लोकसभा चुनाव में एसबीआई ने जमकर बेचे चुनावी बॉन्ड, 3,622 करोड़ का गुप्त दान किसे मिला?

जागरूक टाइम्स 564 May 11, 2019

नई दिल्ली (ईएमएस)। लोकसभा चुनाव में पार्टियों को चंदा जुटाने में इस बार चुनावी बांडों ने खासी मदद की है। पार्टियों को चंदा देने के लिए दानदाताओं ने जमकर चुनावी बॉन्ड की खरीदारी की है। इस साल मार्च और अप्रैल के महीने में स्टेट बैंक ऑफ इंडिय (एसबीआई) ने 3,622 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड बेचे हैं। एक आरटीआई के जरिए यह जानकारी सामने आई है। चुनाव आयोग ने 10 मार्च को आम चुनाव की घोषणा की थी और 11 अप्रैल से मतदान शुरू हुआ था।

हालांकि इन चुनावी बॉन्ड के जरिए किस पार्टी को कितना चंदा मिला, इसकी जानकारी दानकर्ताओं और इसे पाने वालों को ही होगी। आरटीईआई के जवाब में एसबीआई ने बताया कि उसने मार्च में 1365.69 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड बेचे वहीं, अप्रैल में चुनावी बॉन्ड की बिक्री में 65 फीसदी का उछाल आया और उस महीने कुल 2256.37 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड बिके। बता दें कि पिछले साल ही चुनावी बॉन्ड स्कीम की शुरुआत की गई थी। इसके जरिए राजनीतिक पार्टियां भारतीय और विदेशी कंपनियों से असीमित दान ले सकती हैं और उन्हें इसका रिकॉर्ड भी नहीं रखना होगा। हालांकि चुनाव आयोग ने इस स्कीम पर आपत्ति उठाई थी।

2017-18 के बजट के दौरान चुनावी बॉन्ड शुरू करने की घोषणा की गई थी। यह करंसी नोट की तरह ही होता है जिसके ऊपर इसकी कीमत लिखी होती है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए चंदा देने के लिए इस बॉन्ड का उपयोग किया जाता है। ये चुनावी बॉन्ड 1,000 रुपये, दस हजार रुपये, एक लाख, दस लाख और एक करोड़ रुपये के मूल्य के उपलब्ध हैं। चुनाव बॉन्ड के मामले में मुंबई सबसे आगे हैं जहां 694 करोड़ के बॉन्ड बिके। इसके बाद कोलकाता और नई दिल्ली का नंबर आता है। यह बॉन्ड एसबीआई की चुनिंदा शाखाओं में उपलब्ध होता है।

वित्त मंत्रालय से नोटिस जारी होने के बाद ही इसे खरीदा जा सकता है। 2018 में केंद्र सरकार की इस योजना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी। इस बॉन्ड के जरिए वही पार्टी चंदा ले सकती है जो 1951 एक्ट के सेक्शन 29ए के तहत रजिस्टर हो और पिछले आम चुनाव में कम से कम कुल वोट के एक प्रतिशत वोट मिले हैं। भारत का कोई भी नागरिक इस बॉन्ड को खरीद सकता है। यह बॉन्ड 15 दिनों के लिए मान्य होता है और इस दौरान राजनीतिक पार्टी को संबंधित बैंक से कैश कराना होता है।


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