खुलासा : यूपीए से सस्ती मोदी सरकार की डील, हर विमान पर बचे 59 करोड़

जागरूक टाइम्स 224 Jul 25, 2018

नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों राफेल विमान सौदे पर लेकर मोदी सरकार की घेराबंदी में जुटे हुए है। इस बीच राफेल विमान सौदे में घोटाले की गूंज के बीच अब नया खुलासा हुआ है। राफेल विमान सौदे के बारे में पता चला है कि मोदी सरकार के दौरान हुई राफेल डील यूपीए सरकार की तुलना में हर विमान 59 करोड़ रुपये सस्ती है। यानी हर राफेल विमान पर मोदी सरकार ने मनमोहन सरकार की तुलना में 59 करोड़ रुपये बचाए।

मीडिया के पास जानकारी के मुताबिक, मोदी सरकार ने इस विशेष लड़ाकू विमान की डील में देश का पैसा बचाया है और कांग्रेस सरकार की तुलना में हर विमान का सौदा 59 करोड़ रुपये सस्ता किया गया है। दस्तावेजों के मुताबिक, यूपीए सरकार के दौरान 36 राफेल विमान का सौदा 1.69 लाख करोड़ में किया गया था,जबकि मोदी सरकार ने यही सौदा 59000 हजार करोड़ रुपये में किया। इस हिसाब से मोदी सरकार ने एक विमान का सौदा 1646 करोड़ रुपये में किया, जबकि मनमोहन सिंह के कार्यकाल में एक विमान की डील 1705 करोड़ रुपये में की गई।

जानकारी के मुताबिक जिस विमान की डील मोदी सरकार ने की है वह यूपीए सरकार द्वारा लिए जा रहे विमान से काफी ज्यादा असरदार और तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बताया जा रहा है। इस विमान के अंदर मिटिओर और स्कैल्प जैसी मिसाइलें भी हैं, जो यूपीए की डील के तहत लिए जा रहे फाइटर विमान में नहीं थीं। दस्तावेजों से ये जानकारी भी सामने आई है कि मोदी सरकार ने जिस विमान की डील की है, उसमें भारत के लिए विशेष रूप से 13 चीजें बढ़ाई गई हैं, जो दूसरे देशों को नहीं दी जाती हैं। हालांकि, कांग्रेस का आरोप है कि इस नई डील में किसी भी तरह की टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर की बात नहीं हुई है। इसलिए अचानक दाम बढ़ने की बात समझ नहीं आती है।

बात दे कि कांग्रेस राफेल डील को लेकर लंबे समय से मोदी सरकार के खिलाफ आवाज उठा रही है, सड़क से लेकर संसद तक और प्रेस कॉन्फ्रेंस से लेकर सोशल मीडिया तक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनके नेता मोदी सरकार पर राफेल डील में घोटाले का आरोप लगाते रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि यूपीए सरकार ने जिस विमान की डील की थी, उसी विमान को मोदी सरकार तीन गुना कीमत में खरीद रही है। पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी ने कहा कि कई कंपनियों से बात करने के बाद दिसंबर, 2012 में राफेल को सेलेक्ट किया गया और 126 एयरक्राफ्ट लेने की बात की गई थी। मोदी सरकार ने जिस कंपनी को ये डील दी है उसके पास ना ही एयरक्राफ्ट बनाने का अनुभव है और ना ही लड़ाकू एयरक्राफ्ट का। इसके कारण एचएएल के भी कई इंजीनियरों को अपनी नौकरी हाथ से गंवानी पड़ी। पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी ने कहा कि यूपीए सरकार की डील के अनुसार, 126 में से 18 एयरक्राफ्ट ही फ्रांस में बनने थे बाकी सभी एचएएल के द्वारा भारत में बनने थे।

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