राजस्थान में गहलोत से हार रहा कोरोना

जागरूक टाइम्स 309 Jul 6, 2020

-निरंजन परिहार/जागरूक टाइम्स

जयपुर। अशोक गहलोत कोरोना को हरानेवाले मुख्यमंत्री साबित हो रहे हैं। राजस्थान में कोरोना अपने मुश्किल मुकाम पर है। संक्रमण अटक गया है। दूसरे प्रदेशों की तरह मौतों का आंकड़ा भी बढ़ नहीं पा रहा है। देश के कई राज्यों में कोरोना ने कोहराम मचा रखा है, लेकिन राजस्थान में कोरोना हारता जा रहा हैं। टेस्ट बढ़ रहे है और रिकवरी रेट में राजस्थान कोरोना प्रभावित राज्यों में सबसे आगे निकल गया है। दुनिया के अब तक के इस सबसे बड़े संकटकाल में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक बार फिर अपनी प्रशासनिक प्रखरता की वजह से अव्वल रहे हैं।अब तक भीलवाड़ा मॉडल था, पर अब राजस्थान मॉडल देश में धूम मचा रहा है। कोरोना महासंकट में मुख्यमंत्री गहलोत ने अपनी सख्त फैसले लेने की क्षमताओं और लिए हुए फैसलों को पूरी क्षमता से प्रस्थापित करने की ताकत को साबित किया है। कोरोना नियंत्रण की दिशा में मुख्यमंत्री गहलोत ने जो गंभीर कोशिशें की है, यह उसी का प्रताप है कि महाराष्ट्र जैसे विकसित प्रदेश के मुकाबले राजस्थान बहुत आगे निकल गया हैं।

महाराष्ट्र में कोरोना के कुल 2 लाख बीमारों में से 1 लाख से ज्यादा एक्टिव केस हैं, जबकि राजस्थान में कुल 19 हजार मरीजों में फिलहाल केवल 3307 केस ही एक्टिव है। मौतों के मामले में भी राजस्थान की तस्वीर अन्य राज्यों के मुकाबले बहुत सराहनीय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोद ी इस मामले में मुख्यमंत्री गहलोत की तारीफ कर ही चुके हैं, अब देश के कई अन्य प्रदेशों की सरकारें भी कोरोना रोकने के मामले में राजस्थान सरकार की कोशिशों का अनुसरण करने लगी हैं।

यह मुख्यमंत्री गहलोत की दूरदर्शिता का सबसे बड़ा कमाल यह है कि देश में राजस्थान एकमात्र प्रदेश बन गया है जहां कोरोना से बचाव के लिए हर गांव गली तक जन जागरण अभियान चलाया जा रहा है। यह गहलोत की कोशिशों का कमाल है कि वे प्रदेश में सख्त कोशिशों के जरिए कोरोना मरीजों के ठीक होने की दर 80 फीसदी से भी आगे तक ले गए हैं। गहलोत के प्रयास शुरू से ही इतने कसे हुए रहे कि राजस्थान में कोरोना जिस तेजी से पसर सकता था, उतनी तेजी पकड़ ही नहीं पाया और कोरोना की वजह से होने वाली मौतों का सिलसिला भी लगभग थम सा गया है। यही वजह है कि कोरोना के मामले में अब पूरी दुनिया में राजस्थान मॉडल की चर्चा होने लगी है। राजस्थान के रिकवरी रेट और मौतों के अत्यंत ही कम रेट को देखते हुए कुछ अन्य देशों से लोग भी राजस्थान सरकार से संपर्क कर रहे हैं, यह सुखद संकेत हैं।

कोरोना पर राजस्थान की जीत के मामले को थोड़ा गहराई से देखें, तो सबसे प्रमुख बात यही है कि राजस्थान ने दूसरे राज्यों की अच्छी प्रैक्टिस को खुले दिल से अपनाया और प्रदेश में कोरोना की ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग की गई। तमिलनाडु से पता चला कि रात में कोरोना मरीजों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है उसके बाद राजस्थान में कोरोना मरीजों पर रात में फोकस करना शुरू किया। देश में आबादी के हिसाब से राजस्थान देश में कोरोना टेस्ट के मामले में नंबर वन है, जहां 1 दिन में 30 हजार कोरोना वायरस की जांच की तैयारी है। प्रदेश में कोरोना मौतों को रोकने में ऑपरेशन लीजा का भी बड़ा सहयोग रहा। जिसके तहत आयुष्मान भारत योजना में बुजुर्गों और बीमारों की जानकारी लेकर उनको खुद के घर में ही क्वॉरंटीन करके संक्रमण को फैलने से रोका गया। सबसे पहले सरकार ने अपने शराब कारखानों को बंद कर वहां सैनिटाइजर का उतापादन शुरू किया, और जेलों में भी सैनिटाइजर वर मास्क बनाए जाने लगे। प्रदेश में इंटेंसिव ट्रेसिंग और अधिकाधिक टेस्टिंग की वजह से भी मरीज जल्दी ठीक हो रहे हैं।

