जालोर में इस बार कांग्रेस एवं भाजपा में सीधी टक्कर

जागरूक टाइम्स 1029 Apr 25, 2019

रानीवाड़ा। लोकसभा के चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, वैसे प्रत्याशियों के दिलों की धड़कन तेज होने के साथ तपती धूप में भी ऐडी से चोटी तक दमखम लगाकर मतदाताओं को रिझाने में लगे हुए है। जालोर संसदीय क्षेत्र में अब तक हुए सोलह लोकसभा चुनावों में आठ बार कांग्रेस के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है जबकि चार बार भाजपा एवं एक बार स्वतंत्र पार्टी, एक बार जनता पार्टी और दो बार निर्दलीयों ने बाजी मारी। जालोर संसदीय क्षेत्र में इस बार भाजपा एवं कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है। जालोर-सिरोही लोकसभा के कांग्रेस और भाजपा दोनों प्रमुख पार्टियों के प्रत्याशी रोजाना दर्जनों गांवों का दौरा कर अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहें है। दोनों प्रमुख पार्टियों के प्रत्याशी अपनी जीत के लिए हर तरह के प्रयास कर रहे है। जगह-जगह नुक्कड़ सभाएं व जनसम्पर्क सभाएं कर रहे है। दोनों का प्रचार जोर-शोर से चल रहा है, दोनों पार्टियों द्वारा जालोर-सिरोही की जनता को लुभाने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। गांवों की चौपालों पर भाजपा प्रत्याशी देवजी पटेल की बजाय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुनावी चकलम ज्यादा है, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी रतन देवासी के रानीवाड़ा में विधायक रहते उनके द्वारा करवाये गए विकास कार्यों की चर्चा चल रही है। जालोर संसदीय क्षेत्र में लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी देवजी पटेल एवं कांग्रेस प्रत्याशी रतन देवासी के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना है।

राज्य में लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण 29 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए जालोर से इन दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के अलावा 13 उम्मीदवार भी मैदान में है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवारों में सीधा मुकाबला होने के आसार है। भाजपा से देवजी पटेल दो बार जीते हुए है, तो कांग्रेस से रतन देवासी जालोर जिले की रानीवाड़ा विधानसभा सीट से एक बार विधायक रह चुके है, लेकिन गत चुनावों में वे हार गए थे और इस बार कांग्रेस ने रतन देवासी को बतौर लोकसभा प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा है। रतन देवासी को जातिगत फायदा मिल सकता है, उनका मुकाबला भाजपा से दो बार सांसद रहे देवजी पटेल से होगा। अन्य दलों के प्रत्याशियों के इन दोनों दलों को कड़ी चुनौती पेश करने की संभावना कम लग रही है, ऐसे में इस सीट पर भाजपा एवं कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला होने के आसार बनते जा रहे है। इस बार मोदी लहर का असर भी कम देखने को मिल रहा है, तो कहीं लोग पार्टी एवं चेहरा नहीं देख रहे हैं, मोदी के नाम पर वोट करने की बात भी कर रहे है। ऐसे में स्थानीय मुद्दे गौंण नजर आ रहे हैं।

जालोर संसदीय सीट का इतिहास - जालोर संसदीय क्षेत्र में अब तक हुए सोलह लोकसभा चुनावों में आठ बार कांग्रेस के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है जबकि चार बार भाजपा एवं एक बार स्वतंत्र पार्टी, एक बार जनता पार्टी और दो बार निर्दलीयों ने बाजी मारी। 1952 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भवानीसिंह जीते, इसके बाद 1957 में कांग्रेस से दामनी सूरज रतन, 1962 में कांग्रेस से हरीश चन्द्र, 1967 में स्वतंत्र पार्टी से डी पाटोदिया, 1971 में कांग्रेस से कुमार सिंघी, 1977 में जनता पार्टी से हुकमाराम, 1980 में कांग्रेस से वीरदाराम, 1984 में कांग्रेस से बूटासिंह, 1989 में भाजपा से कैलाश मेघवाल, 1991 में कांग्रेस से बूटासिंह, 1996 में कांग्रेस से पारसाराम मेघवाल, 1998 में बतौर निर्दलीय बूटासिंह, 1999 में कांग्रेस से बूटासिंह, 2004 में भाजपा बंगारू सुशीला, 2009 व 2014 में भाजपा से देवजी पटेल ने जीत दर्ज की।

