रेल टिकट घोटाले का पर्दाफाश, अब होगी विभागीय कर्मियों की भूमिका की जांच

जागरूक टाइम्स 541 Jun 15, 2019

नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय रेलवे ने दलालों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए रेलवे टिकट एजेंटों और दलालों पर कार्रवाई की। इसके बाद अब रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की विशेष जांच शाखा इस गिरोह में शामिल विभागीय कर्मियों की भूमिका की जांच कर रही है। यह गोरखधंधा करोड़ो रुपयों का है। आरपीएफ ने रेलवे के वित्तीय विभाग से ई-टिकटों के रियल-टाइम की जानकारी मांगी है। हालांकि खुफिया एजेंसी को यह महत्वपूर्ण जानकारी अभी मिली नहीं है।

सूत्रों ने बताया कि जब देशभर में विभिन्न टिकेट एजेंटों के ई-टिकट की बुकिंग और भुगतान के माध्यमों से संबंधित जानकारी मिल जाएगी तो देशभर में फैले तत्काल टिकट रैकेट की साफ तस्वीर उभरकर आएगी। विभाग के लोगों के या चतुर्थ-श्रेणी कर्मियों के इसमें शामिल होने के सवाल पर आरपीएफ के निदेश अरुण कुमार ने कहा कि यह जांच का विषय है। मैं फिलहाल कोई जानकारी साझा नहीं कर सकता।

वहीं मोदी सरकार में रेलमंत्री पीयूष गोयल ने टिकेट घोटाले में आरपीएफ की जांच 'ऑपरेशन थंडर' की प्रशंसा की है और गिरोह में किसी भी विभागीय कर्मी की संलिप्तता की स्थिति में कार्रवाई शुरू करने की मंजूरी दे दी है। तत्काल सेवा और ई-टिकटिंग की बुकिंग के संबंध में आरपीएफ ने 205 शहरों और कस्बों में छापामारी कर लगभग 405 दलालों पर शिकंजा कसा। जांच में पाया गया कि तत्काल सेवा के अंतर्गत ई-टिकटिंग को धोखाधड़ी से बुक करने के लिए ज्यादातर टिकट एजेंट और दलाल विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं। ये टिकट बाद में यात्रियों को ऊंची कीमतों पर बेची जाती हैं।
राजस्थान के कोटा से एक सॉफ्टवेयर बरामद किया...

आरपीएफ के एक सूत्र ने कहा कि कोटा से एक सॉफ्टवेयर एएनएमएस-रेड मिर्ची बरामद किया गया, जिसका उपयोग आईआरसीटीसी की तत्काल सेवा को हैक करने में किया गया। अब इस सुधार दिया गया है।आरपीएफ के एक अधिकारी के अनुसार,जिन 387 यूजर आईडीज जिनसे लगातार ये टिकट बुक किए गए थे, उन्हें काली सूची में डाल दिया गया है और टिकटों को रद्द कर दिया गया है। आरपीएफ ने दलालों पर दवाब बढ़ाने के लिए सभी जोनल रेलवेज को उनके क्षेत्रों में ऐसी छापामारी जारी रखने के भी निर्देश दिए हैं।


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