मनरेगा कार्य स्थलों पर श्रमिकों को नही मिल रही छाया और पानी की व्यवस्था

जागरूक टाइम्स 127 May 25, 2019

घाणेराव । महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत कार्य स्थलों पर श्रमिकों को छाया और पानी एवं दवाईयों की सुविधा देना अनिवार्य है। मगर देसूरी पंचायत समिति क्ष्ेात्र में संचालित हो रही इस योजना के तहत कार्य स्थलों पर नही तो छाया और नही पानी की व्यवस्था है। जबकि दवाईयां भी कार्य स्थल पर समय पर नही पहुंच रही है। उसके बावजुद तेज धुप में मनरेगा श्रामिक रोजगार को लेकर कार्य कर रहे है। वही जिम्मेदार है कि इन श्रमिकों के लिए छाया पानी की व्यवस्था करने के लिए कोई ठोस कदम नही उठाये रहे है। जिसके कारण श्रमिकों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

ज्ञातव्य है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को लागु किया था,तब श्रमिकों को कार्य स्थलों पर छाया एवं पानी की व्यवस्था पुख्ता की गई थी। जिसके तहत प्रत्येक कार्य स्थल में टेंट की सुविधा और पानी की टंकी को पहुंचाया जाता था। जबकि एक सप्ताह में एक बार एएनएम द्वारा कार्य स्थल पर जाकर श्रमिकों का स्वास्थ्य जॉच कर दवाईयां वितरण की जाती थी। मनरेगा कार्य स्थल पर श्रमिक सुबह पहुंचते ही मेट के सहयोग से छाया के लिए टेंट को लगा देते थे। और कुछ महिला पानी की टंकी को पानी से भर दिया जाता था। जबकि महिला श्रमिको के छोटे छोटे बच्चों को रखने के लिए झुले रखे जाते थे। और 100 दिन कार्य करने वाले श्रमिकों को बहुमान कर विदाई श्रमिक मिलकर देते थे।

उस समय मनरेगा कार्य स्थलों पर श्रमिकों की भीड़ हुआ करती थी। और ग्रामीण अंचल में मनरेगा को लेकर श्रमिकों में भारी उत्साह हुआ करता था। मगर समय के साथ इस अधिनियम के तहत मिलने वाली श्रमिकों की सुविधा कम होने लगी। जिसके कारण इन श्रमिकों को धीरे धीरे इस योजना से मोहभंग हो लगा। मनरेगा योजना के तहत छाया के लिए जो टेंट और पानी के लिए जो टंकी कार्य स्थल पर हुआ करती थी। पिछले कई वर्षो से कार्य स्थलों से गायब हो है,जिसके कारण तेज गर्मी में भी श्रमिकों को बिना छाया तेज धुप में कार्य स्थल पर कार्य करना पड़ रहा था।

छाया में विश्राम करने के लिए श्रमिकों को नाडी तालाबों में स्थित छोटे छोटे पेड़ो की छाया का सहारा लेना पड़ता है। जबकि पानी की सुविधा भी स्वयं श्रमिकों द्वारा ही किया जाता है। जिसके लिए दुर दुर श्रमिकों को पानी लेने के लिए तेज धुप में जाना पड़ता है। जबकि प्रत्येक सप्ताह में श्रमिकों का स्वास्थ्य जॉच कर दवाईयां देने का प्रावधान था। मगर अब तो कभी कभार ही एएनएम कार्य स्थल पर पहुंच पाती है। जबकि कई दिनों तक समय पर दवाईयां भी नही मिल पाती है। गर्मी कहर बढ़ता जा रहा है,ऐसे में श्रमिकों का स्वास्थ्य अच्छा रहे इसको लेकर कार्य स्थलों पर जिम्मेदारों द्वारा छाया पानी की पुख्ता व्यवस्था करनी होगी। अन्यथा श्रमिकों के स्वास्थ्य पर गर्मी के बुरा असर पड़ सकता है।

श्रमिकों को मिलती थी कार्य स्थलों पर बेहत्तर सुविधा
मनरेगा कार्य स्थलों पर काम करने वाले श्रमिकों को अधिनियम के तहत छाया पानी के साथ दवाईयों की बेहत्तर सुविधा मिनती थी। जिसके तहत कार्य स्थल पर छाया के लिए टेंट और पानी के लिए टंकी लगाई जाती थी। मगर अब यह सुविधा श्रमिको को नही मिल पा रही है।

दवाईयां भी नही मिल रही है
तेजधुप में मनरेगा श्रमिकों द्वारा कार्य स्थलों पर काम किया जा रहा है,जिसके कारण कभी उनकी तबीयत खराब हो सकती है। मगर पहले कार्यो स्थलों पर सयम पर एएनएम दवाईयां लेकर पहुंच जाती थी। और श्रमिकों का स्वास्थ्य की जॉच कर दवाई देती थी। अब तो हालत और खराब हो गये है,तेज गर्मी में भी समय पर दवाईयां कार्य स्थल पर नही पहुंच रही है।

श्रमिकों को नही मिल रही सुविधा
मनरेगा अधिनियम के तहत जो सुविधा श्रमिकों को कार्य स्थलों पर मिली चाहिए,वह सुविधा नही मिल रही है। जिसके कारण श्रमिकों को तेज धुम में भी कार्य स्थल पर छाया पानी की कोई सुविधा नही है। जबकि कार्य निर्माण में उपयोग में ली गई सामग्री का भुगतान आठ माह से नही हो रहा है ।

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