दो करोड़ से अधिक भारतीय विदेशों में फहरा रहे देश का परचम : राष्‍ट्रपति कोविंद

जागरूक टाइम्स 162 Oct 8, 2018

नई दिल्‍ली । दुनिया में दो करोड़ से अधिक भारतीय विदेशों में रहकर देश का परचम फहरा रहे हैं। यह बात राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कही। तजाकिस्‍तान में राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अंतरराष्‍ट्रीय संबंधों में भारतीय प्रवासी समुदाय की अहम भूमिका का जिक्र किया है। उन्‍होंने कहा कि भारत और उसके प्रवासी समुदाय के बीच भावनात्‍मक, सांस्‍कृतिक, आर्थिक और संस्‍थागत संबंध पिछले कुछ सालों में काफी मजबूत हुए हैं। राष्‍ट्रपति तजाकिस्‍तान में भारत के राजदूत सोमनाथ घोष द्वारा आयोजित कार्यक्रम 'फ्रेंड्स ऑफ इंडिया इन तजाकिस्‍तान' में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे।

इस दौरान उन्‍होंने प्रवासी भारतीयों का देश के प्रति योगदान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दो करोड़ से अधिक भारतीय प्रवासी दुनिया के कई देशों में फैले हुए हैं। शुरुआत में ज्‍यादातर लोग दो जून की रोटी के लिए यहां से पलायन कर गए। इसमें कई परिवार तो इन देशों की नागरिकता हासिल कर लिए और यहां जाकर बस गए। दरअसल, उपनिवेशवाद के दौर में इसकी शुरुआत हुई। अंग्रेजी हुकूमत को अपने उपनिवेश में अफ़्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया, फ़िजी और कैरिबियाई द्वीपों में सस्ते मज़दूरों की जरुरत थी। ऐसे में सस्‍ते मजदूरों की तलाश में भारतीय लोगों की एक बड़ी खेप यहां से रोजगार के लिए गई।
आजादी के बाद भी यह सिलसिला रुका नहीं। बेहतर जिंदगी की तलाश में भारी संख्‍या में भारतीय पश्चिमी देशों की ओर रुख किए। आज शायद ही दुनिया का कोई मुल्‍क होगा, जहां भारतीय नहीं रहते हों।

सबसे ज्‍यादा भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं। खाड़ी देशों में करीब 30 लाख प्रवासी भारतीय रहते हैं। इसके बाद अफ्रीका के देशों में प्रवासी भारतीयों की अधिक तादाद है। यहां भी 25 लाख से अधिक प्रवासी भारतीयों की संख्‍या है। ब्रिटेन में करीब दस लाख प्रवासी भारतीय हैं। कनाडा में करीब डेढ़ लाख प्रवासी भारतीय रहते हैं। 

इन अप्रावसी भारतीयों में अधिकतर लोग मेहनत मजदूरी करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक यहां सत्‍तर फीसद यानी करीब 21 लाख लोग खाड़ी देशों में मेहनत-मजदूरी करके जीवन यापन करते हैं। हालांकि, एक बड़ी तादाद यहां डॉक्टरों, बैंकरों एवं चार्टर्ड अकाउंटेट की है। इसके साथ दक्षिण पूर्व एशिया में भारतीय मूल के लगभग 20 लाख लोग रहते हैं। इनमें सबसे अधिक यानि 16 लाख केवल मलेशिया में रहते हैं। अमेरिका में भी इन प्रवासी भारतीयों का भारी दबदबा है। अमेरिका में करीब 17 लाख लोग भारतीय मूल के हैं। ये कुल अमेरिकन आबादी का करीब 0.6 फीसद है। लेकिन यहाँ प्रवासी भारतीयों की तस्‍वीर थोड़ी उलट है। यहां रहने वाले भारतीय बहुत ज़्यादा पढ़े-लिखे, बहुत ज़्यादा जागरूक और बहुत ज़्यादा कमाने वाले लोग हैं। इतना ही नहीं अमेरिका में यह एक राजनीतिक ताकत के रूप में उभर के आए हैं।

कनाडा में भी भारतीय मूल के लोगों की भारी तादाद है। यहां करीब डेढ़ लाख लोग निवास करते हैं। केरिबियाई द्वीप के देशों में दस लाख अप्रवासी भारतीय हैं। अफ़्रीकी महाद्वीप पर भारतीय मूल के लगभग 14 लाख लोग रहते हैं। इनमें से दस लाख लोग तो दक्षिण अफ़्रीका में रहते हैं। दो लाख लोग मॉरिशस और रियूनियन द्वीप पर और दो लाख अफ़्रीका के पूर्वी मुल्‍कों में रहते हैं। यूरोप के ज़्यादातर देशों के विदेशियों के आने पर कड़े प्रतिबंधों के कारण बहुत ज़्यादा भारतीय नहीं रहते। लेकिन केवल ब्रिटेन में भारतीय मूल के क़रीब दस लाख लोग हैं और ये आर्थक और राजनीतिक रूप से बहुत मज़बूत हैं।

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