आखिर किस करवट बैठेगा... पाकिस्तान का चुनावी घमासान

जागरूक टाइम्स 149 Jul 25, 2018

25 जुलाई 2018 को पाकिस्तान में नेशनल असेंबली के चुनाव हैं। यूं तो पाकिस्तान में चुनी हुई सरकार होती है तो भी वह कितनी ताकतवर होती है, यह बताने की जरूरत नहीं है। फिर भी चुनी हुई सरकार एक बड़ा लोकतांत्रिक संकेत होती है। पाकिस्तान को इस लोकतांत्रिक संकेत की सख्त जरूरत है क्योंकि इतिहास में कई बार इसकी गैर मौजूदगी का हश्र पूरी दुनिया देख चुकी है। यही वजह है कि आज की तारीख में तमाम आशंकाओं के बावजूद पाकिस्तान की जम्हूरियत पसंद आबादी चुनी हुई सरकार की उम्मीद करती है। इस चुनाव को पाकिस्तान वाले ‘पानीपत की लड़ाई’ बता रहे हैं।

25 जुलाई 2018 को यानी कल मतदान के बाद पता चलेगा कि पानीपत की यह जंग किसके लिए जीत और किसके लिए हार लेकर आती है? अभी तक की स्थिति में पाकिस्तान की चुनावी गहमागहमी पर नजर रखने वालों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि परिणाम क्या होगा? क्या चुनाव नतीजा हंग पार्लियामेंट की ओर जाएगा या फिर इमरान खान अथवा नवाज शरीफ की पार्टी बहुमत हासिल करेगी? इन्हीं सवालों के इर्द-गिर्द दुनियाभर के चुनावी पंडित पाकिस्तान की चुनावी गहमागहमी का विश्लेषण कर रहे हैं। चुनाव त्रिकोणात्मक नहीं हैं, यह बात चार प्रांतों की चरम पर पहुंचे प्रचार को देखकर साफ हो जाती है।

ये चार प्रांत हैं, पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा। दिल्ली की तरह, इस्लामाबाद कैपिटल टेरटरी (आईसीटी) के वास्ते तीन चुनावी क्षेत्र बने हैं, पंजाब के लिए सबसे अधिक 141, सिंध में 61, खैबर पख्तूनख्वा में 39, बलूचिस्तान में 16, फाटा में 12 सीटें नेशनल असेंबली के वास्ते हैं। संसद की 272 सीटों पर प्रत्यक्ष निर्वाचन होना है। 60 सीटें महिलाओं के लिए और 10 सीटें धार्मिक अल्पसंख्यकों के वास्ते आरक्षित हैं।

इन 70 सीटों पर नेता आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर चुने जाएंगे। अगर टक्कर के हिसाब से देखा जाए तो 342 सीटों वाली नेशनल असेंबली के वास्ते सबसे अधिक घमासान पंजाब में मचा हुआ है। पाकिस्तान की आबादी है, 21 करोड़ 27 लाख 42 हजार 631। यह आबादी 15 मार्च 2017 को हुई जनगणना पर आधारित है, जिसमें गिलगिट-बाल्टिस्तान और आजाद कश्मीर की जनता भी शामिल है। इस आबादी में 40 लाख 45 हजार 366 आजाद कश्मीर के और 9 लाख 22 हजार 745 गिलगिट-बाल्टिस्तान के लोग शामिल हैं।

पाकिस्तान का चुनाव आयोग तर्क देता है कि ये लोग विवादित इलाके से हैं, चुनांचे ये वोट नहीं दे सकते। 2004 से गिलगिट-बाल्टिस्तान और आजाद कश्मीर के लोग पाकिस्तान के संसदीय चुनाव में हिस्सा लेने की मांग करते रहे हैं। लेकिन हर बार उनकी मांग खारिज कर दी जाती है। इससे दुनियाभर में एक संदेश तो गया है कि पाकिस्तान ने इस हिस्से के लोगों को गुलाम बनाकर रखा है। वोट के अधिकार छीने जाने का यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग को क्यों नहीं दिखा, आश्चर्य होता है।

इमरान खान की ‘पीटीआई’ चार पार्टियों से सीटों के तालमेल कर रही है, जिस बिना पर उसे सिंध में 15 सीटों पर जीत की उम्मीद है। ये पार्टियां हैं, पीएमएल-क्यू, अवामी मुस्लिम लीग, मजलिस वहदातुल मुसलमीन और ग्रांड डेमोक्रेटिक अलायंस। ग्रांड डेमोक्रेटिक अलायंस की सिंध में पकड़ बताई जा रही है, जो पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के वोट काटने की फिराक में है। सिंध में ऐसा खेल हो गया, तो चुनाव त्रिकोणात्मक नहीं रह जाता है।

