दो साल पहले हादसे में मरा युवक, परिजनों के साथ बांगड़ अस्पताल में पहुंच कराई पूजा

जागरूक टाइम्स 54 May 15, 2019

जोधपुर/पाली (ईएमएस)। बांगड़ अस्पताल में मंगलवार को चिताड़ गांव से पहुंचे कुछ लोगों ने मृत आत्मा को अपने साथ ले जाने के नाम पर 2 घंटे तक तंत्र क्रियाएं की। भोपा के निर्देशन में अस्पताल के मुख्य द्वार के बाहर ज्योत जलाई गई। निंबुओं को वार कर 4 रास्तों पर फिंकवाया तथा पानी की धार देकर ज्योत लेकर अपने साथ जीप में ले गए। चौंकाने वाले बात तो यह है कि इस पूरे घटनाक्रम को लोग देखते रहे। अस्पताल प्रबंधन ने भी मुख्य द्वार पर चल रही इस पूजा-अर्चना को रोकने का प्रयास नहीं किया।

चिताड़ गांव में रहने वाले तीन दोस्त वर्ष 2017 को बाइक पर पाली की तरफ आ रहे थे। इस दौरान बागवास के समीप दूध के टैंकर ने तीनों को चपेट में ले लिया। इससे तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तीनों को पहले सोजत के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। वहां से उनकी हालत गंभीर होने पर बांगड़ अस्पताल में लाया गया था। यहां पर एक युवक की मौत हो गई थी। दो युवकों के हाथ-पैरों में फैक्चर हुआ था। घटना के बाद अपने दोस्त की मौत के बाद से ही यह दोनों युवक सहमे हुए थे। गत दिनों वे अपने क्षेत्र के ही भोपा के पास पहुंचे, तब उसने दोस्त की आत्मा को अस्पताल में ही भटकने का दावा करते हुए यहां पर लाने को कहा था।

बांगड़ अस्पताल के गेट पर पहले ज्योत जलाई, पूजा-अर्चना की। भोपा के कहने पर परिजनों ने जिस बिस्तर पर युवक की मौत हुई थी। नारियल जलाकर की गई ज्योत को वे उस बेड पर ले जाना चाहते थे। ट्रोमा वार्ड में ज्योत ले जाने का प्रयास करने पर वहां मौजूद गार्ड समेत अन्य कर्मचारियों ने उनको अंदर नहीं घुसने दिया। मृतक की आत्मा पाली में ही भटकने का दावा करने वाला भोपा भी इन लोगों के साथ जीप में पाली पहुंचा। इन लोगों ने पहले जीप में ही कुछ देर तक पूजा-पाठ किया। इसके बाद वे अस्पताल परिसर के बाहर ही धूप तथा अगरबत्ती की।

इस बारे में जैसे ही भोपा व परिजनों से पूछा तो बताया कि किसी युवक की आत्म अस्पताल में भटक रही है। उसकी शांति के लिए वे पूजा कर रहे हैं। ज्योत के रूप में साथ लेकर जाएंगे। इस दौरान कुछ मरीज और मौजूद लोग भी वहां मौजूद थे, जो केवल मूकदर्शक बने रहे। जैसे ही अस्पताल में यह सूचना फैली, यह अंधविश्वास देखने के लिए गाड़ी के पास भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। अस्पताल के मुख्य द्वार पर करीब 2 घंटे तक पूजा-पाठ का क्रम चलता रहा। भोपा के निर्देश पर नींबू वार कर 4 रास्तों पर फिकवाएं गए। मुख्य द्वार पर पानी के छींटे मारे।

इसके बाद नारियल की ज्योत को जीप में रखकर परिजन अपने साथ ले गए। भोपा का दावा था कि यहीं तो आत्मा है। पाली मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. केसी अग्रवाल का कहना है कि अस्पताल में भोपा व मृतक के परिजनों द्वारा धूप जलाने व पूजा-अर्चना करने के बारे में मुझे किसी तरह की जानकारी नहीं है। पीएमओ ने भी मुझे नहीं बताया है। मैँं इस बारे में पता करवा रहा हूं, अगर ऐसा हुआ तो गलत है।


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