कामयाबियों और चुनौतियों के बीच फंसे रोहित

जागरूक टाइम्स 187 Jun 27, 2018

नई दिल्ली। 23 अगस्त 2007. भारतीय टीम आयरलैंड, इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के दौरे पर थी. राहुल द्रविड़ भारतीय टीम के कप्तान हुआ करते थे. चंद महीने पहले ही भारतीय टीम वेस्टइंडीज में खेले गए विश्व कप के पहले राउंड में बाहर होकर वापस आई थी. वेस्टइंडीज में टीम इंडिया को बांग्लादेश और श्रीलंका के हाथों शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था. खैर, इस हार के बाद मचे तूफान में काफी कुछ बदला था. कई नए खिलाड़ी भी टीम में आए थे.


ऐसे ही एक खिलाड़ी थे- रोहित शर्मा. 23 अगस्त 2007 को रोहित शर्मा ने आयरलैंड के खिलाफ अपने वनडे करियर की शुरूआत की. उस मैच में उन्हें बल्लेबाजी करने का मौका नहीं मिला. सचिन तेंडुलकर के जल्दी आउट होने के बाद सौरव गांगुली और गौतम गंभीर ने आसानी से भारत को 9 विकेट से बड़ी जीत दिलाई. आज 11 साल बाद रोहित शर्मा एक बार फिर उसी स्थिति में हैं जहां वो 11 साल पहले थे. बीते 11 सालों में उन्होंने विश्व क्रिकेट में कई बार तहलका मचाया है. कई बड़े रिकॉड्र्स कायम किए हैं. टीम इंडिया को जीत दिलाई है. बावजूद इसके उनके सामने बड़ी चुनौतियों का अंबार है. ये सुखद संयोग माना जा सकता है कि रोहित उसी जगह पर वापस लौटे हैं जहां से कभी चले थे. आज से भारतीय टीम का दौरा शुरू हो रहा है. स्वाभाविक तौर पर रोहित शर्मा के सामने सबसे बड़ी चुनौती है उनका मौजूदा फॉर्म.

 रोहित शर्मा इस साल अब तक एक आम बल्लेबाज ही नजर आए हैं. उन्हें अच्छी शुरूआत मिली है लेकिन उसका फायदा उठाने में वो कामयाब नहीं रहे हैं. इस साल अब तक खेले गए 6 वनडे मैचों में उन्होंने 170 रन बनाए हैं. इस साल आईपीएल में भी रोहित शर्मा का बल्ला ज्यादातर मैचों में खामोश रहा. उन्होंने 14 मैच में 286 रन ही बनाए. सीजन-11 में मुंबई की टीम इसीलिए प्लेऑफ की रेस तक भी नहीं पहुंच पाई. इसके अलावा इस साल खेले गए 8 टी-20 मैचों में रोहित शर्मा के नाम 200 से कुछ ज्यादा रन हैं. रोहित शर्मा की फिटनेस को लेकर भी विवाद होता रहा है. इस बार भी वो विवाद चल ही रहा है. ऐसे में इस साल के सबसे बड़े दौरे में रोहित शर्मा की राह बहुत कठिन होने वाली है. भारतीय टीम को अगले साल इसी इंग्लैंड में विश्व कप भी खेलना है. 

विश्व कप के मैचों में रोहित शर्मा जैसे 'पावरफुल' खिलाड़ी का 'इम्पैक्ट' जबरदस्त होगा. बशर्ते वो अपने रंग में दिखाई दें. रोहित शर्मा के लिए पिछले 11 साल का एक बड़ा 'अचीवमेंट' ये भी है कि अब टीम में उनका रोल बदल चुका है. वीरेंद्र सहवाग की तरह ही रोहित शर्मा भी मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी करने आए थे लेकिन अब वो बल्लेबाजी की शुरूआत किया करते हैं. सच ये है कि रोहित शर्मा के भीतर का चैंपियन बल्लेबाज बतौर ओपनर ही सामने आया भी है. लिहाजा उम्मीदें अब और ज्यादा हैं. साल 2012 में भारतीय टीम श्रीलंका के दौरे पर थी. रोहित शर्मा लगातार अपनी फॉर्म से जूझ रहे थे. दहाई तक के आंकड़े तक उनका सफर नहीं पहुंच रहा था. रोहित शर्मा उस समय मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी किया करते थे. सहवाग लगभग लगभग अपने वनडे करियर के आखिरी दौर में थे. ऐसे वक्त में बतौर कप्तान धोनी ने रोहित शर्मा के साथ वही किया जो कभी सहवाग के साथ सौरव गांगुली ने किया था. धोनी ने रोहित शर्मा को सलामी बल्लेबाज की जिम्मेदारी सौंप दी. अगली बड़ी चुनौती थी चैंपियंस ट्रॉफी. जहां रोहित शर्मा ने पहले ही मैच में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अर्धशतक जड़ा. इसके बाद उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ भी 52 रन की अर्धशतकीय पारी खेली. भारत ने उस साल चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीता. कुल मिलाकर रोहित शर्मा भारत के दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने. उन्होंने 5 मैच में 177 रन बनाए. इसी के बाद से रोहित शर्मा की विश्व क्रिकेट में एक सलामी बल्लेबाज के तौर पर पहचान बनी.

 अगले ही साल उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दोहरा शतक लगाया. एक साल बाद उनका एक और दोहरा शतक क्रिकेट फैंस ने देखा. इस बार उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 264 रनों की विशाल पारी खेली. 2017 में श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने एक और दोहरा शतक जड़ा. इसी के साथ उनके खाते में वनडे क्रिकेट में तीन दोहरे शतक हो गए. अब टीम इंडिया बदल चुकी है. अब धोनी नहीं बल्कि रोहित शर्मा के समकालीन विराट कोहली टीम के कप्तान हैं. रोहित को नए सिरे से अपनी बल्लेबाजी को 'डिफाइन' करना होगा.

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