जबरन भगा कर ले जाने व आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी को दस वर्ष का कठोर कारावास

जागरूक टाइम्स 159 Feb 12, 2019

आबूरोड। अपर जिला एवं सेशन न्यायालय क्रमांक-दो ने युवती को जबरन भगाकर ले जाने व उसे आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले के आरोपी को दस वर्ष के कठोर कारावास व पांच हजार अर्थदंड से दंडित करने के आदेश दिए।
प्रकरणानुसार चित्तौडग़ढ़ जिले के राजगढ़ थाना परसोली निवासी शिव सिंह पुत्र टॅवरसिंह राजपूत ने 22 अप्रेल 2015 में राजगढ़ पुलिस थाना परसोली ने घटनास्थल पर एक रिपोर्ट पेश की कि उसकी बहन मैना कुंवर (20) आज से करीब एक साल पहले उनके गांव का इंद्रकुमार कुमावत जबरन बहला-फुसलाकर भगाकर शादी के लिए ले गया था।

जिसको ढूंढकर हम वापस लाए थे। उसकी शादी किटाब गांव में करीब 11 महीने पहले करा दी थी। इसके छह महीने बाद इंद्र कुमार 19 सितम्बर को मैना कुंवर वापस ससुराल जा रही थी। इसके व इसके भाई ने धमकी देकर बाला कि मैरे साथ नहीं चलेगी तो तेरे परिवार को जान से खत्म कर दूंगा। इसलिए वापस इसके साथ आ गई। यह बात मुझे फोन पर बताइ। उसकी बहन को इंद्र परेशान करता था। कल शाम को उसकी बहन ने फोन पर बताया कि उसे इंद्र परेशान व मारपीट करता है। मैं आपके पास आना चाहती हूं।

इंद्र को पुलिस मेरे साथ झगड़ा करते हुए पकड़ कर ले गई। मैं अपने किराए के देवीसिंह माच गांव के मकान कमरे पर जा रही हूं। जिस पर मैं अपने काका तेज सिंह के साथ उसके गांव से रवाना हुआ। सुबह करीब छह बजे उसके मकान पर पहुंचा। जहां उसकी बहन मैना कुंवर इसके किराए के कमरे में पंखे से चुन्नी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस भी मौके पर पहुंची। जहां देखा कि मेरी बहन ने आत्महत्या कर ली है।

मेरी बहन ने उसकी डायरी के एक पत्ते पर इंद्र द्वारा परेशान करने से आत्महत्या करने व इसका जिम्मेदार इंद्र व उसके परिवार को लिखा है। इंद्र कुमावत ने मेरी शादीशुदा बहन मैना कुंवर को धमकी देकर जबरन भगा कर ले गया। जबरन शारीरिक संबंध बनाए। परेशान व मारपीट की। जिससे उसने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 366, 376, 306 दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया।

अनुसंधान के दौरान तत्कालीन उपाधीक्षक श्रीमती प्रीति काकांणी ने घटनास्थल का मौका निरीक्षण किया। परिवादी शिवसिंह व गवाह तेजसिंह से अनुसंधान पर कथन लिए। प्रकरण में मृतका के विवाद के सात साल के भीतर उसके द्वारा आत्महत्या की है। इंद्र कुमार पुत्र गोपाल कुमावत द्वारा विवाहित स्त्री का अपहरण करने, उसका लेंगिक शोषण करने, मारपीट करने से तंग आकर उसने फांसी खाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 306, 366, 376, 497 व 498 का अपराध साबित पाया। इस पर इंद कुमार को गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया गया।

जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। पुलिसने प्ररकण में आरोपी इंद्र कुमार पुत्र गोपाल कुमावत निवासी राजगढ़ सिंघाड़ी, पुलिस थाना परसोली जिला चित्तौडग़ढ़ के विरुद्ध अपराध प्रमाणित पाया। न्यायालय में चार्जशीट पेश की गई। अपर लोक अभियोजक धर्मेंद्र राजपुरोहित ने मामले से जुड़े दस्तावेज व तर्क दिए। आरोपी को कठोर सजा देने की मांग की। अपर जिला सेशन न्यायाधीश क्रमांक-दो दलपतसिंह राजपुरोहित ने मामले से जुड़ी पत्रावलियों का अवलोकन किया। अपर लोक अभियोजक के तर्कों से सहमति जताई। आरोपी इंद्र कुमार कुमावत को दस साल के कठोर कारावास व पांच हजार के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर दो माह के अतिरिक्त कारावास भुगतने की सजा सुनाई।

बहन को लिखा पत्र
मृतका ने उसकी बहन माया को आत्महत्या करने से चार दिन पूर्ण पत्र लिखा। पत्र में उसकी पीड़ा व्यक्त की। साथ ही भावानात्मक पत्र परिवारजनों से माफी मांगी। मृतका द्वारा भेजा गया पत्र उसकी बहन को उसकी मौत के बाद मिला।




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