इसके साथ ही राजस्थान देश का पहला राज्य है, जहां कोरोना मरीजों मौत की आडिटिंग हो रही है। मरीज को अस्पताल में आने में देरी, पहले से ही गंभीर बीमारी की हिस्ट्री या ऑक्सीजन मिलने में देरी की डिटेलिंग हो रही है, ताकि मौत का कारण सामने आ सके। कोरोना के काबू में आने की एक वजह वहां की रुथलेस कंटेनमेंट प्रक्रिया भी है। जिसके तहत कोरोना को दूसरे इलाके में फैलने से रोकने के लिए कंटेनमेंट वाले पूरे इलाके की सैंपलिंग की जा रही है। राजस्थान में कोरोना मरीजों के तेजी से ठीक होने की एक बड़ी वजह अस्पतालों की बेहतर सुविधाएं एवं तुरंत उपचार भी प्रमुख है। लोग कानून न तोड़ें और क्वारनटीन फैसिलिटी में रहें, इसके लिए सरकार की ओर से स्थानीय प्रशासन को हमेशा एक्शन में रखकर कोरोना मरीजों की सुविधा का पूरा खयाल रखा जा रहा है। गहलोत मानते हैं कि स्थानीय प्रसासन चुस्त है, इसी कारण यह जंग जीतने में वे सफलता की तरफ बढ़ रहे हैं।

तस्वीर साफ है कि कोरोना के बारे में राजस्थान सरकार के मुखिया के रूप में गहलोत शुरू से ही देश की सरकार से भी ज्यादा सजग व सक्रिय दिखे। देश के किसी भी राज्य के मुकाबले गहलोत ने ही सबसे पहले कोरोना के खिलाफ बड़ी जंग की शुरूआत की। सच तो यह है कि कोरोना संकट से निपटने के लिए फैसले लेने के मामले में मुख्यमंत्री गहलोत देश के प्रधानमंत्री मोदी से भी ज्यादा तेज साबित हुए हैं, क्योंकि इस संकट से बचाव के राष्ट्रीय स्तर पर जो प्रयास हुए, उससे पहले ही वे सारे प्रयास गहलोत राजस्थान में लागू कर चुकी थी। वैसे भी, बीमारियों का अपना कोई घर नहीं होता कि वे कहीं जाकर डेरा ही जमा लें। उनकी पूंछ मरोड़कर खदेड़ दो, तो वे चारों खाने चित भी हो जाती हैं। ठीक वैसे ही जैसे राजस्थान में कोरोना संक्रमण आगे सरक ही नहीं पा रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना की रफ्तार को रोककर उसे खत्म होने को मजबूर कर रखा है।

अब तक भीलवाड़ा मॉडल था, पर अब राजस्थान मॉडल देश में धूम मचा रहा है। कोरोना महासंकट में मुख्यमंत्री गहलोत ने अपनी सख्त फैसले लेने की क्षमताओं और लिए हुए फैसलों को पूरी क्षमता से प्रस्थापित करने की ताकत को साबित किया है। कोरोना नियंत्रण की दिशा में मुख्यमंत्री गहलोत ने जो गंभीर कोशिशें की है, यह उसी का प्रताप है कि महाराष्ट्र जैसे विकसित प्रदेश के मुकाबले राजस्थान बहुत आगे निकल गया हैं। महाराष्ट्र में कोरोना के कुल 2 लाख बीमारों में से 1 लाख से ज्यादा एक्टिव केस हैं, जबकि राजस्थान में कुल 19 हजार मरीजों में फिलहाल केवल 3307 केस ही एक्टिव है। मौतों के मामले में भी राजस्थान की तस्वीर अन्य राज्यों के मुकाबले बहुत सराहनीय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोद ी इस मामले में मुख्यमंत्री गहलोत की तारीफ कर ही चुके हैं, अब देश के कई अन्य प्रदेशों की सरकारें भी कोरोना रोकने के मामले में राजस्थान सरकार की कोशिशों का अनुसरण करने लगी हैं।

