तब राजीव पीछे हटे थे, अब मोदी ने दिखाई हिम्मत

जागरूक टाइम्स 80 Jul 31, 2018

- असम में एनआरसी को लेकर संदस में उबाल, विपक्ष के आरोपों पर बोले शाह

- गृहमंत्री बोले, राज्य सरकारें रोहिंग्या शरणार्थियों को कर सकती हैं बाहर

नई दिल्ली । असम में एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स) के ड्राफ्ट को लेकर मंगलवार को संसद के बाहर और भीतर विरोधी दल के सांसदों ने विरोध जताया। वहीं, लोकसभा में एक सवाल के जवाब में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रोहिंग्या शरणार्थियों को राज्य सरकारें देश से बाहर कर सकती हैं। राज्यसभा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, राजीव गांधी ने 1985 में असम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जोकि एनआरसी की तरह ही था। उनके पास इसे लागू करने की हिम्मत नहीं थी। हमने यह कर दिया। शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आप बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचाना चाहते हैं। घुसपैठियों की पहचान करने की हिम्मत आज तक किसी सरकार ने नहीं दिखाई। हंगामे के बीच राज्यसभा पहले 10 मिनट के लिए और फिर बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

रोहिंग्या को म्यांमार भेजा जाएगा
लोकसभा में राजनाथ सिंह ने कहा, रोहिंग्या पर सरकार ने दिशा-निर्देश जारी की हैं। म्यांमार भेजने पर सरकार प्रक्रिया शुरू करेगी। सीमा सुरक्षा बल और आसाम राइफल्स को रोहिंग्या घुसपैठ रोकने के लिए तैनात किया गया है। राज्यों को एडवाइजरी जारी की गई है। उन्हें भारत आ चुके रोहिंग्या पर नजर बनाए रखने और मॉनिटर करने के साथ ही एक जगह पर रखने के लिए कहा गया है। उनसे कहा गया है कि वह उन्हें फैलने ना दें।

टीएमसी ने दिया स्थगन प्रस्ताव
इससे पहले कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी और टीएमसी के सौगत रॉय ने लोकसभा में एनआरसी ड्राफ्ट को लेकर स्थगन प्रस्ताव दिया। वहीं संसद की कार्यवाही से पहले भाजपा संसदीय दल बोर्ड की बैठक हुई जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और धर्मेंद्र प्रधान सहित कई मंत्री मौजूद रहे। वहीं, एनआरसी मामले को लेकर संसद भवन के परिसर में तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी विरोध प्रदर्शन किया। टीएमसी के सासंद सुगत बोस ने कहा, विदेश मंत्रालय बांग्लादेश के रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए ऑपरेशन इंसानियत का आयोजन कर रही है। भारत में इस समय 40,000 रोहिंग्या हैं।

क्या हम केवल उन्हीं रोहिंग्या के लिए सहानिभूति दिखाएंगे जो बांग्लादेश में हैं? टीएमसी सांसद के बयान का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा, यह सुगत बोस के द्वारा दिया गया दुर्भाग्यपूर्ण बयान है। भारत शायद अकेला ऐसा देश है जो शरणार्थियों के प्रति नरम रुख रखता है। हमने म्यांमार को यह भी बताया है कि हम लौटने पर रोहिंग्या को सुविधाएं प्रदान करने में उनकी सहायता करने के लिए तैयार हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में सबकुछ हो रहा
विपक्ष के सरकार पर धार्मिक आधार पर बंटवारे की राजनीति के आरोपों पर भी गृह मंत्री ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि मैं पूरे सदन को इस पूरी प्रक्रिया में सरकार के हाथ होने की बात साबित करने की चुनौती देता हूं। सभी जानते हैं कि इसमें केंद्र की कोई भूमिका नहीं है। सारा कुछ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और निगरानी में हो रहा है। ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए।

मायावती ने किया हमला
बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायवती ने कहा, भाजपा शासित आसाम में एनआरसी ड्राफ्ट के जरिए लगभग 40 लाख अल्पसंख्यकों की नागरिकता को अवैध करार दे दिया गया है। यदि लोग आसाम में लंबे समय से रह रहे हैं और वह अपनी नागरिकता का सबूत देने में सक्षम नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें देश से बाहर फेंक दिया जाए।

एनआरसी में जिनके नाम नहीं हैं, वे घुसपैठिए: शाह
संवाददाताओं से बातचीत के दौरान अमित शाह ने कहा कि मुझे संसद में बोलने नहीं दिया गया। मैं देशवासियों को कहना चाहता हूं कि एनआरसी से किसी भारतीय का नाम नहीं काटा गया है और जिनका नाम लिस्ट में नहीं है वे घुसपैठिए हैं। मैं साफ कर देना चाहता हूं कि इस देश पर पहला अधिकार भारतीयों का है।

