जोधपुर में प्रधान चुनाव हारी रालोपा प्रत्याशी को नोटों की मालाओं से मिले 70 लाख, गिनने वाले हैरान

जागरूक टाइम्स 223 Oct 2, 2021

जोधपुर. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की प्रत्याशी प्रधान पद का चुनाव हार गईं. उन्हें कांग्रेस के प्रत्याशी ने हराया. हार के बाद ग्रामीणों की सहानुभूति की कुछ ऐसी उमड़ी कि देखते ही देखते 70 लाख रुपये एकत्रित हो गए. चुनाव हार चुकी प्रत्याशी ब्रह्माकुमारी पारासरिया के पति रामप्रसाद उर्फ बबलू को लोगों ने 70 लाख रुपये भेंट किए. आर्थिक रूप से सांत्वना देने के लिए लोगों ने ये राशि दी थी, ताकि हार के बाद चुनाव में खर्च हुई राशि के मलाल को दूर किया जा सके. धन्यवाद सभा में हुई इस क्राउड फंडिंग के मौके पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल भी उपस्थित रहे. उनकी मौजूदगी में लोगों ने जनसहयोग का ये अनूठा उदाहरण देखा.

प्रधान का चुनाव हार चुकी महिला प्रत्याशी ने लोगों से मिले सहयोग के लिए धन्यवाद सभा का आयोजन किया. ग्रामीणों ने हाथों-हाथ जनसहयोग राशि (क्राउड फंडिंग) के तौर पर चुनाव हार चुकी ब्रह्माकुमारी पारासरिया के पति रामप्रसाद उर्फ बबलू को नोटों के हार पहनाना शुरू कर दिया. मारवाड़ में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है. सरपंच चुनाव के दौरान भी कई स्थान पर चुनाव हार चुके प्रत्याशी को लोगों ने नोटों की माला पहना कर उसका सारा खर्च वहन कर लिया. हार चुके कई प्रत्याशियों को पचास-पचास लाख रुपए तक का सहयोग मिल चुका है.

रालोपा से चुनाव लड़ा, कांग्रेस ने हराया
दरअसल, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) की प्रत्याशी के रूप में ब्रह्माकुमारी ने प्रधान पद का चुनाव लड़ा था. कांग्रेस प्रत्याशी के सामने वह चुनाव हार गईं. पहले पंचायत समिति चुनाव और बाद में प्रधान चुनाव में उनका काफी पैसा खर्च हो गया. ब्रह्माकुमारी के परिवार की क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक पकड़ रही है. उनके ससुर स्वरूप राम पारासरिया कई बार सरपंच रहे.

परसराम मदेरणा का करीबी रहा है परिवार
परसराम मदेरणा के करीबी माने जाने वाले स्वरूप राम भोपालगढ़ मार्केटिंग सोसायटी के 30 से अधिक वर्ष तक अध्यक्ष रहे. वे बरसों तक पीसीसी के सदस्य भी रहे। उनके बाद बबलू भी गांव के सरपंच रह चुके हैं. समय के साथ इस परिवार ने रालोपा का दामन थाम लिया. इस सभा में रालोपा के संयोजक हनुमान बेनीवाल भी मौजूद रहे. लोग सुबह से शाम तक नोटों की माला पहनाते रहे. जनसहयोग की राशि 70 लाख रुपए तक जा पहुंची.

सरपंच-प्रधान चुनाव में होता है लाखों का खर्चा!
वर्तमान दौर में साधारण परिवार से जुड़े व्यक्ति के लिए सरपंच, पंचायत समिति व जिला परिषद के साथ ही प्रधान व जिला प्रमुख का चुनाव लड़ना आसान नहीं रहा है. इन चुनाव में प्रत्याशी का खर्च न केवल लाखों में बल्कि कई बार एक करोड़ से बाहर चला जाता है.

यदि प्रधान व जिला प्रमुख का चुनाव है तो फिर खर्च परिस्थिति के अनुसार बदलता रहता है. इन चुनावों में भारी भरकम राशि खर्च करने के बावजूद हार जाने पर प्रत्याशी पर दोहरी मार पड़ती है. ऐसे में उसकी तरफ से अपने मतदाताओं से मिले समर्थन के लिए धन्यवाद सभा का आयोजन किए जाने की परम्परा शुरू हो चुकी है. इसमें लोग अपनी क्षमतानुसार सहयोग राशि प्रदान कर सांत्वना देते हैं.


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