जमाल खशोगी की हत्या का मामला : क्या ट्रंप के दामाद को बचाया जा रहा?

जागरूक टाइम्स 188 Oct 23, 2018

पहले सऊदी अरब को धमकी देना और बाद में जब सऊदी अरब ने पलटकर धमकी भरी चेतावनी दी तो अब अमेरिका वाशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार जमाल खशोगी की इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब काउंसलेट में की गई बर्बर हत्या के संबंध में ऐसी इधर-उधर की बातें कर रहा है। इससे साफ पता चलता है कि वह कुछ छिपाने की कोशिश कर रहा है। आखिर वो क्या है? क्या सऊदी अरब के प्रिंस एमबीएस के साथ ट्रंप के दामाद की जो दोस्ती है, उसका लिहाज किया जा रहा है या खुद इस पूरे मामले में ट्रंप के दामाद को जवाबदेही से दूर किया जा रहा है? अमेरिका के लिए सऊदी मूल के एक पत्रकार की हत्या इतनी अहम क्यों हो गई है? यह पूरी दुनिया के लिए एक पहेली है। 17 दिनों तक चूहे-बिल्ली के खेल के बाद अंतत: सऊदी शासन ने स्वीकार किया कि पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या इस्तांबुल स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में की गई थी।

उनसे मारपीट हुई और वे मारे गए। खशोगी की लाश का अभी कुछ पता नहीं चला है। सऊदी शासन ने अपने मीडिया सलाहकार और उप खुफिया प्रमुख को बर्खास्त किया है। पत्रकार जमाल खशोगी सऊदी शासन का प्रतिरोध करने के कारण उसकी काली सूची में थे। वह लंबे समय से सऊदी अरब से बाहर रह रहे थे। 2 अक्टूबर 2018 को उन्हें आखिरी बार इस्तांबुल स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में देखा गया था। इस मुद्दे को तुर्की ने इतना बड़ा किया है कि यूरोप समेत दुनिया के विकसित देश इसमें दिलचस्पी लेने लगे हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने बाकायदा बयान जारी किया है कि जो लोग इसमें शामिल हैं, उन्हें छोड़ा नहीं जाना चाहिए। मगर, कूटनीतिक छूट की वजह से तुर्की के भी हाथ कहीं न कहीं बंधे हैं।

पत्रकार खशोगी की हत्या वाणिज्य दूतावास में हुई है, जहां सऊदी कानून ही आयद हो सकता है। इसकी जांच सऊदी अधिकारियों की 15 सदस्यीय टीम कर रही है।
अमेरिका सऊदी अरब पर प्रतिबंध लगाना चाहता है, मगर उसका हथियार व्यापार बाधित नहीं होना चाहिए। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री स्टीवेन मनुचेन ने रविवार को बयान दिया है कि जांच के नतीजे आने तक हमें रुकना है। स्टीवेन ने कहा, 'प्रतिबंध के बारे में पहले से कह देना उचित नहीं होगा।' 24 घंटे के भीतर अमेरिका के सुर बदले हैं। इससे पहले ट्रंप धमका चुके थे। सऊदी अरब में जो निवेशक थे, उनमें अफरा-तफरी मची थी। सऊदी शासन ने भी तुर्की ब तुर्की जवाब दिया कि अगर प्रतिबंध लगता है, तो पूरी दुनिया भुगतने को तैयार रहे।

अमेरिका ने इतना भौकाल डेनियल पर्ल की हत्या पर भी नहीं खड़ा किया था। यह ध्यान में रखने वाली बात है कि 1 फरवरी 2002 को करांची में वाल स्ट्रीट जर्नल के साउथ एशिया ब्यूरो चीफ डेनियल पर्ल को अगवा कर उसका सर कलम कर दिया गया था। इस जघन्य अपराध का दोषी अहमद उमर सईद शेख को ग्वांतानामों बे में सुनवाई के बाद फांसी पर लटका दिया गया। तब भी एक अमेरिकी पत्रकार की हत्या को लेकर पाकिस्तान पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया। 28 जून 2018 को ही मेरीलैंड में चार अमेरिकी पत्रकार मारे गए। 48 घंटे बाद सब कुछ सामान्य हो गया। पत्रकारों की खैरियत जानने वाली एक संस्था है, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट (सीपीजे)। सितंबर 2018 तक के नौ माह में पूरी दुनिया में मारे गए 44 पत्रकारों की सूची 'सीपीजे' ने प्रकाशित की है, मगर ट्रंप प्रशासन के लिए ये पत्रकार महत्व नहीं रखते।

