फेसबुक, व्हाट्सऐप के निजी चैट, मैसेज, वीडियो पर होगी सरकार की नजर

जागरूक टाइम्स 195 Dec 24, 2018

नई दिल्ली (ईएमएस)। अभी हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी किया है जिसमें देश की सभी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को लोगों के निजी कंप्यूटरों में मौजूद डाटा पर नजर रखने और जांचने का अधिकार दे दिया है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा ६९ के तहत यदि एजेंसियों को किसी भी संस्थान या व्यक्ति पर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का संदेह होता है तो वे उनके कंप्यूटरों में मौजूद सामग्रियों को जांच सकती हैं और उन पर कार्रवाई कर सकती हैं। वहीं अब सरकार सूचना प्रोधोगिकी अधिनियम की धारा ७९ को अभी अमल में लाने की तैयारी कर रही है।

  एक रिपोर्ट के मुताबिक यह सेक्शन देशभर में इस्तेमाल हो रहे सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लागू होगा। इस अधिनियम के लागू होने के बाद फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप, शेयरचैट, गूगल, अमेजॉन और याहू जैसी कंपनियों को सरकार द्वारा पूछे गए किसी मैसेज के बारे में पूरी जानकारी देनी होगी। उदाहरण के तौर पर यदि सरकार को किसी मैसेज, वीडियो या फोटो पर आपत्ति होती है या संदेह होता है तो सरकार ऐसे मैसेज के बारे में सोशल मीडिया कंपनियों से जानकारी मांगेगी और इन कंपनियों को एंड टू एंड एंक्रिप्शन तोड़कर मैसेज के बारे में सरकार को पूरी जानकारी देनी होगी।

गौरतलब है कि एंड टू एंड एंक्रिप्शन एक सुरक्षा कवच है जिसका फायदा यह होता है कि आपके मैसेज के बारे में पूरी जानकारी आपको होती है और आपने जिसे मैसेज भेजा है उसको होती है। सेक्सन ७९ के लागू होने के बाद गैर-कानूनी रूप से ऑनलाइन देखे जाने वाले कंटेंट पर रोक लगेगी। रिपोर्ट की मानें तो शुक्रवार को इस संबंध में एक बैठक भी हुई है जिसमें पांच पन्नों का मसौदा पेश किया गया। इस बैठक में साइबर लॉ डिवीजन, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, ऑइंटरनेट सेवा प्रदाता संघ के एक अधिकारी, गूगल, फेसबुक, व्हाट्सऐप, अमेजॉन, याहू, ट्विटर, शेयरचैट और सेबी के प्रतिनिधियों शामिल थे।

इस अधिनियम के लागू होने के बाद किसी भी मामले पर सोशल मीडिया कंपनियों को सरकार को ७२ घंटों के भीतर जानकारी देनी होगी। इसके लिए ये कंपनियां भारत में अपने नोडल अधिकारी को नियुक्त करेंगी। साथ ही इन कंपनियों को १८० दिनों का पूरी लेखा-जोखा भी रखना होगा।

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