सुप्रीम कोर्ट का फरमान, लौट रहे मजदूरों को मिले रोजगार

जागरूक टाइम्स 281 Jun 6, 2020

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जो मजदूर अपने गांव वापस लौट रहे हैं, वहां की राज्य सरकार को उन्हें रोजगार देने की व्यवस्था करनी चाहिए। प्रवासी मजदूरों की बदहाली पर खुद ही संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहे कोर्ट ने कहा है कि जो मजदूर अभी भी अपने राज्य लौटने से रह गए हैं, उन्हें दो ह ते में वापस भेजने का इंतजाम किया जाए। कोर्ट पूरे मामले पर मंगलवार, नौ जून को विस्तृत आदेश जारी करेगा। अपने राज्य वापस लौटने के लिए परेशान फिर रहे मजदूरों की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की थी। 28 मई को इस मामले में कोर्ट ने मज़दूरों से किराया न लिए जाने जैसे कई निर्देश जारी किए थे। केंद्र और सभी राज्यों से मामले पर जवाब देने को कहा था।

90 फीसदी प्रवासी मजदूर अपने घर पहुंचे
सुनवाई में केंद्र और राज्यों ने इस मसले पर आंकड़े पेश किए। कोर्ट को बताया कि वापस लौटने के इच्छुक तकरीबन 90 फीसदी प्रवासी मजदूर अपने राज्य में पहुंच चुके हैं। केंद्र ने बताया कि अब तक 4200 श्रमिक ट्रेन चलाई गई हैं। ट्रेन और सड़क मार्ग से एक करोड़ लोगों को घर भेजा गया है। केंद्र ने यह भी बताया कि अभी राज्य सरकारों ने 171 ट्रेनों का अनुरोध कर रखा है। अनुरोध मिलने के 24 घंटे के भीतर ट्रेन का बंदोबस्त किया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने कोर्ट को जानकारी दी कि अभी तक 802 ट्रेनों और सड़क मार्ग से 11 लाख मज़दूरों को वापस भेजा जा चुका है। 38,000 को भेजना बाकी है। गुजरात ने कहा कि वहां से 20.5 लाख लोगों को वापस भेजा गया है।

यूपी ने करीब 26 लाख और बिहार ने 28 लाख लोगों के वापस आने की जानकारी दी। दूसरे राज्यों ने भी अपने यहां से जाने और वापस आने वालों के आंकड़े दिए। जस्टिस अशोक भूषण, संजय किशन कौल और एम आर शाह की बेंच ने इस पर संतोष जताया। कोर्ट ने कहा कि अगले 15 दिन में बचे हुए लोगों को भी उनके राज्य वापस भेज दिया जाए। वापस लौटने की इच्छा रखने वाले प्रवासी मज़दूरों के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को और सरल किया जाए। बेंच ने आगे कहा कि राज्य हमें बताएं कि जो लोग घर वापस लौट रहे हैं, उन्हें रोजगार देने का क्या इंतज़ाम है? सभी राज्यों को गांव और प्रखंड के स्तर पर अपने यहां वापस लौटे मजदूरों का रजिस्ट्रेशन करना चाहिए।



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