काम्बेश्वर धाम पर कार्तिक मेले में उमड़ी आस्था

जागरूक टाइम्स 132 Nov 12, 2019

- काम्बेश्वर महादेव का भव्य लक्खी मेला आयोजित, मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने की शिरकत

शिवगंज १२ नवम्बर (नि.सं.)। शहर के समीपवर्ती व उपखंड मुख्यालय से करीब १५ किलोमीटर दूर अरावली की पहाडिय़ों में स्थित प्राचीन काम्बेश्वर महादेव तीर्थधाम पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कार्तिक पूर्णिमा पर मंगलवार को विशाल लक्खी मेले का आयोजन हुआ। मेले में सिरोही, पाली एवं जालोर जिलों सहित दूरदराज के स्थानों से आए हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में धोक लगाकर खुशहाली की कामनाएं की। मेले में धर्म एवं अध्यात्म का अनुठा संगम दिखाई दिया।

प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी काम्बेश्वर सेवा मंडल ट्रस्ट की ओर से आयोजित लक्खी मेले को लेकर नागरिकों में काफी उत्साह नजर आया। इस मेले में सिरोही, पाली एवं जालोर जिलों सहित दूरदराज के स्थानों पर निवास करने वाले प्रवासी राजस्थानियों ने श्रद्धा और आस्था के साथ भाग लिया। भारी संख्या में मेलार्थियों के आगम को लेकर काम्बेश्वर सेवा मंडल के मंत्री छगन गेहलोत, भबूतमल माली, महेश अग्रवाल, प्रकाश माली सहित कई सदस्यों की ओर से व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई थी। मेला स्थल पर शिवद्वार से लेकर मंदिर की सीढिय़ों तक अस्थाई हाट बाजार सजाया गया था, जहां श्रद्धालुओं ने जमकर खरीददारी की। वहीं खानपान के स्टॉलों पर अच्छी खासी भीड़ देखी गई। मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड की वजह से शिवद्वार से मंदिर की सीढिय़ों तक जहां देखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई दे रही थी।

दर्शनार्थियों का लगा रहा तांता
अरावली की पहाड़ी के बीच स्थित भगवान शिव के इस प्राचीन धाम पर कार्तिक पूर्णिमा मंगलवार के दिन दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु करीब साढ़े तीन सौ से अधिक सीढिय़ां चढ़कर मंदिर प्रांगण में पहुंचे। यहां दर्शनार्थियों की भारी भीड़ होने की वजह से उन्हें घटों कतार में खड़े रहकर अपने आराध्य के दर्शन के इंतजार में खड़ा रहना पड़ा। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ता व्यवस्थाओं को बनाए रखने में सहयोग प्रदान कर रहे थे। वहीं दर्शनार्थियों को दर्शन करने में किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो इसके लिए ट्रस्ट मंडल की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए थे।

फिर हुआ परंपरा का निर्वहन
काम्बेश्वर धाम पर आयोजित वार्षिक लक्खी मेले में विशेष रूप से रेबारी समुदाय के लोगो ने भारी संख्या में भाग लिया। ये लोग अपने परंपरागत परिधानों में सजधज कर मंदिर स्थल पहुंचे और मंदिर में भगवान भोलेनाथ को धोक लगाई। समाज की महिलाएं मंगल गीत गाती हुई मंदिर पहुंची। मेले के दौरान कई समाज के लोगों ने जिनके घर में विवाह अथवा पुत्र की प्राप्ति होने के बाद भगवान के मंदिर में धोक देने की परंपरा का भी निर्वहन किया।




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