सिंध की राजधानी करांची पूरे प्रांत की राजनीति का एपीसेंटर बन चुका है। सिर्फ करांची से संसद (नेशनल असेंबली) की 13 सीटें होना इसकी बड़ी वजह है। करीब डेढ़ करोड़ की आबादी वाले करांची में शिया और सुन्नी खासी संख्या में हैं। पख्तून हैं, तो बलूच भी। इस्माइली हैं, तो उनके अनुपात में दाउदी बोहरा भी दरपेश हैं। पारसी, गोअन क्रिश्चियन, हिंदू समुदायों के लोग कराची की बहुसांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं और वहां की आर्थिक तरक्की में सहयोग करते रहे हैं।

ऐसे बहुसांस्कृतिक समुदाय के बीच आज की तारीख में बेनजीर भुट्टो की शहादत से भावुक होकर पीपीपी को लोग एकतरफा वोट कर देंगे, वो दिन लद गए लगता है। लरकाना और सुक्कुर में भी पीपीपी का गढ़ कमजोर पड़ रहा है। पीपीपी अपनी मांद में मजबूत नहीं है तो लड़ाई को त्रिकोणामक कैसे कहेंगे? सबसे अधिक बौखलाहट आईएसआई, अदालत और सेना में इस समय है।

इनके द्वारा चुनाव में हस्तक्षेप, मिल्ली मुस्लिम लीग, तहरीके लाबाइक पाकिस्तान, अहले सुन्नत वल जमात, मुत्तहिदा मजलिसे अमाल जैसे अतिवादी संगठनों को चुनाव में शिरकत को शह देने की खबरें मीडिया में खूब चल रही थीं। अब इस्लामाबाद हाईकोर्ट के जज शौकत अजीज ने जब यह कहा कि आईएसआई ऐसे फैसलों को प्रभावित कर रही है। यहां तक कि चीफ जस्टिस और दूसरे जज उस तरह के निर्णय दे रहे हैं, जिससे नवाज शरीफ की पार्टी को नुकसान हो। रविवार को दिए इस बयान से हडक़ंप मच चुका है।

 सेना ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि जज शौकत अजीज के खिलाफ तुरंत एक्शन लें। जज शौकत अजीज की बातों में दम है। क्योंकि पीएमएल ‘नवाज’ के कुछ मजबूत खंभे ऐन चुनाव के समय गंभीर आरोपों में जेल की हवा खा रहे हैं। रावलपिंडी के चुनाव क्षेत्र ‘एनए-60’ से पीएमएल-एन के सीनेटर मुख्तार अब्बासी खड़े थे। नारकोटिक्स के एक पुराने मामले में कोर्ट ने उन्हें फटाफट सजा दी और आदियाला जेल भेज दिए गए।

अब यहां चुनाव स्थगित कर दिया गया है। आदियाला जेल तो लगता है, जैसे ‘पीएमएल-एन’ का चुनाव मुख्यालय हो गया है। यहां नवाज शरीफ, उनकी बेटी मरियम और दामाद कैप्टन सफदर कैद हैं, चौथा मुख्तार अब्बासी पहुंच गए। उनसे पहले नारोवाल से पीएमएल-एन प्रत्याशी दानियाल अजीज आदियाला जेल में हैं। मतदान के 48 घंटे पहले जेल में नवाज शरीफ की तबीयत अचानक से बिगड़ जाने की खबर है।

उनके हार्ट और किडनी की जांच के बाद डाक्टरों की टीम ने फौरन अस्पताल में शिफ्ट किए जाने को कहा है। कहना कठिन है कि नवाज शरीफ की हालत सचमुच नाजुक है या चुनाव की तस्वीर बदलने के वास्ते वो कैद से बाहर अस्पताल शिफ्ट हो रहे हैं। चुनाव का जैसे-जैसे काउंट डाउन हो रहा है, सर्वे एजेंसियां कयासक्यारी में लग गई हैं। जो वोट नवाज शरीफ की पार्टी के कटेंगे, वो इमरान खान के हिस्से आएंगे।

पंजाब में जिस तरह अतिवादी आका सक्रिय हैं, उनके इक्का-दुक्का प्रत्याशी जीतते भी हैं, तो भी वोट पीएमएल नवाज का ही कटना है। दिलचस्प भविष्यवाणी रॉ के पूर्व प्रमुख एएस दुल्लत की है। लंदन में बुक लांचिंग के वास्ते गये थे। किसी पत्रकार से कह चुके हैं, इमरान खान सरकार बनाने जा रहे हैं। बात गलत निकली, तो रॉ की खिल्ली उड़ सकती है।


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