अमेरिका के खिलाफ एकजुट हुए भारत और चीन, ट्रेड वार से हो रहा दोनों देशों का नुकसान

जागरूक टाइम्स 208 May 14, 2019

नई दिल्ली (ईएमएस)। एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्था, चीन और भारत किसी मुद्दे पर एकमत हों, ऐसा बहुत कम होता है। दोनों देशों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा का कारण एशिया में चीन की बढ़ती ताकत को भारत से मिल रही तगड़ी चुनौती है। लेकिन, अमेरिका ने एकतरफा ट्रेड वॉर शुरु कर दोनों देशों को एकजुट कर दिया है। विश्व व्यापार संगठन के 22 विकासशील और सबसे कम विकसित सदस्य देशों की बैठक शुरू हुई। भारत ने दो दिवसीय बैठक में व्यापारिक मुद्दों पर सदस्य देशों की एकतरफा कार्रवाई से संबंधित कानून में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है।

चीन और दक्षिण अफ्रीका भारत के इस कदम के समर्थन में हैं। इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा का एक प्रमुख बिंदु यह है कि यह विकासशील देशों के लिए विशेष प्रावधान हैं, जिस विशेष और विभेदकारी व्यवहार (स्पेशल एंड डिफरेंशल ट्रीटमेंट) कहा जाता है। इसके तहत विकासशील देशों को समझौतों और वादों को लागू करने के लिए ज्यादा वक्त मिलता है। इसके साथ ही, इसमें उनके व्यापारिक हितों की सुरक्षा के प्रावधान भी हैं।

व्यापारिक मुद्दे पर भारत और चीन का एकमत होना आश्चर्य की बात नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापारिक मसलों में 'अमेरिका फर्स्ट की पॉलिसी से चीन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है और दोनों देशों के बीच जारी व्यापारिक बातचीत (ट्रेड टॉक्स) के सकारात्मक दिशा में जाने का कोई संकेत नहीं मिल रहा है। अमेरिका ने 5.6 अरब डॉलर (करीब 395 अरब ) मूल्य की आयातित वस्तुओं पर ड्यूटी बेनिफिट्स हटाकर भारत को भी व्यापारिक झटका दिया है। यूएस ट्रेड सेक्रेटरी विल्बर रॉस ने अपने हालिया दिल्ली दौरे में भारत पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका से आयातित वस्तुओं पर अन्यायपूर्ण तरीके से आयात शुल्क लगाता है। बहरहाल, अमेरिका की एकपक्षीय कार्रवाई के खिलाफ बहुपक्षीय एकजुटता से भारत और चीन फायदे में रहेगा।

इस बैठक में चर्चा का दूसरा विषय डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान तंत्र की अपीलीय संस्था का पतन होना है। विभिन्न देशों के बीच व्यापारिक विवादों के निपटारे के लिए सुनवाई करने वाली अपीलेट बॉडी इसलिए अप्रभावी हो गई है क्योंकि अमेरिका ने जजों की नियुक्ति पर रोक लगा दी। इस संस्था में आम तौर पर सात जज होते हैं, लेकिन फिलहाल इसमें तीन जज ही बचे हैं। दिसंबर में दो और जजों की सेवानिवृत्ति के बाद सिर्फ एक जज ही बच जाएंगे। उसके बाद किसी भी मसले पर सुनवाई की गुंजाइश खत्म हो जाएगी क्योंकि तीन जजों का जरूरी कोरम ही पूरा नहीं हो पाएगा।


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