मोदी कैबिनेट का किसानों को बड़ा तोहफा

जागरूक टाइम्स 220 Jul 4, 2018

*खरीफ फसलों का समर्थन मूल्य डेढ़ गुना

*धान का समर्थन मूल्य 200 रुपए प्रति क्विंंटल बढ़ा

*अब तक की समर्थन मूल्य की सबसे बड़ी बढ़ोतरी

नई दिल्ली । केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों को बड़ा तोहफा दिया है। कैबिनेट ने खरीफ फसलों के न्यूनतन समर्थन मूल्य (एमएसपी) को डेढ़ गुना बढ़ाने पर मुहर लगा दी है। इससे धान की एमएसपी में 200 रुपए का इजाफा हुआ है। गौरतलब है कि पिछले साल धान का समर्थन मूल्य 1500 रुपए/क्विंटल था। एमएसपी थी। यानी यह अब तक की सबसे बड़ी बढोत्तरी है। इस वृद्धि से सरकार के खजाने पर 33,500 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

यह निर्णय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह और नीति आयोग को सदस्य पीएम मोदी से मुलाकात के बाद लिए गये। मोदी का लक्ष्य है कि 2022 तक किसानों की आय को दोगुना कर दिया जाए। मोदी सरकार के एमएसपी बढ़ाने से सीधे तौर पर हरियाणा यूपी पंजाब महाराष्ट्र गुजरात जैसे राज्यों को सीधा फायदा पहुंचेगा। विशेषज्ञों की मानें, तो ऐसा होने से घर के बजट में इजाफा होगा। यानी महंगाई बढ़ सकती है, जबकि फसलों का मूल्य 20 फीसदी तक गिरने पर सरकार को एमएसपी मुहैया कराने के लिए सवा लाख करोड़ रुपये खर्च करना पड़ सकता है।

किसानों को फायदा हो, लेकिन महंगाई बढ़ेगी
देश के किसानों को बड़ी राहत देने के सरकार के निर्णय की सराहना करते हुए आर्थिक विशेषज्ञ अतुल सिंह ने कहा कि जाहिर है कि अनाज और दालों के दाम जब डेढ़ गुना होंगे, तो महंगाई में इजाफा होगा ही। इसका असर होटल, रेस्तरां और ढाबों की थाली पर भी पड़ेगा। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह जरूरी है, क्योंकि मौजूदा मुद्रास्फीति की तुलना में कृषि उत्पादन की वृद्धि काफी कम है। ऐसे में एमएसपी डेढ़ गुना किए जाने पर देश के अन्नदाता को वाकई में राहत मिलेगी।

सरकार बोली, न बढ़ेगी महंगाई
नीति आयोग के सदस्य और कृृषि मामलों के विशेषज्ञ रमेश चंद ने कहा कि डेढ़ गुना एमएसपी किए जाने से महंगाई पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसका कारण अन्य क्षेत्रों की तुलना में कृषि उत्पादन दरें बहुत ही कम हैं। वैश्विक स्तर पर तुलना करें, तो हमारे देश का किसान वाकई में कीमत के मामले में हाशिए पर है और इसमें सुधार बहुत जरूरी है।

मिलेगी उपज की उचित कीमत
कृषि मामलों के विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र शर्मा ने कहा कि यह स्वाभाविक है कि जब थोक कीमतों में बढ़ोतरी होगी, तो उसका असर खुदरा बाजार में ज्यादा होगा। ऐसे में आम आदमी के लिए रसोई का खर्च जरूर बढ़ जाएगा, लेकिन दूसरी तरफ अन्नदाता को इससे राहत मिलेगी। अगर बाजार मूल्य एमएसपी से कम रहता है, तो सरकार उन्हें शेष राशि मुहैया कराएगी। ऐसे में हर सूरत में उन्हें उपज का उचित दाम मिल पाएगा।

आसान नहीं होगी राह
आर्थिक विशेषज्ञ दिपांशु अग्रवाल का कहना है कि किसानों को खरीफ फसलों का डेढ़ गुना एमएसपी मुहैया कराने में सरकार की राह आसान नहीं होने वाली है। सरकार इसे लागू करने के लिए कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेस यानि सीएसीपी को उत्पादन की लागत (ए2) के साथ सदस्यों की मेहनत (एफएल) के फॉर्मूले का इस्तेमाल करेगी। गौर करने वाली बात यह है कि मौजूदा एमएसपी किसानों को लागत और मेहनत, दोनों नहीं मुहैया करा पाती है। ऐसे में यह जरूरी है कि अन्नदाता की एमएसपी को डेढ़ गुना या उससे अधिक किया जाए।

चावल, कपास का घटेगा निर्यात
कृषि मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, अगर सरकार डेढ़ गुना एमएसपी को हरी झंडी देती है, तो घरेलू बाजार में चावल की कीमत लगभग 13 फीसदी, मक्का की कीमत 15 फीसदी और कपास की कीमत लगभग 28 फीसदी बढ़ेगी। जाहिर है कि इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में इजाफा होगा। हालांकि चावल और कपास अंतरराष्ट्रीय बाजार से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएगा।

इनका अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात घटेगा। जबकि जरूरत से ज्यादा उपज होने पर खरीफ फसलों के दाम बाजार में 20 फीसदी तक गिरने पर सरकार को 1 लाख 14 हजार करोड़ रुपये का बोझ उठाना होगा। साथ ही, यातायात और भंडारण के लिए अलग से 10,000 करोड़ रुपये की लागत होगी। गौरतलब है कि केंद्र सरकार इसमें राज्यों की भी हिस्सेदारी रखेगी। लेकिन राज्य इसके लिए कितना तैयार होंगे ये तो वक्त ही बताएगा।

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