भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बनाने पर यह बोले कालवी ...

जागरूक टाइम्स 1739 Jul 1, 2018

सिरोही। श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय संयोजक लोकेन्द्रसिंह कालवी ने कहा कि अभी तो नाराज होने का अधिकार नहीं है तो देखने का अधिकार है। हम तो देख रहे है और देख भी लेंगे। वे रविवार को जिला मुख्यालय स्थित सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकारों की बातचीत में बोल रहे थे। वे सिरोही में सितम्बर महीने में चितौडगढ़ में आयोजित होने वाले राष्ट्रव्यापी सर्व समाज सम्मेलन को लेकर आए थे। उन्होंने प्रदेश में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के सवाल पर कहा कि पार्टी का क्षेत्राधिकार है, हमारे क्षेत्राधिकार से बाहर है। भाजपा में पार्टी का प्रदेशाध्यक्ष कौन हो। यह हम तय नहीं कर सकते, करणी सेना का अध्यक्ष तो तैयार कर सकता हूं। सोच समझकर बनाया होगा, इसमें मुझे कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इस बात की दिक्कत है कि गजेन्द्रसिंह शेखावत क्यूं नहीं बना। जिसका नाम चल रहा था, चर्चा भी खूब चल रही थी। सिर्फ इसलिए कि वो फलां-फलां जाति नाराज हो जाएगी। उसके नहीं बनने से राजपूत तो नाराज होगा ही नहीं क्यूंकि राजपूत के पास तो नाराज होने का अधिकार ही नहीं है। थोड़ा सा नाराज होकर अभी दिखाया था। अजमेर और अलवर चुनाव में राजस्थान में पहली बार कोई भी सरकार जो सत्ता में है वो पहली बार चुनाव हारी। अभी तो नाराज होने का अधिकार नहीं है तो देखने का ही अधिकार है तो हम देख ही लेंगे। इस मौके पर करणी सेना जिलाध्यक्ष नारायणसिंह देवड़ा, एडवोकेट विरेन्द्रसिंह चौहान, उपाध्यक्ष इन्दरसिंह देवड़ा बनास, राजेन्द्रसिंह जाखोड़ा, राजेन्द्रसिंह मूंडी, भंवरसिंह जाखोड़ा, महिपालसिंह कलापुरा, पूरणसिंह देवड़ा बागसीन, बहादुरसिंह देवड़ा अंदौर, राजेन्द्रसिंह काकेन्द्रा, गणपतसिंह समेत कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित थे।

मजबूत होना चाह रहे और मजबूरी भी पैदा करेंगे
राष्ट्रीय संयोजक कालवी ने बताया कि बारह साल बाद चित्तौडग़ढ़ में आजाद भारत का क्षत्रियों का सबसे बड़ा सम्मेलन २३ सितम्बर होगा। सम्मेलन में भिन्न-भिन्न सामाजिक मुद्दों पर चर्चा होगी। साथ ही पद्मावत मामले, आरक्षण समेत विभिन्न मुद्दों पर समीक्षा की जाएगी। अगर किसी को समझाना हो तो या उसके लिए मजबूरी पैदा करो या मजबूती पैदा करो। हम मजबूत होना चाह रहे है और मजबूरी भी पैदा करने की कोशिश करेंगे। इतिहास का विखंडन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पत्रकारों से कहा कि करणी सेना अपनी स्थापना तिथि 23 सितम्बर को चित्तौडग़ढ़ दुर्ग से आरक्षण समीक्षा के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन का आगाज करेगी। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में राजनीतिक संगठनों को छोड़ सभी सामाजिक संगठनों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में आरक्षित वर्ग के संगठनों से भी बात कर उन्हें समझाया जाएगा कि आज तक जातीय आरक्षण से गरीब व जरूरतमंद के हित नहीं सधे हैं। ऐसे में संघ की अवधारणा के मुताबिक आरक्षण की समीक्षा की जानी चाहिए।
अब समय आ गया, आरक्षण का लाभ किसे मिले इसकी समीक्षा जरूरी
उन्होंने कहा कि आरक्षण समाप्त नहीं किया जा सकता है, लेकिन अब समय आ गया है कि इसका लाभ किसे मिले इसकी समीक्षा की जानी जरूरी है। उन्होंने खुलासा किया कि आरक्षण की समीक्षा के लिए गत एक साल से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मोहन भागवत सहित संघ के शीर्ष नेता एमजी वैद्य व दत्तात्रेय होंसबोले उनके सम्पर्क में है और संभव है कि यहां से आंदोलन के आगाज के समय 23 सितम्बर को इन तीनों में से कोई एक यहां मौजूद हो। एक सवाल के जवाब में कालवी ने कहा कि यह सही है कि पूर्व में राजपूत समाज के लिए जातीय आरक्षण की मांग की थी, लेकिन अब हम संघ के मोहन भागवत द्वारा दिए उस बयान से सहमत हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि आरक्षण किसे मिले इसकी समीक्षा की जानी चाहिए और इसका लाभ गरीब व जरूरतमंद को मिलना चाहिए।


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