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के कारण यह सीट कांग्रेस का गढ़ रहा। पूर्व केन्द्रीय मंत्री और पूर्व राज्यपाल बूटा सिंह ने जालोर लोकसभा का चार बार प्रतिनिधित्व किया, बूटासिंह के वर्चस्व को तोडऩे के लिए भाजपा के पास उनके कद का कोई बड़ा दलित नेता नहीं था, लिहाजा 1999 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने दक्षिण भारत से भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को दलित चेहरे के तौर पर बूटासिंह के खिलाफ खड़ा किया, लेकिन बंगारू लक्ष्मण यह चुनाव हार गए, इसके बाद 2004 के लोकसभा चुनाव में बंगारू लक्ष्मण की पत्नी सुशीला बंगारू को जालौर में बीजेपी का उम्मीदवार बनाया गया, इस चुनाव में सुशीला बंगारू बूटासिंह को हराते हुए जालोर की पहली महिला सांसद बनी। वहीं पिछले तीन बार से जालोर सीट पर लगातार बीजेपी का कब्जा है, बीजेपी के देवजी पटेल यहां से लगातार दो बार के सांसद हैं।

आठ सीटों में से छ: भाजपा के कब्जे में - जालोर लोकसभा क्षेत्र संख्या-8 जालोर और सिरोही संसदीय सीट के अंतर्गत आने वाली विधानसभा की 8 सीटों में से 6 सीटों पर चौधरी एवं देवासी जाति का खासा प्रभाव रहता है, इसके बाद अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के वोट भी निर्णायक माने जाते हैं। इस बार लोकसभा चुनाव के आंकड़ो के मुताबिक जालोर संसदीय सीट पर मतदाताओं की संख्या 20 लाख 71 हजार 245 है, जिसमे जालोर जिले में 13 लाख 38 हजार 833 मतदाता एवं सिरोही जिले में 7 लाख 32 हजार 412 मतदाता शामिल है। जालोर लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की आठ सीटें आती हैं, जिसमें जालोर जिले की पांच और सिरोही जिले की तीन विधानसभा शामिल हैं, हाल में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इन आठ विधानसभाओं में से छ: सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि एक सीट पर कांग्रेस और एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीता।

कांग्रेस व भाजपा ने खेला जातीय फैक्टर - जालोर सिरोही लोकसभा सीट वर्ष 2009 में परिसीमन के बाद सामान्य हो गई। इस संसदीय क्षेत्र में चौधरी एवं देवासी जाति का खासा प्रभाव रहता है, इस बार कांग्रेस एवं भाजपा ने दोनों समाजों के नेताओं को टिकट देकर जातीय फैक्टर खेला है। इससे वोटों के धुर्वीकरण को रोकने के लिए दोनों दलों की ओर से जी तोड़ मेहनत की जा रही है। एक समय में यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी, उस समय यहां कांग्रेस का दबदबा रहा था, लेकिन पिछले तीन चुनावों में भाजपा का कब्जा है। ऐसे में कांग्रेस ने इस सीट को हथियाने के लिए देवासी जाति के रतन देवासी को मैदान में उतारा है।

इस बार देवासी समाज का झुकाव कांग्रेस की ओर - इस बार देवासी समाज का झुकाव कांग्रेस की ओर साफ तौर पर देखा जा रहा है, जिससे कांग्रेस खेमें में नवीन उत्साह नजर आ रहा है। इससे पूर्व दोनों जिलों में रानीवाड़ा को छोड़कर देवासी समाज का झुकाव भाजपा की ओर रहा है, लेकिन अबकी बार कांग्रेस से रतन देवासी के पहली बार लोकसभा का चुनाव लडऩे के कारण देवासी समाज कर झुकाव कांग्रेस की तरफ है। वहीं देवासी की सभाओं में उमड़ रही भारी भीड़ उनकी जीत निश्चित करती दिखाई दे रही है। देवासी समाज के करीबन दो लाख से अधिक वोटों का भाजपा छोड़कर कांग्रेस में जाना भाजपा के लिए जोर का झटका माना जा रहा है। इन वोटों की भरपाई करना भाजपा के लिए ना मुमकीन सा लग रहा है। वहीं विजयश्री पुरोहित का शिवसेना के बैनर तले चुनाव लडऩा भी भाजपा के लिए मुसीबत बनती जा रही है।

2014 का जनादेश - साल 2014 के लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करते हुए बीजेपी के देवजी पटेल ने कांग्रेस उम्मीदवार उदयलाल आंजना को हराया, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर कांग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता बूटासिंह तीसरे स्थान पर रहें, इस चुनाव में बीजेपी के देवजी पटेल को 5 लाख 80 हजार 508 कांग्रेस के उदयलाल आंजना को 1 लाख 99 हजार 363 और बूटा सिंह को 1 लाख 75 हजार 344 वोट मिले थे।


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