यह मुख्यमंत्री गहलोत की दूरदर्शिता का सबसे बड़ा कमाल यह है कि देश में राजस्थान एकमात्र प्रदेश बन गया है जहां कोरोना से बचाव के लिए हर गांव गली तक जन जागरण अभियान चलाया जा रहा है। यह गहलोत की कोशिशों का कमाल है कि वे प्रदेश में सख्त कोशिशों के जरिए कोरोना मरीजों के ठीक होने की दर 80 फीसदी से भी आगे तक ले गए हैं। गहलोत के प्रयास शुरू से ही इतने कसे हुए रहे कि राजस्थान में कोरोना जिस तेजी से पसर सकता था, उतनी तेजी पकड़ ही नहीं पाया और कोरोना की वजह से होने वाली मौतों का सिलसिला भी लगभग थम सा गया है। यही वजह है कि कोरोना के मामले में अब पूरी दुनिया में राजस्थान मॉडल की चर्चा होने लगी है। राजस्थान के रिकवरी रेट और मौतों के अत्यंत ही कम रेट को देखते हुए कुछ अन्य देशों से लोग भी राजस्थान सरकार से संपर्क कर रहे हैं, यह सुखद संकेत हैं।

कोरोना पर राजस्थान की जीत के मामले को थोड़ा गहराई से देखें, तो सबसे प्रमुख बात यही है कि राजस्थान ने दूसरे राज्यों की अच्छी प्रैक्टिस को खुले दिल से अपनाया और प्रदेश में कोरोना की ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग की गई। तमिलनाडु से पता चला कि रात में कोरोना मरीजों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है उसके बाद राजस्थान में कोरोना मरीजों पर रात में फोकस करना शुरू किया। देश में आबादी के हिसाब से राजस्थान देश में कोरोना टेस्ट के मामले में नंबर वन है, जहां 1 दिन में 30 हजार कोरोना वायरस की जांच की तैयारी है। प्रदेश में कोरोना मौतों को रोकने में ऑपरेशन लीजा का भी बड़ा सहयोग रहा। जिसके तहत आयुष्मान भारत योजना में बुजुर्गों और बीमारों की जानकारी लेकर उनको खुद के घर में ही क्वॉरंटीन करके संक्रमण को फैलने से रोका गया। सबसे पहले सरकार ने अपने शराब कारखानों को बंद कर वहां सैनिटाइजर का उतापादन शुरू किया, और जेलों में भी सैनिटाइजर वर मास्क बनाए जाने लगे। प्रदेश में इंटेंसिव ट्रेसिंग और अधिकाधिक टेस्टिंग की वजह से भी मरीज जल्दी ठीक हो रहे हैं।

इसके साथ ही राजस्थान देश का पहला राज्य है, जहां कोरोना मरीजों मौत की आडिटिंग हो रही है। मरीज को अस्पताल में आने में देरी, पहले से ही गंभीर बीमारी की हिस्ट्री या ऑक्सीजन मिलने में देरी की डिटेलिंग हो रही है, ताकि मौत का कारण सामने आ सके। कोरोना के काबू में आने की एक वजह वहां की रुथलेस कंटेनमेंट प्रक्रिया भी है। जिसके तहत कोरोना को दूसरे इलाके में फैलने से रोकने के लिए कंटेनमेंट वाले पूरे इलाके की सैंपलिंग की जा रही है। राजस्थान में कोरोना मरीजों के तेजी से ठीक होने की एक बड़ी वजह अस्पतालों की बेहतर सुविधाएं एवं तुरंत उपचार भी प्रमुख है। लोग कानून न तोड़ें और क्वारनटीन फैसिलिटी में रहें, इसके लिए सरकार की ओर से स्थानीय प्रशासन को हमेशा एक्शन में रखकर कोरोना मरीजों की सुविधा का पूरा खयाल रखा जा रहा है। गहलोत मानते हैं कि स्थानीय प्रसासन चुस्त है, इसी कारण यह जंग जीतने में वे सफलता की तरफ बढ़ रहे हैं।

तस्वीर साफ है कि कोरोना के बारे में राजस्थान सरकार के मुखिया के रूप में गहलोत शुरू से ही देश की सरकार से भी ज्यादा सजग व सक्रिय दिखे। देश के किसी भी राज्य के मुकाबले गहलोत ने ही सबसे पहले कोरोना के खिलाफ बड़ी जंग की शुरूआत की। सच तो यह है कि कोरोना संकट से निपटने के लिए फैसले लेने के मामले में मुख्यमंत्री गहलोत देश के प्रधानमंत्री मोदी से भी ज्यादा तेज साबित हुए हैं, क्योंकि इस संकट से बचाव के राष्ट्रीय स्तर पर जो प्रयास हुए, उससे पहले ही वे सारे प्रयास गहलोत राजस्थान में लागू कर चुकी थी। वैसे भी, बीमारियों का अपना कोई घर नहीं होता कि वे कहीं जाकर डेरा ही जमा लें। उनकी पूंछ मरोड़कर खदेड़ दो, तो वे चारों खाने चित भी हो जाती हैं। ठीक वैसे ही जैसे राजस्थान में कोरोना संक्रमण आगे सरक ही नहीं पा रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना की रफ्तार को रोककर उसे खत्म होने को मजबूर कर रखा है।

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