कहीं लबालब तो कहीं बूंदों को भी तरसे

जागरूक टाइम्स 252 Sep 30, 2021

जैसलमेर। देश के सबसे कम बारिश वाले इलाके के तौर पर पहचान रखने वाले सीमांत जैसलमेर जिले में मानसून की शुरुआत और आखिरी दौर में कई बार कुछ हिस्सों में मूसलाधार और झमाझम बारिश से पानी-पानी के हालात बनने के बावजूद कई ग्रामीण इलाके ऐसे हैं, जहां इस बार भी बारिश बहुत कम हुई है। इन क्षेत्रों में अब भी सूखे के हालात हैं। वहां किसानों ने जो थोड़ी बहुत बुवाई की थी, वह भी खराब हो गई। जिले के रामगढ़ और सम इलाकों के साथ नहरी क्षेत्रों में कई जगहों पर बारिश बहुत कम हुई है। यह हालात तब है जबकि जिले में इस वर्ष औसत वर्षा से करीब १८० प्रतिशत ज्यादा पानी अब तक बरस चुका है। साल खत्म होने में अभी तीन महीनों का समय बाकी है। नहरी क्षेत्र में रामगढ़ से सुल्ताना और मोहनगढ़ तक के मुरब्बों में बादल ज्यादा मेहरबान नहीं हुए। दो दिन पहले मोहनगढ़ क्षेत्र के मुरब्बों में अवश्य अच्छी बारिश दर्ज हुई।

जैसलमेर और आसपास बिखरी खुशियां
जिले के जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा बारिश जिला मुख्यालय और उससे लगते इलाके में ही हुई है। दूसरी ओर पोकरण व नोख क्षेत्रों में पूर्व की भांति इस बार भी मानसून ने जाते-जाते भरपाई कर दी। जैसलमेर के ऐतिहासिक गड़ीसर सरोवर में पानी की इतनी ज्यादा आवक हुई कि जलराशि टीलों की प्रोल से बाहर निकल गई। शहर के आसपास के १५-२० किलोमीटर के क्षेत्रों में चारों तरफ अच्छी बारिश से ग्रामीणों के चेहरे खिले हुए हैं। वैसे सीमांत इलाकों में भी बरसात से घास अच्छी मात्रा में होने से पशुओं के लिए चारे-पानी का बंदोबस्त हो चुका है।

पोकरण में सर्वाधिक बारिश
इस साल अब तक के वर्षा के आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो बादल सबसे ज्यादा मेहरबान पोकरण रेनगेज स्टेशन पर हुए हैं। जहां अब तक ४०३ मिलीमीटर पानी बरस चुका है। ऐसे ही नोख में ३९९, जैसलमेर में ३५२ और फतेहगढ़ में ३४३ मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई। वहीं सम में १३७ तथा रामगढ़ में महज १३९ मिमी बारिश होने से अब तक औसत का आंकड़ा भी हासिल नहीं हो पाया है। समग्र तौर पर देखें तो इस साल एक जनवरी से अब तक जिले में १७७३ मिमी वर्षा हुई है तथा बारिश का औसत २९५.५ मिमी हो चुका है। यह औसत से १७९.१५ प्रतिशत ज्यादा है। साल २०२० में इससे भी ज्यादा बरसात हुई थी। तब जिले में औसतन ३५१ मिमी बारिश हुई थी। कोरोना से उबरे जिले में इस साल मानसून का आगाज अच्छा हुआ था लेकिन मध्य में पूरा सावन मास के सूखा निकल जाने से किसानों को मायूस होकर रह जाना पड़ा। अब जाते हुए मानसून ने एक बार फिर कई इलाकों को तरबतर कर दिया है। इसका कितना लाभ खेती-किसानी को मिलेगा, यह देखने वाली बात होगी।

किसान बेहाल, पीने का पानी मिला
जिले के किसान लगातार परेशान ही चल रहा है। दो साल पहले नहर टूटने से पानी कम मिला। उसके बाद टिड्डी दलों का हमला हो गया और अब बरसाती पानी असमान रूप से गिरा है तथा यह असमय भी है। किसानों को जितना नहरी पानी चाहिए, उतना नहीं दिया जा रहा है। हालिया बारिश से पीने के पानी की जरूर व्यवस्था हुई है वरना जलदाय महकमा यह व्यवस्था नहीं कर पाता। पशुधन को अवश्य राहत मिली है। - प्रतापसिंह सोलंकी, जिला प्रमुख, जैसलमेर

नहरी किसानों में चिंता
जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र के कई नहरी क्षेत्रों में इस बार बरसात बहुत कम हुई है। ऊपर से नहरों में भी सिंचाई के लिए पानी तीन बारी में ही दिया जाना है। पानी की कमी होने से नहरी किसानों के लिए फसलों की सिंचाई करना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे हालात में पांच-सात बीघा से ज्यादा क्षेत्र में सिंचाई नहीं हो पाएगी। - विजय बिस्सा, नहरी किसान प्रतिनिधि

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