सुमेरपुर पहुंचकर किया था कीमती जेवरात बंटवारा, सभी आरोपी पुलिस रिमांड पर

जागरूक टाइम्स 370 Jul 15, 2019

सिरोही। पिंडवाड़ा-सरूपगंज के बीच चेतना होटल पर गत 21 जून की रात गुजरात रोडवेज की बस में सफर कर रहे कोरियर सर्विस के कारिंदे का करीब 83 लाख रुपए मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात भरा बैग लूटकर ले जाने की वारदात में लिप्त सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद रविवार को न्यायालय में पेश किया गया।जहां से तमाम छह आरोपियों को 20 जुलाई तक न्यायालय ने पुलिस रिमांड पर सौंप दिया। आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है। सरूपगंज एसएचओ शिवराजसिंह भाटी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी पाली जिलांतर्गत तखतगढ़ थाने के हिंगला गांव निवासी राजूसिंह पुत्र जेठूसिंह, बाड़मेर जिलांतर्गत सिवाणा थाने के सिनेर निवासी राजूसिंह पुत्र छैलसिंह, शिवगंज थाने के जोयला निवासी संजयसिंह पुत्र नरपतसिंह, जालोर जिलांतर्गत आहोर थाने के जोगावा निवासी श्रवणसिंह पुत्र शंभूसिंह, सुमेरपुर थाने के अणगौर निवासी सुखदेव पुत्र रामसिंह व तखतगढ़ थाने के हिंगोर निवासी रतनलाल पुत्र मांगीलाल को रविवार को न्यायालय में पेश कर 20 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। सभी आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है।

अहमदाबाद की कोरियर सर्विस का था बैग
ज्ञातव्य है कि गत 21 जून को अहमदाबाद स्थित कोरियर सर्विस का कर्मचारी भलाराम प्रजापत कोरियर का बैग लेकर अहमदाबाद ऑफिस से पाली के लिए रवाना हुआ। गुजरात रोडवेज की अहमदाबाद-रणकपुर बस में सवार हुआ। रात करीब एक-डेढ़ बजे बस पिंडवाड़ा-आबूरोड मार्ग पर धनारी स्थित चेतना होटल आकर चाय-नाश्ते के लिए रुकी। भलाराम व उसका साथी किशन भी अन्य यात्रियों के साथ चाय-पानी के लिए बस से उतरे और बाद में फिर से बस में सवार हो गए। भलाराम का कोरियर का थैला अपनी सीट के आगे रखा हुआ था। उस दौरान लाल रंग की टी शर्ट व जींस पहने एक युवक बस में सवार होकर उसके पास आया और कोरियर के सामान का बैग झपटा तो भलाराम ने उसे पकडऩे की कोशिश की पर नाकामयाब रहा। इस बीच वह युवक स्पीड के साथ नीचे उतरकर बस के पास खड़ी सफेद रंग की स्वीफ्ट कार में सवार हो गया और कार सरूपगंज की तरफ भाग निकली। बैग में करीब 83 लाख रुपए मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात थे, जो लूट की इस वारदात में चले गए।

वारदात की सूचना मिलते ही एएसपी नारायणसिंह राजपुरोहित के निर्देश पर माउंट सीओ प्रवीण कुमार तत्काल मौके पर पहुंचे। मौका मुआयना कर वारदात के बारे में जानकारी जुटाई। फिर सरूपगंज एसएचओ को आवश्यक दिशा-निर्देश देकर सिरोही की एमओबी टीम को मौके पर बुलाया और जरूरी सबूत जुटाए। जिला साइबर सेल को भी खुफिया तौर पर मामले में तहकीकात कर वारदात का पर्दाफाश करने का लक्ष्य दिया गया। जिला साइबर सेल व वारदात का पर्दाफाश करने के लिए गठित पुलिस टीम आरोपियों का सुराग लगाकर उन्हें दबोचने की फिराक में लग गए। उधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी कल्याणमल मीणा भी मामले में जांच प्रगति की नियमित रूप से मॉनिटरिंग करने लगे। समय-समय पर दिशा-निर्देश भी देते रहे। एएसपी नारायणसिंह राजपुरोहित व माउंट सीओ प्रवीण कुमार की अगुवाई में सरूपगंज एसएचओ शिवराजसिंह भाटी ने भारी मशक्कत से कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए वारदात में लिप्त सभी छह आरोपियों को एक साथ दबोचने में कामयाबी हासिल कर ली।

* पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत करने की घोषणा की शुरुआत
लूट की इस वारदात का पर्दाफाश करने में कामयाबी हासिल करने वाली पुलिस टीम में शामिल सरूपगंज एसएचओ शिवराजसिंह भाटी, हैड कांस्टेबल सुरेशदान, सिरोही साइबर सेल के हैड कांस्टेबल भवानीसिंह, सरूपगंज थाने के कांस्टेबल श्रवण, बजरंगलाल व हनुमान को सिरोही एसपी कल्याणमल मीणा ने नगद पुरस्कार से पुरस्कृत करने की घोषणा की है।

* सुमेरपुर पहुंचकर बांटे जेवरात
वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी सुमेरपुर पहुंचे। वहां कोरियर सर्विस के बैग में जीपीएस डिवाइस लगी होने के खौफ से वह बैग खाली कर फेंक दिया और उसमें रखे जेवरात दूसरे बैग में डाल दिए। बाद में लूटे गए जेवरात का सात हिस्सों में बंटवारा किया गया और सभी आरोपी अपना-अपना हिस्सा लेकर अलग-अलग स्थानों पर चले गए ताकि पुलिस की पकड़ में न आ सकें। उधर, जिला पुलिस अधीक्षक कल्याणमल मीणा के क्लोज सुपरविजन में जांच लगातार आगे बढ़ रही थी और सरूपगंज एसएचओ अलग-अलग स्थानों पर रैकी कर साक्ष्य जुटाने में मुस्तैदी से जुटे हुए थे। आवश्यक साक्ष्य जुटाने के बाद सभी आरोपियों को नामजद कर गिरफ्तार कर लिया गया।

* ऐसे की लूट की प्लानिंग
पुलिस ने बताया कि राजूसिंह पुत्र जेठूसिंह अहमदाबाद की कोरियर फर्म में काम करता था और वारदात के करीब दो माह पूर्व ही नौकरी छोड़कर घर आ गया था। घर आने से बाद लूट की वारदात को अंजाम देने की योजना बनाकर रतनलाल से बात की और उसे गिरोह तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी। रतनलाल ने गिरफ्तार सभी आरोपियों से बातचीत कर गिरोह तैयार कर लिया। गिरोह के सदस्यों ने मिलकर तीन दिन तक वारदात को अंजाम देने का अभ्यास किया। साथ ही रैकी व पैट्रोलिंग भी करते रहे। अंतत: गत 21 जून को वारदात को अंजाम दे ही दिया।

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