क्योंकि जिस एक पत्रकार की हत्या से एक बड़ा खेल करना है, वह व्हाइट हाउस के लिए अधिक महत्वपूर्ण है। तो क्या इस चक्रव्यूह के पीछे इजराइल है? इस विषय पर चर्चा बिल्कुल नहीं हो रही है। सऊदी अरब और इजराइल के बीच कूटनीतिक संबंध नहीं हैं। 2005 तक सऊदी अरब में इजराइली सामान प्रतिबंधित थे। उसमें बाद के वर्षों में कुछ ढील दी गई। 2016 में कुछ सऊदी पत्रकारों ने अरब के कुछ इलाकों से रिपोर्टिंग की और बताया कि सऊद शासन के लोग यहूदियों पर सितम की भत्र्सना कर रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया गया था कि दोनों तरफ से रिश्तों को ठीक करने की सुगबुगाहट हो रही है। इस अदावत को दुरूस्त करने के वास्ते ट्रंप के दामाद का इस्तेमाल किया जा रहा था। ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि ट्रंप की मध्य-पूर्व नीति उनके दामाद जरेद कुशनर के दम पर चल रही है।

ट्रंप ने 9 जनवरी 2017 को जरेद कुशनर को बहैसियत 'सीनियर एडवाइजर', सिर्फ एक ही काबिलयित पर नियुक्त किया कि वह उनकी बेटी इवांका के पति हैं। जरेद कुशनर रूढि़वादी यहूदी खानदान के वारिस हैं, जिनका अमेरिका में रियल इस्टेट कारोबार है, साथ में 'न्यूयार्क आवजर्बर' जैसे अखबार के पब्लिशर भी हैं। जरेद कुशनर से शादी के बाद इवांका ने भी यहूदी धर्म स्वीकार कर लिया था। कुशनर की इस पूरे खेल में क्या भूमिका हो सकती है? यह जानना जरूरी है। कुशनर की सऊद प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से गहरी छन रही थी, यह बात ट्रंप को भी मालूम है। जब यह सवाल पत्रकारों ने उठाया, तो ट्रंप का जवाब था, 'दोनों जवान हैं, हमउम्र हैं। स्वाभाविक है, हम प्याला-हम निवाला हों।' सऊदी शासन ने पत्रकार खशोगी हत्याकांड में जिन दो अधिकारियों को बर्खास्त किया है, उनमें से एक खुफिया विभाग का उप प्रमुख मेजर जनरल अहमद असीरी है, जो क्राउन प्रिंस सलमान का बेहद करीबी बताया गया है।

तुर्की ने प्रिंस सलमान के करीबियों को एक्सपोज किया है। इस सिलसिले में जो 18 लोग गिरफ्तार किए गए हैं, उनसे जांच में क्या बात निकल के आती है, यह जानना दिलचस्प होगा। मगर, जिस बात को दायें-बायें करने की कोशिश की जा रही है वह यह कि ट्रंप के दामाद जी को इस प्रकरण से दूर रखा जाए। इसमें कोई शक नहीं, दूतावास में मार-पिटाई और हत्या की घटना कूटनीतिक कम्युनिटी के लिए हैरतअंगेज है। ट्रंप ने भी माना कि सऊदी शासन ने कई बार बयानों को बदला है। सऊदी शासन ने कहा है कि क्राउन प्रिंस सलमान ने पत्रकार की हत्या का ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था, तो फिर डेप्यूटी इंटेलीजेंस चीफ मेजर जनरल अहमद असीरी को बर्खास्त करने का क्या तुक है? ये लोग खुद अपने जवाब की वजह से फंस रहे हैं।


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