ब्रेस्ट कैंसर - आहार विहार परिवेश से बचाव संभव !

जागरूक टाइम्स 141 Jul 30, 2018

बिना कारण के कोई कार्य नहीं होता। अधिकतर कुछ बीमारियों को हमस्वयं आमंत्रित करते हैं। हम कोई भी काम को अधिकता से करे या बहुत कम करे या गलत ढंग से करे, ये रोग बीमारियों को आमंत्रित करती हैं। जैसे आजकल खाना, पहनना जैसा होना चाहिए वह नहीं होकर युग के अनुसार होने से कुछ बीमारियां बहुत अधिक समाज में प्रचलन में आ गयी हैं। पहनावा ने भी कुछ बीमारियों को बढ़ाने में भरपूर योगदान दिया हैं। जैसे बर्गर, पिज़्ज़ा, के फे सी आदि के खाद्य पदार्थों में रसायनों का अधिकतम उपयोग होने से हमारे शरीर की क्रियायों को असंतुलित करती हैं। वैसे ही तने या कसे कपड़ों के कारण उन अंगों तक समुचित रक्त प्रवाह न होने से भी रोग पैदा करने में योगदान देते हैं। जैसे तने कसे जीन्स और ब्रा होने से भी सर्वाइकल और ब्रैस्ट कैंसर का होना आम बात हो गयी हैं। एक बार ग्रसित होने पर जीवन के प्रति निराशा और अवसाद होने से जीवन का आनंद समाप्त हो जाता हैं और कभी कभी समय के पूर्व मृत्यु से आलिंगन करना पड़ता हैं।

कुछ साल पहले की बात करे तो महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर को लेकर जागरुकता काफी कम थी लेकिन बीते कुछ समय में लोग इस रोग को गंभीरता से लेने लगे हैं। ब्रेस्ट कैंसर को लेकर कई तरह के जागरुकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं जिसमें महिलाओं को लेकर काम कर रही एनजीओ भी शामिल है, लेकिन इन सबके बीच यदि ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना को रोकना है, तो महिलाओं को जागरुक होना होगा।
एक शोध के अनुसार, जो महिलाएं, टीएनएज में भरपूर मात्रा में सेब, केला और दूसरी हरी सब्जिया खाती है उनमें स्तन कैंसर या ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका अन्य औरतों की तुलना में काफी कम होती है। शोध में कहा गया है कि फल और सब्जियों में भरपूर मात्रा में फाइबर और विटामिन पाए जाते हैं, जो ब्रेस्ट कैंसर से बचाव करते हैं। टीनएज में फल और सब्जिया खाने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा करीब 25 प्रतिशत कम हो जाता है।

स्तन कैंसर कई जटिल कारकों के साथ एक जटिल बीमारी है। इन कारकों में से कुछ, जैसे उम्र, पारिवारिक इतिहास, आनुवांशिकी, और लिंग आदि पर नियंत्रित नहीं किया जा सकता है। हालांकि, ऐसे कारक हैं जिन पर व्यक्ति नियंत्रण किया जा सकता है, जिसमें धूम्रपान, व्यायाम नहीं करना, अधिक वजन होना और गलत आहार शामिल है। कुछ शोधकर्ता यह मानते हैं कि सभी कैंसर का 30 से 40 प्रतिशत कैंसर के लिए आहार जिम्मेदार हो सकता है। स्तन कैंसर विभिन्न स्थानों में शुरू हो सकता है, विभिन्न तरीकों से बढ़ सकता है, और विभिन्न प्रकार के उपचार की आवश्यकता होती है। जैसे

कुछ कैंसर कुछ उपचारों के लिए बेहतर प्रतिक्रिया देते हैं, कुछ कैंसर विशिष्ट खाद्य पदार्थों पर अच्छी प्रतिक्रिया देते हैं।

1. अपने आहार में फलों और सब्जियों को शामिल कीजिए।
2. फाइबर में समृद्ध खाद्य पदार्थ, जैसे साबूत अनाज, सेम, और फलियां।
3. कम वसा वाले दूध और डेयरी उत्पाद।
4. सोयाबीन वाले उत्पाद।
5. विटामिन डी में समृद्ध खाद्य पदार्थ।
6. खाद्य पदार्थ, विशेष रूप से मसालों जिसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं।

91,000 से अधिक महिलाओं के एक अध्ययन में पाया गया कि मुख्य रूप से प्लांट बेस्ड फूड से 15 प्रतिशत तक स्तन कैंसर के विकास का खतरा कम हो सकता है। अन्य लाभों के साथ-साथ फल और सब्जियां फ्लेवोनोइड्स और कैरोटीनोइड में समृद्ध होती हैं, जो कई मेडिकल फायदों से जुड़ी होती हैं। अध्ययनों में ब्रेस्ट कैंसर को रोकने के लिए निम्नलिखित फल और सब्जियां अच्छी हैं – हरी पत्तेदार सब्जियां, काली मिर्च, टमाटर, बैंगन, खट्टे फल, गाजर, ब्रोकोली, गोभी, प्याज, सेब, आड़ू और स्ट्रॉबेरीज आदि।

हालांकि आहार फाइबर पर अनुसंधान और स्तन कैंसर पर इसका प्रभाव वर्तमान में अनिश्चित है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि यह रोग के खिलाफ सुरक्षा में मदद कर सकता है। चूंकि फाइबर पाचन तंत्र और कचरे के नियमित उन्मूलन का समर्थन करता है, यह शरीर को विषाक्त पदार्थों से छुटकारा पाने में मदद करता है। साबूत अनाज और फलियों में एंटीऑक्सिडेंट भी होते हैं, जो कई बीमारियों को रोकने में मदद कर सकते हैं। पॉलीअनसैचुरेटेड और मोनोअनसैचुरेटेड वसा को गुड़ फैट यानी अच्छा वसा माना जाता है। जैतून का तेल, एवोकाडो, बीज, और नट्स में अच्छे वसा पाए जाते हैं।

पिछले 25 वर्षों में व्यापक शोध ने सोया को एक बेहद स्वस्थ खाद्य स्रोत के रूप में पहचाना है। सोया प्रोटीन, स्वस्थ वसा, विटामिन और खनिजों में समृद्ध, लेकिन कार्बोहाइड्रेट में कम है। ब्रैस्ट कैंसर के खतरे को कम करने के अलावा, सोया कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन, या “खराब कोलेस्ट्रॉल” को कम करने और दिल की बीमारी के जोखिम को कम कर सकता है। इसके लिए आप जब स्नान करने जाएँ तो अपने स्तन का ध्यान रखते हुए कोई भी गठानका अहसास हो चाहे उसमे दर्द हो या न हो उसे नज़रअंदाज़ नहीं करे। तत्काल डॉक्टर से सलाह ले। रात में या सोते या आराम के समय अपने अंतरग वस्त्रों को निकाल कर रखे। हो सके तो ढीले वस्त्र पहने। आहार पर विशेष ध्यान देना सर्वोत्तम होगा। किसी भी विषम परिस्थिति होने पर मानसिक संतुलन को बनाये रखे। आजकल इसका इलाज़ सुगम हैं बशर्तें समय पर सलाह ली जाकर इलाज शुरू किया जावें।

Leave a comment