बैंकों के साथ 20-20 मैच न खेले सरकार, आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने दी नसीहत

जागरूक टाइम्स 442 Oct 27, 2018

नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने बैंकों की स्वायत्तता की वकालत करते हुए कहा कि सरकार को बैकों के साथ 20-20 मैच खेलना बंद कर देना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो इसके विनाशकारी नतीजे सामने आएंगे। सीबीआई में जिस समय केंद्र सरकार के हस्तक्षेप को लेकर भूचाल मचा है, ठीक उसी समय बैंकों की स्वायत्तता पर आचार्य की सलाह महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैंकों और मंत्रियों-नेताओं के गठजोड़ की अक्सर शिकायतें आती रहती हैं। बढ़ते एनपीए और बैंकों का पैसा लेकर विदेश भागे वित्तीय अपराधियों के साथ नेताओं-नौकरशाहों के संबंध पर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में बैंकों के लिए 'आजादी' की मांग उठाकर आचार्य ने जताने की कोशिश की है कि अगर बैंक अपने मुताबिक काम करें तो हालात सुधर सकते हैं, वरना विनाशकारी परिणाम के लिए तैयार रहना चाहिए।

एडी श्रॉफ मेमोरियल लेक्चर में आचार्य ने कहा कि जो केंद्र सरकार सेंट्रल बैंक की आजादी की कद्र नहीं करती, उसे देर सबेर वित्तीय बाजारों की नाराजगी का शिकार होना पड़ता है। महत्वपूर्ण रेगुलेटरी संस्थानों को नजरअंदाज करने का नतीजा विनाशकारी होता है। आचार्य ने आगे कहा सेंट्रल बैंकों को आजादी दी जाए तो इससे कई फायदे हैं, जैसे कि इससे कर्ज की लागत घटती है, अंतरराष्ट्रीय निवेश बढ़ता है और बैंक लंबे समय तक जिंदा रहते हैं। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर की यह बात इसलिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि आगे कई राज्यों में विधानसभा चुनाव के साथ-साथ 2019 में आम चुनाव भी है। आचार्य के मुताबिक, बैंकों के मामले में फैसले ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच की तरह लिए जा रहे हैं।

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