उरी में आंतकवादी हमले में भीम निम्ब सिंह रावत शहीद

जागरूक टाइम्स 133 May 24, 2018
राजसमंद। कश्मीर के उरी में आतंकवादी हमले में भीम मगरा क्षेत्र के शहीद सपूत निम्ब सिंह रावत उम्र 48 वर्ष के शहीद होने की खबर स्थानीय गॉंव भीम क्षेत्र के बिलियावास पंचायत के राजवा गॉंव में सोमवार सुबह पहुॅचने पर मातम छा गया। निम्ब सिंह बिहार रेजिमेन्ट में हवलदार थे। वह 1993 से सेना में थे। वह अंतिम बार रक्षाबंधन से पूर्व एक माह की छुट्टी पर गॉंव आये थे। रक्षाबंधन से पूर्व 10 अगस्त को वापस ड्युटी पर चले गये। निम्ब सिंह 20 दिन पहले ही उरी में ड्युटी पर तैनात किया गया था। इससे पूर्व वह बांग्लादेष आसाम बॉर्डर पर न्यू जलपाई कुण्डी में तैनात थे। पॉंच बच्चो के पिता निम्ब सिंह सात भाई बहनो का परिवार है। बडा भाई रासू सिंह, लक्ष्मी देवी, निम्ब सिंह, लक्ष्मण सिंह, प्रभु सिंह, जमना, नर्बदा है। निम्ब सिंह के परिवार में पत्नी रोडी देवी सहित पॉंच बच्चे हैं। जिनमें बेटियो में आषा उम्र 15 वर्ष, दीपा उम्र 13 वर्ष, लता 10 वर्ष, पायल 9 वर्ष एवं बेटा चन्दन 7 वर्ष है। फौजी पिता सात साल जर्मन जेल में रहे : निम्ब सिंह के पिता केषर सिंह पुत्र रतन सिंह जाति रावत निवासी राजवा सन् 1939 में सैनिक थे और जर्मन जेल में द्वितीय विष्व युद्ध में सात साल तक जर्मन जेल में बंद रहे। सैनिक की नौकरी के सेवानिवृत होने के बाद राजस्थान के ही भीलवाडा जिले में राजस्थान पुलिस में सिपाही की नौकरी प्राप्त की और उनका निधन 30 नवम्बर 1993 को हो गया था। पिता की इच्छा थी कि मेरे परिवार में से कोई देष के लिये सेना में भर्ती हो। जिसके चलते चार पुत्रो में से शहीद निम्ब सिंह को सैनिक बनाया और 1993 में सेना में भर्ती हुए। शहीद के अन्य तीनो भाई गॉंव में ही कृषि कार्य कर रहे है जबकि निम्ब सिंह दसवीं पास होने के बाद देष की सेवा के लिये सेना में भर्ती हो गये। शहीद की मॉं तोपी देवी का भी निधन हो चुका है। 5 फरवरी 2002 में उनकी मॉं का निधन हुआ था। इसी गॉंव का एक और फौजी उसी स्थान पर : राजवा गॉंव की कुल आबादी एक हजार के आसपास है। गॉंव के अधिकतर लोग खेती बाडी पर ही निर्भर है। गॉंव के ही दो अन्य लोग सैनिक डाउ सिंह पुत्र लाडु सिंह उम्र 48 वर्ष, सैनिक नरेन्द्र सिंह पुत्र अन्ना सिंह उम्र 42 वर्ष दो दिन पूर्व ही पठानकोट से अपने घर राजवा आया था। पठानकोट से उरी तैनाती के लिये नरेन्द्र सिंह को आदेष भी हो चुके थे लेकिन छुट्टी स्वीकृत होने से घर पर आ गया था। बीस दिन पूर्व ही पहुॅचे थे उरी में - शहीद बीस दिन पूर्व ही जलपाईकुडी बांग्लादेष आसाम बॉर्डर से बीस दिन पूर्व ही उरी के लिये तैनाती की गई। आठ दिन पूर्व ही अपनी पत्नि रोडी देवी से मोबाईल पर बातचीत हुई थी कि खेतो में लग रही फसल मक्का एवं ककडी कैसी स्थिति है उसकी जानकारी दी। ककडी एवं मक्का खाने की इच्छा हो रही है। पत्नी को परिवार की एवं बच्चो के बारे में सभी का हालचाल पूछा। विषेषकर नन्हा से पुत्र चंदन सिंह के बारे में पत्नी को कहा कि उसका ध्यान रखना। अगर छुट्टी स्वीकृत होती है तो निष्चित ही मैं ककडी एवं मक्का खाने आउॅंगा। सन्नाटे को चिरती रही रोने बिलखने की आवाज - शहीद की मौत की खबर सुनकर गॉंव में सन्नाटा पसर गया। सन्नाटे के बीच शहीद के घर उसकी पत्नी, बच्चे, बहन, भाई सभी रोने बिलखने लगे। पूरा गॉंव शहीद के घर के बाहर एकत्रित हो गया। शहीद की पत्नि एवं बेटियॉ बार बार बेसुध हो रही थी। रिष्तेदार महिलाओ ने उनको संभाला। शहीद के घर मातम देखकर मौजूद लोगो की ऑंखे भी नम हो गई। गॉंव में बने करीब दौ सौ घरो में चूल्हे नहीं जले। भीम कस्बे में मंगलवार को शहीद की पार्थिव देह सुबह 8 बजे पहुॅंचेगी। जहॉं पर भीम सैनिक विश्राम गृह के व्यवस्थापक मोहन सिंह, सेवानिवृत सैनिक अध्यक्ष कैप्टन रणजीत सिंह एवं समाजसेवी गोपाल सिंह पीटीआई द्वारा भीम कस्बे में शहीद की पार्थिव देह के अंतिम दर्षन करने के लिये भीम कस्बे के सामाजिक संगठनो द्वारा श्रृद्धांजलि अर्पित की जायेगी। इससे पूर्व भीम के ही एक जवान शहीद नारायण सिंह परतो का चौडा थानेटा 30 अक्टुबर 2000 को उदमपुरा कम्पाउण्ट जम्मू कष्मीर में शहीद हुआ था। मगरा क्षेत्र के तीन हजार सैनिक है देष की सेवा में जुटे - वर्तमान सालो में यह दूसरा सैनिका शहीद हुआ हैं एवं सम्पूर्ण राजस्थान में शहीद निम्ब सिंह शहीद हुआ है। उक्त मगरा क्षेत्र में करीब तीन हजार से अधिक सैनिक देष की सेवा के लिये कार्यरत है। मगरा क्षेत्र के भीम, ब्यावर, देवगढ, दिवेर और आसपास का क्षेत्र मगरा क्षेत्र में आता है। इस क्षेत्र के युवाओ में देष की सेवा का जज्बा है। आज होगा शहीद का अंतिम संस्कार - तहसीलदार सांवरलाल जाट दोपहर 1 बजे शहीद के बडे भाई रासू सिंह एवं छोटे भाई प्रभु सिंह को सरकारी वाहन में बिठाकर उदयपुर डबोक एयरपोर्ट ले गये जहॉ से सोमवार सांय 4 बजे शहीद के पार्थिव देह को भीम के लिये रवाना हुए । इस दौरान उदयपुर सैनिक बोर्ड के कमाण्डर एवं सेना की टुकडी के जवान भी भीम के लिये साथ में रवाना हुए जहॉं मंगलवार को शहीद के पैतृक गॉंव राजवा में गॉर्ड ऑफ आर्नर के साथ अत्येष्टि की जायेगी।

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