कुंभलगढ वन्य जीव अभ्यारण्य में स्थित खरणी टेकरी भील बस्ति के बच्चे शिक्षा से है वंचित

जागरूक टाइम्स 186 Jun 11, 2019

घाणेराव । अरावली की सुरम्य श्रंृखला में स्थित कुंभलगढ वन्य जीव अभ्यारण्य में खरणी टेकरी के भील समाज के बच्चों के लिए राज्य सरकार ने 11 वर्ष पूर्व प्राथमिक विद्यालय शुरू किया गया था। मगर वन विभाग के विरोध करने के कारण इस विद्यालय को एक वर्ष बाद शिक्षा विभाग ने बंद कर दिया था। जिसके बाद इस बस्ति में रहने वालो बच्चों का रिश्ता शिक्षा से टुट गया। जबकि इनके परिजनों ने बच्चों से शिक्षा से जोडऩे की कोशिश की मगर बस्ति से चार और पॉच किला मीटर दुर होने के कारण यह बच्चे शिक्षा ग्रहण नही कर पाये। आज भी इस बस्ति के बच्चे शिक्षा से वंचित है।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने कुंभलगढ वन्यजीव अभ्यारण्य के बीचों बीच में स्थित खरणी टेकरी भील बस्ति में एक प्राथमिक विद्यालय खोलने के आदेश जारी किये थे। इस आदेश के तहत प्रा.अनुभाग के पत्र क्रमाक प 21(7) शिक्षा-1/प्रा.शि /2005 पार्ट 2 जयपुर दिनांक 31 मार्च 2008 एवं आयुक्त प्रा.शि.राजस्थान बीकानेर के प्रत्र क्रमाक शिविरा/ प्रा.शै./जी-11 न.प्रा.विद्यालय स्वीकृत /07-08 दिनांक 26 अप्रैल 2008 के आदेशानुसार जारी किये गये इस आदेश की पालना करते हुए देसूरी ब्लॉक प्रा.शि.अधिकारी ने नवीन प्रा.विद्यालय का शुरू करने के लिए शिक्षक को नियुक्ति कर दिया। और इस शिक्षक ने अभ्याण्य में पहुंच कर 19 बच्चो का नामांकरण कर विद्यालय शुरू किया। विद्यालय की कोई व्यवस्था नही थी,ऐसे में शिक्षक को मजबुर होकर इस शिक्षक को एक नदी में खुले आसमान में बच्चो को अध्ययन करना पड था। वही विद्यालय को वन विभाग के गेस्ट हाऊस के बाहरी परिचर में खडे एक पेड के निचे चलाने की स्वीकृति वन विभाग अधिकारी से लेने गये तो उन्होने परिचर देने से साफ मना कर दिया।

ऐसी स्थित में इस विद्यालय को कहा पर चलाया जाये यह एक बडी समस्या शिक्षक के सामने पैदा हो गई ऐसे में मजबुर होकर यह शिक्षक जहा भी छाया मिल जाती है वहा पर विद्यालय को शुरू कर देते थे। जबकि बरसात का मौसम है ऐसे में बच्चो को अध्ययन कराने के साथ दस्तावेज रखने में भी परेशानी शिक्षक को उठानी पड सकती थी। उसके बावजुद शिक्षक हर रोज बच्चों को अध्ययन करने वाले के लिए खरणी टेकरी पहुंच जाता था। वही वन विभाग के अधिकारी इस विद्यालय को बंद करवाने में जुट गये थे। क्योकि उसय समय वन विभाग के अधिकारी खरणी टेकरी बस्ति को अभ्यारण्य से बाहर निकलने में लगे हुए थे।

जबकि उनके पास पहचान पत्र और राशन कार्ड होते हुए भी उनको सरकारी सुविधा नही मिल पाती थी। वही विभाग मुख्य द्वार को ताला लगा देते थे,जिसके कारण खरणी टेकरी बस्ति के लोगो का बाहर आना मुश्किल हो जाता था। वही शिक्षा विभाग ने प्राथमिक विद्यालय निर्माण को लेकर वन विभाग से स्वीकृति मांगी तो उन्होने स्वीकृति देने से मना कर दिया। आखिर शिक्षा विभाग परेशान होकर इस बस्ति से विद्यालय का बंद करने आदेश जारी कर दिये। जबकि इस बस्ति से गरासिया कॉलोनी चार और गुडा भोपसिंह पॉच किमी दुरी पर स्थित है।

ऐसे वहा से छोटे छोटे बच्चों को यह पर भेजना खतरे से खाली नही था। चार से पॉच गुजरती नदीया और विच्छरण करते वन्यजीव के कारण इस बच्चों को अध्ययन करने के लिए इन विद्यालयों में पहुंचना संभव नही था। ऐसे में कई परिवारों तो अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए मकानों को छोड़कर बाहर आ गये। जबकि आज भी 15 परिवार अपने बच्चों के साथ रहकर वहा पर खेती कर जीवन व्यापन कर रहे है। मगर उनके बच्चे शिक्षा से आज भी वंचित है,जिसके कारण उनको भविष्य खराब हो रहा है।

बच्चों का शिक्षा से जोडऩा चाहिए
कुंभगलए वन्यजीव अभ्यारण्य में स्थित खरणी टेकरी भील बस्ति के लोगो को सभी सरकारी सुविधा मिल रही है। ऐसे में इनके बच्चों को शिक्षा से वंचित नही रखना चाहिए,इसको लेकर शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर इन बच्चों को शिक्षा से जोडऩे का प्रयास किया जायेगा। श्रीमती संतोष चन्द्रशेखर मेवाडा सरपंच घाणेराव

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