क्या कालाधन सफेद करने के लिए की थी नोटबंदी : ममता बनर्जी

जागरूक टाइम्स 79 Aug 30, 2018

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की नोटबंदी की घोषणा को एक बड़ा जनविरोधी कदम बताते हुए बुधवार को आश्चर्य जताया कि क्या नोटबंदी इसलिए लागू की गई थी कि कालाधन रखने वाले गुपचुप इसे सफेद धन में तब्दील कर ले! भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने घोषणा की है कि आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी के जरिए चलन से बाहर किए गए 15.42 लाख करोड़ रुपये में से 99.3 प्रतिशत से अधिक शीर्ष बैंक के पास वापस आ गए हैं।

ममता ने सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में सवाल किया है, मेरा पहला सवाल आज यह है कि काला धन कहां गया?..मेरा दूसरा सवाल यह है कि क्या यह योजना इसलिए लाई गई थी कि काला धन रखने वाले अपने काले धन को गुपचुप सफेद धन में परिवर्तित कर लें? ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि उनकी अंतरात्मा कहती है कि क्रूर नोटबंदी की घोषणा एक बड़ा जनविरोधी कदम था।

आरबीआई ने बुधवार को घोषणा की कि 2017-18 की उसकी रपट के अनुसार, अमान्य किए गए 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों की सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पाया गया कि आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी के समय चलन में रहे विमुद्रित 15.42 लाख करोड़ रुपये में से 15.31 लाख करोड़ रुपये यानी 99.3 प्रतिशत मुद्रा बैंकिंग प्रणाली में वापस आ गई है।

ममता ने यह भी कहा कि इसने देश की आम जनता को, खासतौर से किसानों, असंगठित क्षेत्र, छोटे उद्यमों और कड़ी मेहनत करने वाले मध्य वर्ग को बुरी तरह प्रभावित किया है और आगे भी करेगा। उन्होंने कहा कि आज आरबीआई ने 2017-18 की अपनी वार्षिक रपट में हमारी चिंता को सही साबित कर दिया है। यह एक त्रासदी है और शर्म की बात है।

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