मुठाणा खेत पर आये रॉक पाईथन ने नीलगाय शावक को बनाया निवाला

जागरूक टाइम्स 179 Sep 6, 2019

देख ग्रामीणों की फुली सांंसें वनकार्मिको ने पकड़कर जंगल में छोड़ा,तब राहत महसूस

सादड़ी -मुठाणा बान्ध मेडतिया कृषिफार्म पर रॉक पायथन की घटना -ग्रामीणों का लगा जमघट कडी मशक्कत बाद वनकार्मिको ने पकड़ा क्षैत्र में हो रही लगातार बारिश बाद सरीसर्प व रेप्टाईल प्रजाति वन्यजीव इन दिनें बहुतायत में आबादी क्षैत्रो के आसपास मंडऱाते हूये दिखाई दे रहे हैं जिन्हे देख ग्रामीणों में खौफ पसर जाता हैं जिन्हे वनकार्मिक कडी मशक्कत से पकड़ पुन:जंगल में स्वतन्त्र विचरण को छोड़ रहे हैं तब ग्रामीण राहत की सांस ले रहे हैं। गुरूवार की मध्यरात भी ग्राम भीटवाड़ा सरहद में एक मगरमच्छ ओर मुठाणा ग्राम सरहद मेडतिया कृषि फार्म पर नीलगाय शावक को मुंह में दबाये बैठा एक रॉक पाईथन दिखाई दिया तो ग्रामीणों में ऊहापौह की स्थिति होगई जिन्हे वनकार्मिकों ने सुरक्षित पकउ़कर जगंल में छोड़ दिया तब जाकर ग्रामीणों ने राहत्त की सांस ली।

वनकार्मिकों के अनुसार देररात एक मगरमच्छ भटककर भीटवाड़ा ग्राम की सरहद आबादी क्षैत्र में शिकार की नीयत में स्वतन्त्र विचरण देखा हैं तो खौफजदा सैकडो ग्रामीणों का जमघट लग गया ग्रामीणों की सूचना पर वनकार्मिको को नहीं आता देख ग्रामीणों ने बाली एसडीएम भास्कर विश्नोई को सूचना दी जिनकी सूचना पर देर रात पौने बारह बजे सादड़ी अभयारण्य वनकार्मिकों का दल उसे रेस्क्यू करने भीटवाड़ा पहूचा उसी दौरान बाली सामाजिकी वानिकी वनक्षैत्र के वनकार्मिकों का दल भी रेस्क्यू करने पहूचा दोनो दल ने कड़ी मशक्कत कर मगरमच्छ को बिना संसाधन सुरक्षित पकड़कर विभागीय जीप से पुन:देररात बाली जोड़ जंगल जलीय क्षैत्र में स्वतन्त्र विचरण को छोड़ दिया

तब जाकर ग्रामीणों ने राहत्त की सांस ली इसी तरह मुठाणा बान्ध समीप मेड़तिया कृषिफार्म पर एक रॉक पाईथन दिखाई दिया जिसने डेढ दो माह के नीलगाय शावक को अपना निवाला बना दिया जो नीलगाय शावक को निगल रहा था कि पास घास काट रहे आदिवासी कृषक की नजर उसपर पड़ी तो आसपास रहवासी ग्रामीण में खौफ पसर गया ग्रामीणों ने नीलगाय शावक को जीवित समझ कर उसे रॉकपाईथन के मुंह से छुडवायालेकिन तब तक उसकी जान निकल चुकी थी ग्रामीण खेतमालिक की सूचना पर वनपाल बाबुलाल विश्नोई,वनरक्षक जितेन्द्र जाट,हेमेन्द्रकुमार,ईश्वरसिंह चौहान सहित वनकार्मिक मौके पर पहूचे जिन्होने कडी मशक्कत कर झाडियों में पेड़ से लिपटकर बैठे अजगर को छुड़वाया ओर बोरे बन्द कर उसे एक जलस्त्रोत पर स्वतन्त्र विचरण को छोड़ दिया। तब ग्रामीणों ने राहत्त् की सांस भरी।

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