ऑनलाइन ट्रांजेक्‍शन होगी फ्री, आरबीआई ने दिलाया भरोसा एटीएम चार्ज पर भी फैसला जल्द

जागरूक टाइम्स 668 Jun 6, 2019

मुंबई (ईएमएस)। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में करोड़ों उपभोक्ताओं को आरबीआई ने अच्छा तोहफा दिया है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने महंगाई के लक्षित दायरे में रहने के बीच आर्थिक गतिविधियों में आई सुस्ती के मद्देनजर तंत्र में तरलता बढ़ाने और पूंजी लागत में कमी लाने के उद्देश्य से नीतिगत दरों में एक चौथाई प्रतिशत की कटौती की है जिससे आवास, वाहन और व्यक्तिगत ऋण सहित सभी प्रकार के ऋण सस्ते होने की उम्मीद है। इसके साथ ही आरबीआई ने ऑनलाइन ट्रांजेक्‍शन करने वालों को भी बड़ा तोहफा दिया है।

रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सिस्टम (आरटीजीएस) और नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (एनईएफटी) को नि:शुल्क करने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक समीक्षा समिति की बैठक के बाद गुरुवार को जारी विकासशील एवं नियमाक नीति बयान में कहा गया है कि इसके बारे में सप्ताह के भीतर अनुदेश जारी किए जाएंगे। बयान के अनुसार, डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा आरटीजीएस और एनईएफटी प्रणाली को शुल्क मुक्त बनाने का फैसला किया गया है।

इसके बाद बैंकों को भी इस फैसले का लाभ अपने ग्राहकों को देना होगा।'' फिलहाल आरबीआई आरटीजीएस और एनईएफटी प्रणाली के द्वारा हुए लेनदेन के लिए बैंकों से शुल्क लेता है जिसके बदले बैंक ग्राहकों से इसके लिए शुल्क वसूलते हैं। नेटबैंकिंग के द्वारा ऑनलाइन लेनदेन तीन तरीके से किया जाता है। आरटीजीएस और एनईएफटी के अलावा आईएमपीएस यानी तत्काल भुगतान सेवा की भी एक प्रणाली है जिसका शुल्क एनईएफटी से ज्यादा होता है।

आरबीआई के जारी बयान में आईएमपीएस के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। आरटीजीएस सिर्फ दो लाख रुपए या उससे ज्यादा की राशि के लेनदेन के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि आईएमपीएस का इस्तेमाल सिर्फ दो लाख रुपए तक के लेनदेन के लिए हो सकता है। रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सिस्टम के तहत मनी ट्रांसफर का काम झट होता है।

आरटीजीएस का उपयोग बड़ी राशि को ट्रांसफर करने के लिए होता है। इसके तहत न्यूनतम 2 लाख भेजे सकते हैं और अधिकतम राशि भेजने की कोई सीमा नहीं है। बैंकों का राशि के हिसाब से ही आरटीजीएस चार्ज होता है। वहीं नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर के लिए न्यूनतम और अधिकतम पैसे की सीमा नहीं है। यह चार्ज भी अमाउंट के हिसाब से बढ़ता जाता है।


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