मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं पनीर

जागरूक टाइम्स 58 Sep 11, 2018

पनीर के कई बड़े ब्रांड हैं जो एफएसएसआई के मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं। कंज्यूमर वॉयस की एक रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है। कंज्यूमर वॉयस पनीर के आठ ब्रांड का डीएनए टेस्ट कराया जिसमें 3 एफएसएसआई के सेफ्टी और हाइजीन दोनों क्राइटेरिया पर खरे उतरते हैं लेकिन 4 ब्रांड इन क्राइटेरिया से दूर हैं।

कंज्यूमर वॉयस ने बीआईएस और एफएसएसआई के मानकों के आधार पर पनीर का डीएनए टेस्ट कराया। इस टेस्ट में सामने आया है पनीर के तीन ब्रांड ऐसे हैं जिसके अंदर माइक्रो बायोलॉजिकल कंटेंट नहीं है लेकिन 4 ऐसे भी ब्रांड हैं जिसमें माइक्रो बायोलॉजिकल काफी मात्रा में पाए गए हैं।

माइक्रोबायोलॉजिकल एक तरह के बैक्टेरिया कंटेंट होते हैं, जो किसी भी फूड प्रोडक्ट में हाइजीन की कमी की वजह से पैदा होते हैं। इससे उस फूड प्रोडक्ट अनहेल्दी हो जाता है। अप्रत्यक्ष रूप से वो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकरक होते हैं।दरअसल, अगर प्लांट जहां से दूध या दूध के कोई उत्पाद तैयार होकर रिटेलर के पास आते हैं उस दौरान अगर कोल्ड चेन का ध्यान नहीं रखा गया और फूड प्रोडक्ट को 8 डिग्री से ज्यादा तापमान में रखा गया तो उसमें ये बैक्टेरिया पैदा हो जाते हैं।

जब हमने एफएसएसआई से उनके मानकों पर बात की तो एफएसएसएआई के स्टैंडर्ड और रेगुलेशन एडवाइजर सुनील बक्शी ने कहा, हमारे पास मिल्क प्रोडक्टस के लिए स्टैंडर्ड हैं, लेकिन वो मैन्यूफ्रेक्चर्रर के स्तर पर है। सेफ्टी क्राइटेरिया को ध्यान में रखते हुए स्टैंडर्ड बने हैं लेकिन हाइजीन का स्तर ज्यादातर रिटेलर के एंड से देखा जाना चाहिए। कंज्यूमर वॉयस के टेक्निकल अफसर ने बताया कि हम गुजारिश करने वाले हैं कि वे रिटेलर और कंज्यूमर के लेवल पर भी माइक्रोबायोलॉजिकल के स्टैंडर्ड लेकर आएं ताकि सेलर भी हाइजीन और सेफ्टी का ध्यान रखे। हमने एफएसएसआई के मानकों के आधार पर ही पनीर की टेस्टिंग कराई है। हमने पाया कि कुछ ब्रांड्स में माइक्रोबायोलॉजिकल कंटेंट हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानीकारक हैं। एफएसएसआई के पास मैन्यूफ्रेक्चर्रर के लिए मानक है, लेकिन रिटेलर या कंज्यूमर के लिए माइक्रोबायोलॉजिकल के स्तर पर कोई क्राइटेरिया नहीं है।

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