जिस भूमि को पसीने से सींचा, उसी की तलाश में भटक रहा छोगाराम

जागरूक टाइम्स 562 Jul 16, 2018


-सिरोही जिले के सिरोड़ी के समीप असावा गांव का मामला

-छह दिन धरने के बाद आज से भूख हड़ताल की चेतावनी

-प्रशासनिक अधिकारियों ने नहीं दिखाई गंभीरता

-अस्सी की उम्र में छोगाराम व बहत्तर की उम्र के पड़ाव पर पत्नी चम्पादेवी

-असावा ग्रामदानी ग्रामसभा की भूल का खामियाजा भुगत रहा एक परिवार

सिरोही। वर्षों तक जिस भूमि पर दिन रात मेहनत कर अन्न उगाया एवं अपना व परिवार का भरण-पोषण किया, उसी जमीन को लेकर आज उसे धरने पर बैठना पड़ा है। पांच-छह दिन से जारी धरने के बावजूद ना तो प्रशासन ही कोई सुध ले रहा है न ही स्थानीय ग्रामसभा ही कोई ध्यान दे रही है। यह मामला है जिले के रेवदर उपखंड के सिरोड़ी कस्बे के समीपवर्ती असावा गांव का। जहां वृद्ध दंपति धरने पर बैठे हैं एवं मंगलवार से भूख हड़ताल की तैयारी में हैं।

पैतृक काश्तकारी की जमीन के लिए हक की लड़ाई लड़ रहे असावा निवासी पीडि़त छोगाराम पुत्र कुपाराम सुथार की ओर से जिला कलक्टर को गत दिनों ज्ञापन सौंपकर बताया गया कि वर्ष 1962 में उसे खातेदारी भूमि आवंटित की गई थी। जिस पर वर्षों तक उसने खेती कर अपना व परिवार का भरण-पोषण किया। उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने के साथ स्वास्थ्य में भी गिरावट आ गई एवं बच्चे भी कामकाज के सिलसिले में अन्यत्र प्रवास पर रहने लग गए। उसकी भूमि रेकर्ड में तरमीम नहीं होने से ग्राम सभा असावा की ओर से उक्त भूमि अन्य ग्रामीणों को आवंटित कर दी गई।

ग्रामसभा की यह भूल इस परिवार पर भारी पड़ी एवं जिस भूमि को छोगाराम सुथार ने अपने पसीने से सींचा, उसे प्राप्त करने को आज उसे एड़ी से चोटी तक का जोर लगाना पड़ रहा है। ना तो भूमि का सीमांकन करवाया जा रहा है एवं न ही जमाबंदी की नकल ही दी जा रही है। ग्रामसभा से लेकर प्रशासन के आला अधिकारियों की चौखट तक दस्तक देने के बादऌ भी किसी ने उसकी पीड़ा नहीं समझी तो जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर गत बुधवार को अस्सी की उम्र में पहुंच चुके छोगाराम अपनी सत्तर वर्षीय पत्नी श्रीमती चम्पादेवी के साथ असावा ग्रामसभा कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।

लेकिन, एक-दो नहीं बल्कि छह दिन बीत जाने के बाद भी किसी ने धरने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। जिला कलक्टर, उपखंड अधिकारी, तहसीलदार व ग्रामसभा अध्यक्ष तक ने सुध लेने की जहमत नहीं उठाई। इस बीच छोगाराम का रक्तचाप बिगडऩे से उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया गया। किन्तु, शनिवार को वो फिर से धरनास्थल पहुंच गए व धरने पर बैठ गए। उनके लौटने पर कई ग्रामीण उनसे मिलने पहुंचे एवं उनकी मांग को जायज ठहराते हुए उनकी बात का समर्थन किया। प्रशासन के शिथिल रवैये के चलते दंपत्ति ने मंगलवार से भूख हड़ताल करने का निर्णय किया है।

आवंटित हुई थी काश्तकारी भूमि
बकौल पीडि़त वर्ष 1962 में असावा में उन्हें खसरा नंबर 649 में 12 बीघा 15 विस्वा भूमि आवंटित की गई थी। इस आवंटन को अब ग्रामसभा ने खारिज कर भूमि अन्य लोगों को आवंटित कर दी है।

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