फिल्म समीक्षा "धडक़" : जान्हवी कपूर और ईशान खट्टर का कमाल

जागरूक टाइम्स 386 Jul 20, 2018

काफी समय से मराठी फि़ल्म ‘सैराट’ के हिंदी रीमेक फि़ल्म ‘धडक़’ का लोगों को इंतजार था। ‘सैराट’ ने सौ करोड़ से ज्यादा की कमाई कर देशवासियों का दिल जीता था और उसका जादू हिंदुस्तान में सिर चढ़ कर बोल रहा था। ऐसे में हिंदी भाषी क्षेत्र में ‘सैराट’ की रीमेक ‘धडक़’ का इंतजार किया जा रहा था।
डायरेक्टर शशांत खेतान की इस फिल्म का फस्र्ट हॉफ काफी स्लो है जो काफी घसीटते हुए आगे बढ़ता है।

‘सैराट’ में प्यार को लेकर जो एक इनोसेंस था उस तरह का ट्रीटमेंट ‘धडक़’ में कहीं नजर नहीं आता। दूसरी जो खामी इस फिल्म में है वो यह कि ‘सैराट’ में वर्गभेद या जातिभेद के मुद्दे को विशुद्ध तौर पर फि़ल्म में क्लैरिफाय किया गया था जबकि ‘धडक़’ में एक संवाद के अलावा यह कहीं पर स्पष्ट नहीं हो पाता है कि आखिर दोनों में विसंगतियां किस बात को लेकर है? यह कहीं पर स्पष्ट नहीं हो पाता है कि आखिर यह मतभेद है क्यों? सेकण्ड हॉफ में भी कई शॉट्र्स बहुत लम्बे हो जाते हैं! ईमानदारी से कहा जाए तो चूंकि ‘धडक़’ सैराट की ऑफिशियल रीमेक है तो जाहिर है दोनों में तुलना होगी ही।

लेकिन, फिर भी एक चांस दिया जाए और ‘सैराट’ से अलग इस फिल्म को देखा जाए, परखा जाए तब भी फस्र्ट हॉफ काफी खींचा हुआ नजऱ आता है, फिल्म में इनोसेंसी का अभाव नजर आता है। साथ ही साथ पूरा माहौल जो शशांक ने बनाया है वो काफी सिंथेटिक नजऱ आता है। लेकिन, फिर भी अगर इसमें अभिनय की बात की जाए तो जाह्नवी कपूर से लोगों को जिस तरह की उम्मीदें थीं वो उस पर खरी उतरती हैं।

जाह्नवी कपूर के बारे में कहा जा सकता है कि बॉलीवुड को एक और हीरोइन मिल गयी है। ईशान खट्टर एक शानदार परफॉर्मर हैं। ईशान और जाह्नवी की जोड़ी आने वाले समय में बॉलीवुड के लिए एक एसेट की तरह साबित होगा, यह इस फि़ल्म का एक प्लस पॉइंट है। अन्य कलाकारों में खरज मुखर्जी, आदित्य कुमार, मनीष वर्मा और गौरी ने भी अपने अभिनय से प्रभावित किया।

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