संकट के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाएं : राहुल
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एनआरसी के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल खड़े करते हुए सोशल मीडिया वेबसाइट फेसबुक में पोस्ट किया। संकट के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। राहुल ने कांग्रेस सदस्यों का आह्वान किया कि वे राज्य में शांति बनाए रखने में मदद करें और एनआरसी के संदर्भ में जिन लोगों के खिलाफ नाइंसाफी की गई है उनकी मदद करें चाहे उनका किसी भी धर्म, जाति, लिंग, भाषायी समूह या राजनीतिक जुड़ाव हो. उन्होंने फेसबुक पोस्ट में कहा, संप्रग सरकार और मनमोहन सिंह जी के तहत एनआरसी की शुरुआत की गई थी ताकि 1985 के असम समझौते में किए गए वादे को पूरा किया जा सके।

क्या जबरदस्ती लोगों को निकाला जायेगा : ममता
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व टीमएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने भाजपा पर देश को बांटने का आरोप लगाया। ममता ने कहा- मैं मातृभूमि का विभाजन नहीं देख सकती। भारत अब बदलाव चाहता है और दुनिया की बेहतरी के लिए ये बदलाव निश्चित तौर पर 2019 में आना चाहिए। ममता ने कहा, एनआरसी से बाहर हुए लोग बांग्लादेशी, बंगाली, हिंदू, अल्पसंख्यक और बिहार के हैं।

कल तक जिन 40 लाख लोगों के पास वोट डालने का अधिकार था, अचानक उन्हें अपने ही देश में शरणार्थी बना दिया गया। हम बंगाल में कभी एनआरसी लागू नहीं होने देंगे। मैं मातृभूमि का विभाजन और लोगों के अंदर निराशा नहीं देख सकती हूं। सिर्फ चुनाव जीतने के लिए इसे लागू किया जा रहा है। इससे देश में गृहयुद्ध की स्थिति बन बनेगी। मुझे आश्चर्य हुआ, जब हमारी पार्टी के पूर्व प्रमुख फखरुद्दीन अली अहमद के परिवार के लोगों के नाम लिस्ट में नहीं मिले। अगर बंगाली कहें कि बिहार के लोग बंगाल में नहीं रह सकते। दक्षिण भारतीय कहें कि उत्तर भारतीय उनके यहां नहीं रह सकते, तो इस देश की स्थिति क्या होगी। हम सब साथ हैं, हमारा देश हमारा परिवार है।

बांग्लादेशियों की मौसी हैं ममता बनर्जी : कैलाश
भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, पश्चिम बंगाल का युवा बांग्लादेश के अवैध प्रवासियों की पहचान करना चाहता है क्योंकि उनकी वजह से उन्हें बेरोजगारी और कानून संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। भाजपा उनकी मांग का समर्थन करती है। विजयवर्गीय ने कहा, हम लोग छुट्टी मनाने अपने मामा के घर जाते हैं और 15 दिन में लौट आते हैं। लेकिन बांग्लादेश के आतंकवादी और नकली नोट चलाने वाले वहां से अपनी मौसी (ममता बनर्जी) के घर आ रहे हैं। कोलकाता में कम पैसे में बांग्लादेशी मजदूर मिल जाते हैं। असम में 50 लाख लोगों ने हमको प्रमाण पत्र नहीं दिया है, वोटर लिस्ट से हटा दिया है और दीदी यहां बोलती हैं कि असम के बांग्लादेशियों को हम बंगाल में स्थान देंगे, बंगाल क्या धर्मशाला है? यदि असम के फाइनल नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) ने 40 लाख नागरिकों को अवैध माना है तो पश्चिम बंगाल में यह आकंड़ा करोड़ों में जा सकता है। असम में सुप्रीम कोर्ट इसकी देख-रेख कर रहा है। ऐसा पश्चिम बंगाल में भी हो सकता है।

संसद के बाहर बोले केंद्रीय मंत्री, जो भारतीय वही देश में रहेगा
कांग्रेसी सांसद प्रदीप भट्टाचार्य और केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे में सदन के बाहर असम मुद्दे को लेकर नोंकझोंक हो गई है। इस दौरान चौबे ने कहा कि देश के अवैध नागरिकों को बाहर निकाला जाए। वहीं भट्टाचार्य ने कहा कि ये लोग सदन को मिसलीड कर रहे हैं। इस दौरान दोनों ही नेताओं में काफी देर तक बहस होती रही।

सरकार बोली- कुछ रोहिंग्या गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल
शरणार्थी का दर्जा नहीं दिया का दर्जा
प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल और असम राइफल्स को सजग किया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि 'अवैध प्रवासी' भारत में प्रवेश नहीं कर सकें। उन्होंने कहा कि फरवरी, 2018 में राज्यों को जारी ताजा एडवाइजरी में कहा गया है कि वे अपने यहां मौजूद रोहिंग्या की गणना करें और उन्हें एक निश्चित क्षेत्र में सीमित रखें। राज्यों को रोहिंग्या की गतिविधि पर भी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि सरकार को रोहिंग्या लोगों के अवैध गतिविधि में शामिल होने की रिपोर्ट्स मिली हैं। हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से खुलासा नहीं किया। उन्होंने कहा कि रोहिंग्या भारत में शरणार्थी नहीं हैं, वरन अवैध प्रवासी हैं। वे किसी भी सरकारी सुविधा के हकदार नहीं हैं।

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