं। प्रियंका चौधरी भाजपा सरकार में पूर्व राजस्व मंत्री गंगाराम चौधरी की पोती हैं। वो वर्तमान में बाड़मेर से यूआईटी चेयरमैन हैं और पिछली बार 2013 में बीजेपी के टिकट पर बाड़मेर सीट से चुनाव भी हार चुकी हैं। इसी सीट से वह फिर टिकट के लिए दावा ठोंक रही हैं।

कांग्रेस के नेता भी हुए शामिल

आनंदपाल एनकांउटर को एक साल पूरा हो गया है। इस सिलसिले में रावणा राजपूत समाज के द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में न केवल बीजेपी, बल्कि कांग्रेस के नेता भी शामिल हो रहे हैं। बाड़मेर में कांग्रेस के विधायक मेवाराम जैन, कांग्रेस के युवा नेता आजाद सिंह राठौड़ ने भी उसकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की है।

सारे नेता और लगभग एक ही जवाब

जागरूक टाइम्स ने इस सम्बन्ध में सबसे पहले जिलाध्यक्ष डॉ जालमसिंह रावलोत से दूरभाष पर बात की तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। जिला महामंत्री बालाराम मूढ़ से पूछा तो बोले मैडम वाला मामला प्रदेश स्तर का हैं हमे पता नही। इस मामले में प्रदेश महामंत्री भजनलाल शर्मा से भी पूछा कि साहब आपकी सरकार ही एनकाउंटर करती हैं और श्रद्धांजलि भी आपकी पार्टी के नेता दे रहे हैं तो बोले कि 'भरतपुर हूं अभी, गमी में आया हूं और मामला भी पता नहीं है।

इस मामले को लेकर निवर्तमान प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी से भी पूछा तो बोले कि मैं अब क्या बोलूं? संगठन महामंत्री से पूछिए। कुल मिलाकर इस मामले पर कोई नहीं बोलना चाहता। यह अज्ञात भय क्यों हैं यह भी बड़ा सवाल हैं। वहीं जब जोधपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष, राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त बाड़मेर के संगठन प्रभारी महेंद्र सिंह राठौड़ से इस सम्बन्ध में पूछा तो उन्होंने भी इस मामले में अनभिज्ञ बताया और कहा कि मैं मुख्यमंत्री दौरे में व्यस्त था इसलिए ध्यान नहीं दे पाया।

कुछ ट्विटर पोस्ट


https://twitter.com/Chaudhhree/status/1011638368407412736

https://twitter.com/Gajendrasiyol/status/1011894557707984896

https://twitter.com/1stIndiaNews/status/1011261525242400768

https://twitter.com/outlookhindi/status/1011149451090710528

https://twitter.com/5586b70ac2fe41b/status/1011084313524391937

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